00:00इस बार समय से पहले यह रोट डंजा है, तो यह निवेदा नहीं, यह निवेदा नहीं है, यह वाशा मेरे
00:09साथ कभी उप्योग मत करना है।
00:30का काफिला रोकर साफ कह दिया कि साहब सडक चाहिए, आशवाशन नहीं, हाथों में तक्तियां थी, जुवान पर रोट नहीं,
00:37तो वोट नहीं का नारा, और सामने खड़ा था सप्ता का काफिला, जनता ने ग्यापन दिया और अपनी परिशानी बताई,
00:44एक ग्रामीन ने यहा
01:00लोगतंतर में जनता का अधिकार है कि वो अपने समस्या बताए और अपने वूट के जरिये अपनी नाराजगी भी व्यक्त
01:06करे, लेकिन वीडियो में संधिया जिस अंदाज में जवाब देते नज़र आए, उसमें सडक के गड़ों सो ज्यादा रराजशनातिक चर्चा
01:13ती
01:28ये भाषा मेरे साथ कभी उपयोग मत करना है, समझें? ने, ने, किसी की भी बात करना हूँ, आप आके
01:38निवेधन करो, मेरी जिम्मिदारी है, काम करना है, ठीक है? चलिए.
01:42सिंध्या ने ग्रामिवड का उंगली दिखाते हुए कहा कि ऐसी भाषा का इस्तिमाल में सामने मत करना और साथ में
01:48ये कहा कि अपनी बात निवेधन के रूप में पेश करो, आप निवेधन लेकर आओ, मैं काम करूँगा. बस फिर
01:54क्या था? सोशल मीडिया को मसाला मिल गया
01:56सडक की मांग पीछे चली गई, चर्चा शुरू हुई कि आखिर जनता से बात करने का लोगतांतरिक अंदाज कैसा होना
02:02चाहिए और जनता किस भाषा में, किस अंदाज में नेताओं से बात करें, मंत्रियों से बात करें, अपनी समस्याएं बताएं,
02:10इसकी भी क्या कोई कित
02:25से लेकर खड़ा आदमी, दिश्व ऐसा कि मानू प्रजा दरबार में अपनी फर्याद लेकर पहुंची, फर्क सिर्फ इतना कि आज
02:31जनता के हाथ में तक्ती है, और पांस साल में एक ऐसा हथियार भी आता है, जिसका नाम होगा मत्दान,
02:39जिसका नाम होगा मत्द और वोट,
02:41यहां से तस्वीर बदलती है, यहां पर दल्चसक बात ये भी है, कि जिस सडक के लिए जनता को काफिला
02:47रोकना पड़ा, उसी सडक पर विवात के कुछी समय बाद, तीन करोड रुपाई की खोशना हो गई, अब करोद गाम
02:53पहुंचकर, सिंध्या ने विधायक निदी से स�
03:08बताई क्यों, क्या सडक का गढढ़ा तब तक दिखाई नहीं देता, जब तक उसमें राशनीती का पहिया ना फस जाए,
03:13क्या प्रशाशन को जुनता की आवाज सुनने के लिए, पहले कैमेरा आन होना जरूरी है, और क्या विकास की फाइल
03:20तब ही तीज दोड़ेगी, जब
03:22सोशल मीडिया पर विडियो वाइरल हो जाए, गुलाब गंज की कहानी सिर्वेक सडक की कहानी नहीं है, यह उस व्यवस्था
03:27की तस्वीर है, जहां पर आम आदमी पहले आवेदन करता है, निवेदन करता है, हाथ जोडता है, कि साहाब सडक
03:34बना दीजिये, फिर शिकायत करत
03:36और आखिर में सडक पर उतर कर आवाज बुलन करता है, धमकी देता है कि आपको अगर चुना है, तो
03:42काम के लिए चुना है, आपकी आवाज को सुनने के लिए नहीं, आप काम कीजिये, हम आपको अपनी फर्याद लेकर
03:50बताएंगे, और उस पर अगर काम नहीं होता, तो आ�
03:56पायद फाइल दोड़ती है, जो कि इस केस में भी हुआ, जनता को सडक चाहिए, पानी चाहिए, सफाई चाहिए, और
04:02सबसे जरूरी चीज जवाब दे ही की है, लोगतंत में जनता को दरबार में खड़े होकर फर्याद करने वाली प्रजा
04:08नहीं, सवाल पूछने वाला ना�
04:21होना पड़े, मंतरी जी, नेता जी, विधायक जी, खुद जाएं, देखें कि आपने जो वादे किये थे, आपको जिन वादों
04:29के बाद चुना गया, आपको जिन कामों के लिए चुना गया, क्या वो काम, जमीन पर वैसा नजर आता है,
04:35जैसे कि सरकारी फाइलों और आपके
04:37लंबे भाशनों में होता है, बहराल मामले को आप कैसे देख रहे हैं, कॉमन ब्लॉक साब के लिए है, अपनी
04:42टपणी, अपनी राय ज़रूर दीजेगा, मेरा नाम है मुकंद, आप पने रहिए, वन इंडिया के साथ, शुक्रियां
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