00:00राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे,
00:05राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे, राधे
00:29से समझना आसान नहीं
00:31सबसे पहले एक बात
00:33समझना जरूरी है
00:34कृष्ण पूर्ण है
00:36इसलिए ये कहना सही नहीं होगा
00:38कि कृष्ण में कोई कमी थी
00:39और राधा ने उसे पूरा किया
00:41तो फिर राधा कृष्ण को पूर्ण कैसे करती है
00:44इसे एक सरल उधारण से समझी सूरे और उसके किरण
00:49सूरे स्वयम प्रकाश मान है लेकिन उसके किरणे उस प्रकाश को चारो और प्रकट करती है
00:56इसी तरहां वैशन अव दर्शन में श्री कृष्ण को शक्ती मान और श्री राधा को
01:02उनकी हलादनी शक्ती, अर्थार्ध, आनंद और प्रेम की आंतरिक शक्ती के रूप में समझाया जाता है
01:10इसलिए कहा जा सकता है कृष्ण प्रेम के आधार है और राधा उस प्रेम की सर्वोच्य अभिव्यक्ति
01:17राधा कृष्ण में कोई कमी पूरी नहीं करती
01:20बलकि राधा के माध्यम से कृष्ण का प्रेम और आनंद प्रकट होता है
01:25अब सवाल आता है राधा का कृष्ण से पहले प्रकाटे क्यों हुआ
01:30ब्रज की परंपरा में राधा के प्रकाटे को कृष्ण के प्रकाटे से पहले माना जाता है
01:36लेकिन इसका एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ भी समझाया जाता है
01:40यहाँ पहले का मतलब केवल जन्म क्रम में है
01:44कृष्ण तक पहुँचने से पहले भक्त को प्रेम और भक्ती का मार्ग सीखना है
01:49और राधा को इसी दिव्वे प्रेम और भक्ती के सर्वोच यादर्श के रूप में देखा जाता है
01:55अब ध्यान दीजिए
01:56हम कहते हैं राधा क्रिष्ण, राधे क्रिष्ण
02:00कई भक्त पहले कहते हैं राधे और फिर क्रिष्ण
02:04इसे केवल एक परंपरा की तरह ना देखे
02:07इसके पीछे एक सुन्दर भक्ती भाव है
02:10पहले भक्ती फिर भगवान
02:12पहले प्रेम फिर प्रेम अस्पद
02:15राधा का प्रेम वो प्रेम माना जाता है जिसमें भक्त ये नहीं सोचता
02:20मुझे क्रिष्ण से क्या मिलेगा
02:34और सफलता दीजी
02:35ये भी भक्ती का एक रूप हो सकता है
02:38लेकिन राधा भाव हमें इस से आगे ले जाता है
02:42वो सिखाता है अपनी इच्छा से पहले भगवान की इच्छा को समझना
02:47ये ही निस्वार्थ प्रेम का आदर्श है
02:50एक मा और बच्चे का उधारन लीजिए
02:53बच्चा मा से खिलोना मांगता है
02:56ये उसके इच्छा है
02:57लेकिन जब वही बच्चा मा को ठका हुआ देख कर पूछता है
03:01मा आपको कुछ जाहिए
03:03तो वो मा की खुशी के बारे में सोच रहा है
03:06यही अंतर स्वार्थ से सेवा और इच्चा से प्रेम की ओर ले जाता है
03:12इसलिए राधा को केवल कृष्ण की प्रिये कह देना
03:15उनके आध्यात्मिक सवरूप को बहुत छोटा कर देना होगा
03:19कृष्ण भगवान है
03:21राधा उनकी प्रेम और आनंद की आंतरिक शक्ती है
03:26कृष्ण पूर्ण है
03:27राधा उस पूर्ण प्रेम की सर्वोच अभिव्यक्ती है
03:31इसलिए राधा कृष्ण को पूर्ण नहीं बनाती
03:34बलकि राधा कृष्ण की पूनता में छिपे प्रेम और आनंद को प्रकट करते हैं
03:40और शायद इसी कारण वरंदा वन में कृष्ण का नाम लेने से पहले भक्त के होटों पर आता है राधे
03:48और फिर कृष्ण राधे राधे
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