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मोदी और भूपेंद्र भाई पटेल का गुजरात जिसे वाइब्रेंट गुजरात कहा जाता है और जिसका विज्ञापन दिखाकर ही मोदी जी केंद्र की सत्ता में पहुंचे। उसी वाइब्रेंट और विकास के मॉडल गुजरात के सूरत में आज 2026 में भी मज़दूर-कारीगर समय पर वेतन, काम के घंटे और साप्ताहिक अवकाश जैसी बेसिक मांगों को लेकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।
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00:03दोस्तों आज आपको गुजरात मॉडल की हकिकत दिखाते हैं
00:06मुदी जी का वो गुजरात जिसे वाइब्रेंट गुजरात कहा गया
00:10और जिसका विध्यापन दिखाकर ही वो केंदर की सप्ता में पहुंचे
00:13उसी वाइब्रेंट और विकास के मॉडल गुजरात में
00:16आज 2026 में भी मज़दूर कारिकर समय पर वेतन काम के घंटे और सापताहिक अफकाश जैसी बेसिक मांगों को लेकर
00:25प्रदेशन करने के लिए मजबूर है
00:27तो आईए चलते हैं गुजरात के अधोगे नगरी सूरत और देखते हैं सूरत हाल
00:48नमस्कार सलाम बेबाद भाशा में आपका स्वागत है मैं हूं मुकुल सरल
00:52सूरत गुजरात का सबसे बड़ा अध्योगिक नगर है यह कपड़ा अध्योग डाइमंड कटिंग और पॉलिशिंग के लिए प्रसिद है
01:00इसलिए शहर को सिल्क सिटी और डाइमंड सिटी के नाम से भी जाना जाता है
01:04लेकिन इसी सिल्क और डाइमंड सिटी में आज भी हजारो लाखो मज़दूर कारिगर अमानवी एस्टिटियों में काम करने को मजबूर
01:12है
01:12उन्हें न समय पर वितन मिलता है ना सापताई कफकाश ना काम के घंटेते हैं जिस चीज के लिए अमरिका
01:20की शिकागो में 140 साल पहले 886 में आंदुलन हुआ उसके लिए आद 2026 में मोदी के विश्व गुरू भारत
01:28और विक्सित गुजरात में मजदूर कामगारों को आंदु
01:32भुलन करना पड़ रहा है हमको संदे को छुटी चाहिए हर संदे को और सेथिया लोग वरस्व डुटी करवा रहे
01:40हैं जित कि लिए लगी पर करते हैं
02:03और हर तेहवार को चुट्टी है हमारा मांग है अब गुजरास सरकार के इंदर में आज में भी आप मतलब
02:12के धियान दें आप मेरा कानून मतलब की पास करें
02:17और हम अपना हग नहीं बताइए रोड में नहीं आएंगे तो क्या करेंगे गर्मेंट से ही उमीद है कि संड़े
02:28को चुट्टी होना चाहिए क्यों कि एक दिन परिवार के नाम होना चाहिए
02:31बारा घंटे ड्यूटी करने के बाद महीना में एक भी छुट्टी नहीं मिलता है कम चार छुट्टी कम चाहिए तवियत
02:38भी खराब हो ये उस टेंग तो भी अराम चाहिए ना
02:40महीने में 26 ड्यूटी होनी चाहिए और सेट लोग 12 घंटा ड्यूटी डेली कराते हैं नहीं जाने पर फोलो फोन
02:49करकर के बुलाते हैं कि क्यों नहीं आया नहीं आओ तो फिर गाली का बात करते हैं यह लोग समय
02:54पर पगार नहीं देते हैं फिर हम क्या करें
02:57देखिए दोस्तों इंपरोडरी कारीगर का कमिशनर आफिस पे इस समय सभी ज्यादा से ज्यादा जितने भी वरकर हैं
03:05सभी लोग यहां पर आकर अपना सपोर्ट दिखा रहे हैं और अपनी मांगे पूरी कर रहे हैं
03:11संडे को छुट्टी को लेकर और यह जायज है क्योंकि संडे को छुट्टी लेकर और हर जगा हर छेतर में
03:19हर सहर में यह जुट्टी जायज है और इसलिए यह गलत नहीं है और छुट्टी मांगना हमारा हक है और
03:26हम अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं
03:28म काम के उची दाम हो ग्राइप मालिक सब्सक्राइपेते अरोनीं Kenu
03:33लिए homme करने चलखोर कि परके � 숨ो चिह वाङपारे नेों की ज़ये मीलता है क्वड़ा धोने ऊर्डिकत होता है
03:45और हम
03:58आओ और हम लोग क्या करें इसलिए रूम के चलते से हम लोग परसाने हो गए हैं कि हम लोग
04:02क्या बता हैं यह मज़ूर हाल के दिनों में कई बार सड़क पर उतर चुके हैं आंदूलन कर चुके हैं
04:07कलेक्टरेट आफिस पर भी धरना प्रशेशन किया लेकिन कोई सुनवाई न
04:24चाहता हूं संडे को छुट्टी मिलना चाहिए यह हमारी लड़ाई है और हम लोगों को यह बहुत सोसड हो चुका
04:30दोस्तों तो आप लोग जागरूप हो जाईए और सभी एक जुट होके बोलिए संडे की छुट्टी होनी चाहिए तो होनी
04:37चाहिए क्योंकि हम लोग 10 साल स
04:52घंटे और सब्ता में एक छुट्टी हर मजदूर करमचारी का मानगी हक ही नहीं कानूनी हक भी है लेकिन गुजराज
04:58सरकार और उसका प्रशाशन मालिकों के खिलाप नहीं जाना चाहता या कहिए कि दोनों की सांड काट है मालिकों की
05:05लोबी बहुत मजबूत है और वो सरका
05:20होना मुश्किल होता है फिर भी इस बार काफी संक्या में मजदूर एक चुट नजर आ रहे हैं मांगे नमाने
05:25जाने पर एक अक्टूबर को फिर आंदोलन और प्रदेशन का ऐलान किया गया है मगर उनके शांती पूर आंदोलन की
05:32आवाज दूर तक नहीं पहुंच पा रही
05:35नेशनल मीडिया में इसकी कोई चर्चा नहीं इसका उधान यूपी का नवेड़ा भी है यहां भी मजदूर आंदोलन की तभी
05:40चर्चा हुई जब उसमें कुछ हिंसा हो गई यह करा दी गई लेकिन इसकी गाज भी मजदूर उपर पड़ी और
05:46वो आज भी मुकद में जहेल
05:48रहें यही वज़ा है कि सूरत के एक मजदूर का यह मेसेज यह पुकार मुझे बीचाइन कर देती है कि
05:54सर जी हमारी खबर कब दिखाओगे हमारी बात कब उठाओगे हम एक ही बार खड़े होने की हिम्मत कर सकते
06:02हैं बार बार नहीं
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