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Nithari Kand Surinder Koli Death: हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत, हत्या या खुदकुशी? देश के सबसे भयावह निठारी हत्याकांड से जुड़े सुरेंद्र कोली की हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में लाश मिलने से हड़कंप मच गया है।
नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में मृत पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, कोली लाल माता मंदिर के सामने 'सदा राम' नाम से पहचान छिपाकर चाय की दुकान चला रहे थे। 18 सितंबर 2026 को उनका शव उनकी ही दुकान के अंदर मिला। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है और शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है।
सुरेंद्र कोली को 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी से बच्चों और महिलाओं के गायब होने व मानव अवशेष मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। करीब दो दशक तक जेल में रहने और मौत की सजा पाने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों की कमी और जांच में गंभीर खामियों के आधार पर नवंबर 2025 में उनकी क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार करते हुए उन्हें आखिरी मामले (रिंपा हलदार हत्याकांड) से भी बरी कर दिया था।
जेल से बाहर आने के बाद कोली हरिद्वार में एकांत जीवन बिता रहे थे। उनकी अचानक हुई मौत ने निठारी कांड की पुरानी यादों और जांच की कमियों को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। देखिए ऋचा पराशर की यह खास रिपोर्ट।

About the Story:
Surinder Koli, who was acquitted in the infamous 2006 Nithari serial killings case by the Supreme Court in late 2025, was found dead under mysterious circumstances in Haridwar, Uttarakhand. Living under a hidden identity and running a small tea stall in Bhupatwala, Koli's death has raised fresh questions about the tragic case that shook India two decades ago.

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~HT.410~PR.514~ED.276~GR.506~VG.HM~

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Transcript
00:00हरिद्वार से आई इस खबर ने करीब दो दशक पुराने निठारी कांड की भयावयादे फिर से ताजा कर दी है
00:06निठारी हत्यकांड मामलों में दोजर पच्चिस में सुप्रिम कोर्ट से बरी किये गए
00:12सुरेंद्र कोली की हरिद्वार के भूपत वाला इलाके में मौत हो गई है
00:17और ये खबर आप तक पहुँच चुकी होगी
00:19पुलिस के मताबिक कोली पचले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहे थे
00:23और लाल माता मंदर के सामने एक छोटी सी चाई की दुकान चलाते थे
00:27इसे दुकान पर वुम्रत पाए गए
00:30पुलिस ने उनके परिवार को घटना की जानकारी दे दी है
00:33उनकी मौत की परस्तितियों को लेकर पुलिस की जाच जारी है
00:37लेकिन सुरेंद्र कोली का नाम सामने आते ही कहानी
00:40सीधे साल 2004 और 2005 के उस दौर में पहुँच जाती है
00:45जब नॉडा के निठारी गाउं से एक के बाद एक बच्चे और बच्चियां गायब हो रहे थे
00:51पूरी कहानी आपको आज एक बार फिर से बताते हैं
01:10करीब दो दशक तक जिस नाम के साथ देश के सबसे भयावा आपराधिक मामलों में से एक जुडा रहा
01:17उस सुरेंद्र कोली की कहानी अब एक और बेहर चोकाने वाले मोड पर आकर रुख गई
01:22हरिद्वार में सुरेंद्र कोली मृत पाए गए
01:25मही सुरेंद्र कोली जो निठारी कान के मामले में करीब दो दशक जेल में रहे
01:30जिन्हें अदालतों ने मौत की सजा सुनाई जिनकी सजा पर देश भर में बहस हुई
01:35और फिर 2025 में सुप्रिम कोच ने उन्हें निठारी के आखरी लंबित मामले में भी बरी कर दिया
01:43अब 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के भूपत वाला इलाके में छोटी से चाय की दुकान की अंदर उनका शव
01:51मिला
01:51पुलिस के मुताबिक कुश्रुवाती जाच में मामला पत्खुशी का लग रहा है
01:56लेकिन मौके से कोई नोट नहीं मिला है जिससे इसकी पुश्टी की जा सके और मौत की परिस्ततियों की जाच
02:03जारी है
02:04शब को पोस्ट मॉटम के लिए भेजा गया है
02:07याने कि इस वक सबसे जरूरी बात ये है कि उनकी मौत के अंतिमकारण कोले का जाच पूरी होने का
02:12इंतजार किया जाए
02:14लेकिन सुरेंद्र कोले की मौत की खबर सिर्फ आज की एक क्राइम स्टोरी नहीं है
02:18ये खबर सीधे हमें 19-20 साल पीछे उस निठारी गाउं में ले जाती है
02:24जहां एक के बाद एक बच्चे और महिलाए गायब हो रहे थे
02:27और आखिरकार एक ऐसी जाच सामने आई जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया
02:33सबकी रू काप उठी थी
02:34हर इद्वार में कोली पिछले कुछ महीनों से रह रहे थे
02:37रिपोर्ट्स के मताबिक उन्होंने अलग पहचान के साथ नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश की थी
02:42वो सेक्योरिटी और दूसरे छोटे मूटे काम करते रहे
02:45और फर भुपत वाला इलाके में एक छोटी सी चाय की दुकान शुरू की
02:49दुकान लाल माता मंदर के सामने बताई जा रही है
02:52स्थानिय लोगों के लिए वो एक समाने व्यक्ति की तरह लग रहे थे
02:55कई लोग को उनकी असली पहचान तक उनकी मौत के बाद पता चली
03:15कोट के रिकॉर्ड के मुताबिक 2005 के शुरुआत से निठारी इलाके में
03:20महिलाओं और बच्चों के गाइब होने की शिकायते सामने आने लगी थी
03:25मार्च 2005 में बच्चों ने D5 और D6 के बीच खुले हिस्से में मानव शरीर का एक हिस्सा देखा था
03:33बाद में 3 दिसंबर 2006 को नालिक इस सफाई के दौरान फिर मानव अफशेश मुलने की बाद सामने आई
03:39निठारी में रहने वाले कई परिवारों के लिए उनके बच्चे अचाना गायब हो रहे थे
03:45परिवार पुलिस के सामने पहुँशते थे अपने बच्चों को ढूढने की गुहार लगाते थे
03:49और उन्हें उमीद होती थी कि पुलिस उनकी मदद करेगी लेकिन बाद में
03:53इस पूरे मामले की जाच और शुरुवाती पुलिस कारवाई पर गंभीर सवाल उठे
03:58इसी दोरा ने के बाद एक गुमशूदगी की कड़ियां सिक्टर 31 के D5 कोठी से जूडने लगी
04:05ये मकान कारुबारी मुनिंदर सिंग पंधेर का था और सुरेंदर कूली वहां घरिलू नौकर के तौमट पर काम करता था
04:14दिसंबर 2006 में जाँच आगे बढ़ने के बाद इस मकान के आसपास से मानव अवशेश बरामत होने लगे
04:20इसके बाद पूरे देश में हड़कब मच गया
04:23जाँच अजंसियों के सामने सवाल था कि आखिर इतने बच्चे और महिलाए कहां गई
04:29उनके साथ क्या किया गया क्या हो
04:31और क्या D-5 कोछी इस पूरी कहाने की कोई एहम कड़ी थी
04:36मुरिंदर सिंग पंडेर और सुरेंदर कोली को गरता किया गया
04:40बाद में मामला CBI को सौपा गया और अलग-अलग मामलों में मुकदमे चले
04:45कोली के खिलाफ कई मामलों में दोश सिधी हुई और उसे मौत की सजा भी सुनाई गई
04:50एक मामले में 2009 में ट्राइल कोट ने उसे मृत्य उदंड दिया
04:54जिसे बाद में अलहबाद हाई कोट ने बरकरार रखा
04:57और 2011 में सुप्रिम कोट ने भी उसकी सजा की पुष्टी की
05:02बाद में 2015 में उसकी मौत की सजा को बरकैद में बदल दिया गया
05:07यही से इस कहानी का दूसरा और सबसे महतोपुन अध्याय शुरू होता है
05:12अदालत में पेश किये गए सबूत क्योंकि जिस मामले में शुरूआत में तस्वीर बहत सपष्ट दिखाई दिये रही थी
05:20अदालतों में आगे बढ़ने के साथ उसी जाच और सबूतों पर गंबीर सवाल उठने लगे
05:24कोली के खिलाफ अभ्योचन पक्ष का एक एहम आधार उसका कथित कबूल नामा और उससे जुड़ी बरामदगी थी
05:32लेकिन बाद के मामलों में इन ही सबूतों की विश्वस्नियता पर सवाल उठने लगे
05:382023 में इलहाबाद हाई कोट ने कोली को निठारी से जुड़े 12 मामलों में बरी कर दिया
05:45अदालत की फैसले के खिलाफ राज्यकी अपील सुप्रेम कोट पहुंची और पर जुलाई 2025 में सुप्रेम कोट ने इन बरी
05:51किये जाने वाले फैसलों को बरकरार रखा
05:54लेकिन उस समय भी एक मामला बाकी था रिमपा हलदार हत्याकांड इसी मामले में कोली की दोश सिद्धी पहले सुप्रेम
06:02कोट से बरकरार रह चुकी थी
06:04इसलिए कानूनी और उस पर उसकी रिहाई पूरी तरह संभव नहीं हुई
06:09फिर आयाई 11 नवेंबर 2025 सुप्रेम कोट की तीन जजों की बेंच ने सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव पिटिशन मन्जूर कर
06:18ली
06:18और उस आखरी दोश सिद्धी को भी खत्म कर दिया
06:22कोट ने कहा कि जब उसी सबूत के आधार पर जुड़े दूसरे मामलों में अदालत अभियोजन के साक्ष को विश्वस्मिय
06:30या अस्विकार्य मान चुकी है
06:32तो उसी आधार पर एक मामले में दोश सिद्धी बनाए रखना न्याय संगत नहीं होगा
06:38अधालत ने ये भी कहा कि आपराधिक कानूं में गंभीर संदेह को पुखता सबूत का विकल्ब नहीं बनाया जा सकता
06:47सुप्रिम कोट के फैसले में जाँच की कम्यों को लेकर गंभीर टिपड़ियां थी
06:51अधालत ने गहा कि लंबे समय की जाँच के बावजूद वास्तुग अपराधि की पहचान कानूनी मान को के मताबिक स्थाबित
06:58नहीं हो सकी
06:58यानि अधालत का फैसला ये नहीं था कि निठारी में अपराध हुआ ही नहीं
07:05अदालत का सवाल ये था कि जिन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया उनके खिलाफ उपलब्द सबूत किया दो शिस्तिद
07:12करने के लिए कानूनी रूप से परयाप्त थे
07:14और अदालत ने पाया कि उस मानक पर अभियोजन का मामला टिक नहीं पाया और यहीं अंतर समझना बेहत जरूरी
07:22है
07:22क्योंकि निठारी की भयावहता और अदालत का फैसला दो अलग सवाल है
07:27बच्चों और महिलाओं के गायब होने की घटनाएं हुई मानाव अवशेश मिले
07:31परिवारों ने अपने बच्चों को खोया लेकिन किसी व्यक्ति को आपराधिक रूप से दोशी ठहराने के लिए
07:37जालत को संदे से आगे जाकर कानूनी रूप से स्विकार और विश्वस्ने सबूट चाहिए होते हैं
07:43और जब वही सबूट अलग-अलग मुकदमों में अलग-अलग निश्कर्शों तक पहुंचा तो सुप्रम कोर्ट ने अंती मामले में
07:49भी कोली को राहत दे दी
07:51करीब दो दशक तक जेल में रहने के बाद सुरेंद्र कोली नवेंबर दोहसार परचिस में बाहरा गए
07:57और उसके बाद हरिद्वार चले गए
08:00वहां उन्होंने काथित तोर पर अपनी पहचान छपा कर एक सामान जिन्दगी शुरू कर दी
08:06रिपोर्ट्स के मताबिक स्थानिया लोग उन्हें सदा राम के नाम से जाते सदा राम
08:10जो ये बदला हुआ नाम है कोली का जो वहां पर जाकर उन्होंने अपने नाम बदल लिया
08:14उन्होंने काम किया रहने की जगह बदली और आखिरकार चाए के दुकान चुरू की
08:20कि कोछी दिनों बाल वो मृत पाये गए और अब इस मौत ने फिर से कई सवाल खड़े कर दिये
08:27हैं क्या ये वाकई खुदखुशी थी पुलिस की शुरुवाती जाच किस दिशा में जाएगी पोस्मोटम रिपोर्ट किया कहेगी क्या कोई
08:35ऐसा कारण सामने आएगा जुससे म
08:47निश्चित निशकर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी लेकिन निठारी के परिवारों का सवाल इससे भी पुराना है जिन माता पिता ने
08:54अपने बच्चों को खोया उनके लिए ये कहाने किसी कानूनी फैसले के साथ खत्म हुई ही नहीं कई परिवार आज
09:01भी उन या
09:18निठारी कार्ण सामने आने के बाद उनका परिवार भी उस लंबे नियाइक संघर्ष का हिस्सा बना आज इतने वर्षो बात
09:25भी उनके लिए ये सिर्फ एक केस नमबर नहीं है बलकि उनकी बेटी के जिन्देगी से जुड़ा सवाल है यही
09:31वजह है कि निठारी कार्ण पर
09:47प्राधि साबित करने के लिए सबूतों के ऐसी कड़ी जरूरी है जो अदालत के सामने टिक सके निठारी मामले में
09:53सुप्रिम कोट ने पाया कि अभियोजन उस कसौर्टी पर खरार नहीं उतर सका लेकिन दूसरे तरफ परिवारों का दर्द अपनी
09:59जिगे कायम है परिवार
10:01जब जिस दिन कोली रिहा हुआ उस दिन परिवारों ने साफ साफ कहा कि हमारे सामने उस नमना जुर्म कुबूल
10:08किया था उसने एकसेब्ट किया था कि उसने ही बच्चों को गायब किया और अदालत में केस पहुँचा और ये
10:16आज क्या हो रहा है हमारे साथ ये निया नहीं
10:18ये तब जब कोली की रिहाई हुई तो पेड़ित परिवारों का कहना था
10:21एक तरफ अदालत का फैसला है जिसमें कहा गया कि उपलब्ध सबूत दो शसिद्धी के लिए परियापत नहीं थे
10:27दूसरी तरफ वे परिवार हैं जिनके बच्चे कभी वापस नहीं लोटे
10:30इन दोनों वास्तविकताओं को एक साथ समझना ही निठारी कांड की समसे कठिन सच जाई है
10:36और अब दोहजार चब्श में सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत ने
10:41इस पुराने अध्याई को एक बार फिर देश की सुर्खियों में ला दिया है
10:45करिब दो दशक पहले नोडा के निठारी गाउं से शुरू हुई ये कहानी
10:50पुलिस जाच, गुमशूदगी, बरामद, अवशेस, गरफतारियों और मौत की सजाव, जेल, अपील और आखिरकार बरी होने तक पहुँची
10:58और अब इसका एक नया अध्याय हर दुआर की एक छोटी से च्वाई की दुकान में जुड़ गया है
11:03लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल शायद आज भी वही है
11:07निठारी में जुन बच्चों और महिलाओं ने अपनी जान गवाई उनके साथ आखिर क्या हुआ था
11:12और उस पूरी तरासिदी की कानूनी सच्चाई कभी पूरी तरह सामने क्यों नहीं आ सकी
11:18इस खबर में फिलहाल इतना ही
11:19लेकिन निठारी कान की ये कहानी हमें ये जरूर याद दिलाती है
11:24कि किसी भी आपराधिक मामले में सिर्फ आरोप नहीं
11:28बल्कि मजबूत जांच और अदालट में टिकने वाले सबूत भी उतने ही जरूरी होते हैं
11:35और जब जांच में कमिया रह जाती है
11:37तो उसका असर सिर्फ अदालत के वैसले पर नहीं
11:41बल्कि उन परिवारों की पूरी जिंदगी पर पड़ता है
11:44जो वर्षों तक जवाब और नियाय का इंतजार करते रहें
11:50आप क्या सोचते हैं
11:52क्या पंदेर और कोली ने उन बच्चों को महिलाओं को लड़कियों को मारा था
11:58क्या सिर्फ सबूतों में जो कमिया रहीं
12:01जो चांच के दौरान कमिया हुए
12:03जल्दी जल्दी क्योंकि इस केस को निप्टाया गया था
12:05तो क्या उनका मियों के बज़े से इन्हें रिहाई मिल गई
12:08क्योंकि आज तक असली कातिल कौन है पता नहीं चला
12:11अदालत ने तो इन्हें रिहा कर दिया
12:14लेकिन आप क्या सोचते हैं
12:15कॉमेंट में हमें ज़रूर बताइए
12:17और ऐसी ही एहम और बाकी खबरों के लिए
12:20बने रही है One India Hindi के साथ

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