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  • 20 minutes ago
चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों पर गरमाई राजनीति, विपक्ष ने सरकार को घेरा

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00:00Election Commission of India के बीच मदभेद की खबरे सामने आ रहे हैं उसी को लेकर चुनाब आयोग में मदभेद
00:06की खबरों को लेकर विपक शब्ती खब रहार कर रहा है
00:09S.R. को लेकर EC में मदभेद है दोनों आयुकतों ने 10 महीने में 14 बार आपत्ती जताई है
00:16S.R. को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स भी यही कह रहे है कि EC में मदभेद रहा है
00:22यानि कि सरसम्मती से सभी तैसले नहीं लिए गए दोनों आयुकतों ने 10 महीने में 14 बार आपत्ती जताई
00:27लेकिन ये आपत्ती दरसल दर्ज नहीं हुई
00:31और हमारे सेयोगी संजे शर्मा इस वक्त हमारे साथ जुड़ गए है
00:34संजे जिस तरह की खबरें आई हैं मीडिया में वो तमाम सवाल खड़े कर रही है
00:39और ये सवाल सिर्फ मीडिया नहीं खड़े कर रहा है
00:42अब जो कुछ दे पहले हमने उपी रावच साहब से बात की जो पूर्व चुनाव आयुक्त रह चुके
00:47वो कहते हैं उनके शब्द हैंगे कि ऐसा यार इसका मतलब गैर कानूनी इल्लीगल है
00:53तो ये बड़े बहुत बड़ा सवाल है ये
01:18मतभयत हो तो बहुत से फैसला लिया जा सके और यहीं ऐसा होता है
01:23तो मतभेद होना विचार में विरोध होना ये कोई नई बात या अस्वाभाविक बात नहीं है ये स्वाभाविक है लेकिन
01:30अगर ऐसा प्रमान मिलता है कि बहुमत के फैसले को नजर अंदाज करते हुए अल्पमत का फैसला सिर्फ इसलिए लागो
01:38किया गया कि वो वरिष्ट �
01:40अधिकारी के विचार थे तो इसकी जांच होनी चाहिए और इस पर लोगों का अपती हो सकती है जब रावत
01:46साब चीफ एलेक्शन कमिशनर थे उस समय भी उनके सामने भी उन्होंने ये कहा कि मतभेद होने स्वाभाविक हैं मतभेद
01:53होते हैं लेकिन जहां तब गवा की बात
02:00है या ऐसा है और की प्रक्रिया के बात है उसमें अगर कोई फैसला इस तरह का सिंध होजाए जा
02:05जांच से आई
02:06इसमें अब ये देखना दिल्चस भोगा कि जांच इनिशेट कौन करता है, क्या चुनावायोग आंतरिक जांच इनिशेट करता है, क्या
02:13मामला सुप्रीम कोट तक जाता है, सुप्रीम कोट के आदेश के बाद होता है,
02:16या क्योंकि चुनावाय स्वायत तसंस्ता है तो ऐसे में केवल केवल और केवल सुप्रीम कोट ही इस मामले को कि
02:23न्याइक समीक्षा कर सकता है और जाच कर सकता है तो देखना दिल्चस होगा कि क्या है मामला सुप्रीम कोट
02:29तक जाता है जाता है तो कौन लेकर जाते हैं और फ
02:46कि जो न्यूक्ति थी उसकी फाइलें मंगाई गई सुप्रीम कोड ने गोपनिया फाइलें मंगाई उसका ध्यायन किया और उस पर
02:53फिर अपना निरने दिया तो यह एक बहुत यह अंग्रेजी में जिसको कहते पेंडरा बाक्स खुलना वह भानुमती का पिटारा
03:00तो खुल च
03:14किस तरह से अब तक गड़बडी हुई है चुनाव आयो का कहना है कि पहले आपको दिखा रहे थे कि
03:20मीडिया रिपोर्स में क्या कहा गया है एक दिन में चार-चार बार आपत्या जताएगे जिस पर चुनाव आयो ने
03:25कहा है कि विचारों में मतभेद और एसमेती स्वभाव
03:27है उसके बाद मेडिया रिपोर्स में कहा गया कि आपत्यों के बारे मुख्य चुनाव आयोग को भी बताया गया लेकिन
03:32चुनाव आयोग में निर्ने युनानिमस था फिर सारी आपत्यां ओन रिकॉर्ड दच कराएगे जिस पर चुनाव आयोग कह रहा है
03:38कि बहुमत के निर
04:20लिया गया है
04:22कि तरफ क्या कहते हैं वो आएए सुन लीजे
04:27This man should be suspended.
04:29This Gyanesh Kumar should be suspended forthwith.
04:33All the work of the commission,
04:34all the work of changing electoral,
04:37I mean, finalizing the voters list should be stopped.
04:41Supreme Court also think about
04:44resorting to the extraordinary part of holding fresh elections
04:47in the context of the fact that all these directions,
04:50all these elections have been held,
04:51not under the control of the commission,
04:53but under the control of Gyanesh Kumar.
04:59तो बड़ा सवाल यहां पर खड़ा कर दिया है
05:03और आपको बता दी कि क्या क्या हुआ है
05:05इस पूरे मुद्धे में
05:0728 एक्टूबर को चुनाव आयोग ने मंजूरी के बिना ये कहा जा रहा है
05:11कि सवाल जो उठाए, जो जो चौदा आपतियां दर्च कराई गई हैं,
05:16वो हम आपको स्क्रीन पर दिखा रहे हैं,
05:17दो अलग आयोक्त चुनाव आयोक्त जिन्नोंने अपनी 14 बार विरोध जताया और नोटिंग दी,
05:24वो हम आपको इस वक्त दिखा रहे हैं,
05:2616 अप्रेल को विरोध दर्च कराया गया,
05:29उसके बाद 28 एक्टूबर 2025 को ये विरोध दर्च कराया गया,
05:35सञे शद्वा मेरी सहयो की जूरगे है,
05:37सञे अगर ये मामला कौर्ट पहुचता है सुप्रीम कौर्ट,
05:41जाहित तोर पर कौन ये मामला ले जाता है ये तो वक्त बताएगा,
05:45लेकिन अगर ये मामला कौर्ट में आता है,
05:47तो किस तरीके से internal inquiry का भी order आ सकता है और अगर ये फ्रक्रिया होती है तो कैसे
05:52होगी?
05:54बिलकुल सबसे पहले तो मैं ये बताऊँ कि निर्वाचन आयोग इस बात से इंकार नहीं कर रहा है कि मतभेद
05:59होते रहे हैं, शुरू से ही होते रहे हैं, जब से ये तीन सदर सी आयोग बना है।
06:04लेकिन मत्बेदों का मतलब ये कतA इन्हें Next
06:08हैां कि एक ही आदमी की चल रही है और ये डिसेंट भी हुए हैं । लेकिन उनका ये कहना
06:16है कि अलग-अलग
06:17मुद्दों पर अलग-अलग डिसेंट छीром करतरव meek उनका एक ह suits यह हैं। बहुत कम ऐसा मौका
06:33एक साथ हो गए हैं और मुख्य निर्वाचन आयोग तो अकेले पड़ गए हैं तो उन्होंने मामले को थंडे बस्ते
06:38में भी डाला है तो ताकि बाद में कब जब कभी आम सहमत ही बनेगी तब उस पर देखा जाएगा
06:44लेकिन जहां तक आपका प्रशन है कि सुप्रिम कोट में
07:00जहूर जाएगी और अगले एक दो दिन में ही वो याचे का दाखिल होगी और उस पर सुप्रिम कोट को
07:06ये पूरा अधिकार है कि वो गोपनिय फाइले मंगा कर अपने पास देखे अगर कोई ऐसी चीटे जिसमें आम नागरिकों
07:13के अधिकारों का हननन हो रहा हो आम नागर
07:29करने वाली संस था अगर सवालों के घेरे में आती है तो कोई तो ऐसा होगा कहते हैं कि बाबा
07:34सब को डांटे बाबा को कौन डांटे बाबा को डांटने वाले का भी इंतिजाम लोगतंतर में किया गया है कि
07:40कोई एक सूपर बाबा नहीं होगा पर संजे यहां पर बात एक ब
07:57पता ही नहीं था और उनके नाम से आदेश जारी किये गए. जो वेबसाइट का आदेश जारी किया उन्हें पता
08:03ही नहीं था. मीटिंगs से पहले अजेंडा
08:05शेर नहीं होता था. तो यह बात स्रफ महज और सहमती की नहीं है. बिलकुल और इस पिर एक
08:11गहन जांच होनी चाहिए कि जो चुनाव आयोक कह रहे हैं उसका आधार क्या है और जो निर्वाचन आयोक का
08:18आदेश है उसका आधार क्या है उसमें कहीं भी है तो जनता के साथ एक धोखा है और उस धोखे
08:22के जांच होनी चाहिए चीजें सामने आनी चाहिए तो उसमें मुझ
08:34भरे निगाहों से सुप्रेम कोट चोड़ के तेंगे

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