00:00दोस्तों आपने दिल्ली में SIR के कारणा में तो देखे लिए हैं कैसे बड़े बड़े VIP को भी SIR के
00:06नोटिस भज़े गए हैं
00:07लेकिन आज हम आपको SIR की एक और बड़ी विसंगती बताते हैं जिसे विसंगती का ही नाम दिया है
00:15आपको पता है कि दिल्ली में करीब 33,00,00 मद्दाता को विसंगती के नाम पर नोटिस भज़े गए हैं
00:20हैरत तो यह है कि इनमें बड़ी संख्या में ऐसी बेतुकी बातों के लिए नोटिस भज़े गए हैं
00:25जिसका मद्दान के अधिकार से कोई संबन्द नहीं
00:28सूचना के अधिकार के लिए लड़ने वाली अक्टिवेश्ट अंजली भारत द्वाज ने इन विसंगतियों को उजागर किया है
00:34उन्होंने अपनी एक सोशल मीडिया पोश्ट में इसका ब्यारा साजा करते हैं
00:38इस सीधे चुनाव एक से जवाब मांगा है
00:41अंजली कहती है कि इसी आई को बताना चाहिए कि दिल्ली में लोगों को ऐसी विसंगतियों के नाम पर नोटिस
00:46क्यों भेज़ जा रहे हैं
00:47जिनका मदाता बनने की पातरता से कोई लेना देना ही नहीं है
00:54अगर मदाता के पाँच या उससे अधिक भाई भेहन है
00:57अगर मद्दाता और उसके दादा दादी नाना नानी की उमर में 40 साल से कम का अंतर है
01:04अगर मद्दाता और उसके मता पिता की उमर में 15 साल से कम का अंतर है
01:08अगर मद्दाता और उसके भाई बेहन की उमर में 9 महीने से कम का अंतर है
01:12आखिर इन बातों का मद्दान के अधिकार से क्या संबंद है
01:16अंजली कहती हैं कि यह पूरी तरह मनमानी और अतार के कवायद अब लोगों को परिशान करने
01:21और उन्हें मताधिकार से बंचित करने का जरिया बंती जा रही है
01:26वैसे दोस्तों आपको बता दूँ कि दिल्ली नहीं हर राज्य का यही हाल है
01:29मैं यूपी से आता हूँ यूपी का वोटर हूँ और मैं भी यही सब जहल चुका हूँ
01:33मुझे नोटिस आया था कि मेरे उम्र और मेरे दादा दादी की उम्र का अंतर मेल नहीं खाता
01:37जबकि SIR form में मेरा और मेरे माता पिता का ही ब्यारा था
01:402003 के SIR में भी मेरा नाम था और मैं लगातार वोट देता आ रहा हूँ
01:45इसी तरह मेरी पत्नी के नोटिस मिला कि आपके पिता का नाम अन्यच्छे लोगों के पिता का भी नाम है
01:51अरे भाई वे आट भाई बहन है तो कोई क्या करे लेकिन इनी बातों के लिए हमें भी दोड़ाया गया
01:57तो ये है SIR का कमाल जो नाम जोडने के बजाए सेलेक्टिव धंग से नाम डिलीट करने की कावायत बन
02:03गई है
02:04और इसमें बड़ी मुश्किल VIP को नहीं है बलकि आम आदमी आम मददाता को ही हो रही है क्योंकि उसकी
02:10कहीं भी जल्दी से सुनवाई नहीं
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