Skip to playerSkip to main content
देश के प्रमुख संवैधानिक और स्वायत्त संस्थानों को लेकर इन दिनों सियासी गलियारों से लेकर आम जनता के बीच गहरी चिंता और बहस छिड़ी हुई है। विपक्ष और कई जानकारों का लगातार यह आरोप रहा है कि केंद्र सरकार देश की निष्पक्षता बनाए रखने वाली संस्थाओं जैसे चुनाव आयोग, रिजर्व बैंक, और केंद्रीय जांच एजेंसियों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले रही है। हाल ही में पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र Garg द्वारा सामने आए खुलासों और बयानों ने इस आग में घी का काम किया है जिससे आर्थिक आंकड़ों से लेकर प्रशासनिक स्वतंत्रता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। आम नागरिकों के मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या लोकतंत्र की रक्षा करने वाले ये स्वतंत्र स्तंभ अब सरकार की कठपुतली बनकर रह गए हैं। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और ज्ञानेश कुमार जैसे शीर्ष पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी जनता लगातार सवालिया निशान लगा रही है। इस विशेष वीडियो में हम इसी बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि किस प्रकार देश की सर्वोच्च संस्थाओं की स्वायत्तता को कथित तौर पर कमजोर किया जा रहा है। लोकतंत्र के इस दौर में संस्थागत नियंत्रण और तानाशाही प्रवृत्तियों के बीच पिसती आम जनता की आवाज को इस रिपोर्ट में प्रमुखता से उठाया गया है।

This comprehensive report explores the mounting concerns and widespread public debate surrounding the alleged institutional capture of India's core democratic pillars by the central government. Amidst fierce discussions on whether vital bodies like the Election Commission, Reserve Bank of India, and investigative agencies are being reduced to mere puppets, revelations from former top bureaucrats have intensified the crisis. Citizens and political analysts are questioning the transparency of high-profile appointments and the increasing centralization of power that threatens the foundational checks and balances of our democracy. We analyze how institutions meant to act independently are facing unprecedented pressure, raising alarms about the future of free and fair governance in the country. The discussion delves into the implications of administrative control, economic oversight compromises, and the fading boundaries between party governance and state machinery. Join us as we break down the hard facts, expert insights, and what this institutional overreach means for the ordinary citizens of India.

#InstitutionalCapture #ModiGovernment #IndianDemocracy #ElectionCommission #RBIControl #SubhashChandraGarg #IndianPolitics #DemocracyUnderThreat

~PR.512~HT.408~GR.506~VG.HM~

Category

🗞
News
Transcript
00:00आज ECI के उपर भी सवाल उट गया है, घ्याने जी के उपर भी सवाल उट गया है, आप थोड़ा
00:05ये समझाइए, गवर्मेंट के साथ आपने काम किया है, are all these institutions, जिनके बारे में हम बच्पन से सुनते
00:12आए, RBI के बारे में, election commission के बारे में, गवर्मेंट में आपने काम किया है
00:17आपको लगता है, आर्दे compromise, अब compromise हो चुके है कि ने, reality क्या है?
00:23देखे, 2019 के बाद, ये दोर शुरूआ देश में, जो हमारे सारे independent institutions हैं, चाए election commission of India
00:35हो, चाए CAG हो, चाए RBI वगरा वगरा, इन सभी
00:43institutions को, सरकार में कोशिश की, कि वो, उनकी विचारधारा के हो, उनके तरह से चलें, और जो सरकार की
00:55नीती है, preference है, उसके इसाफ से काम करें, और वो उनके प्रती loyal रहें, उनके विचारों के प्रती loyal
01:05रहें, उनके जिंडा के
01:06प्रती loyal रहें और अगर
01:08नहीं है तो फिर
01:10ऐसे लोगों को जो independent
01:12हैं जो अपना
01:14दिमाग इस्तिमाल करना चाहते हैं
01:16उनके लिए सरकार दीरे-दीरे
01:18जगा खताम हो गए
01:20और जैसा कि ऐसी
01:22इस्तितियों में होता है
01:23आप पिछले
01:255-6 साल में ऐसे लोग
01:28आगये हैं सिस्टम में
01:29जो ज़्यादा तर सरकार के
01:31बिडिंग करने के तयार है
01:33और सरकार
01:35के हिसाब से लेकिन
01:38जब उसमें भी आती हो
01:40जाती है बहुत ज़्यादा
01:42सुड़ो दवाब बनने
01:44लग जाता है जैसा कि
01:45अभी इस केस में इलेक्शन कमिशन
01:48के केस में हो रहा है
01:49तो अपनी जान बचाने के लिए
01:51आफसर जो है
01:53वो एक कोशिश करते हैं कि
01:55ऐसा ना हो कि कल हम फज जाएं
01:57जादा तो वो कुछ लिखाना
01:59शुरू कर देते हैं
02:01अधरवाई तो इस्तिती काफी खराब है
02:03हमारे देश के
02:04अब ये
02:06सरकार के साथ
02:07जो इंस्टिउशन से वो तो ही है
02:09उसके अलावा कोट्स है
02:11यह है यहिन सब में भी
02:14ऐसी काफी
02:15खराब सी इस्तिती देश में पहदा हो गई
02:17कि आज आप ये विश्वास
02:19नहीं कर सकते हैं कि
02:21आपके देश के जो इंस्टिउशन से हैं
02:23जनता के लिए काम करते हैं, लोगों के लिए काम करते हैं, समयधान के लिए काम करते हैं, या केवल
02:29राजनीतिक निताओं के लिए काम करते हैं.
02:32आपका 34 साल से ज्यादा का करियर रहा आपने सरकार के साथ इतनी क्लोजली काम किया हमें तोड़े अंदर की
02:40चीज़े बताइए जब इस तरह के
02:41लिए जाते हैं कि नोट बंदी हो गए एक रात के अंदर और फिर वह किसी को देखने के लिए
02:49भी नहीं मिलेगा बहुत कुछ होता है तो ऑल इस ड्रमेटिक डिसिज़ेंस क्या जो ब्यूरोक्रेट्स हैं वह इसी हिसाब से
02:58काम करते काम चलता कैसे है दोहजर सोला इस जस्ट �
03:02बट हम यह समझना चाहते हैं कि यह जो ब्यूरोक्रेट्स है वो चलती कैसे है मनमोहन जी के सरकार में
03:08कैसे चली अभी कैसे चली क्या बदलाव आया और इस तरह के डिसिज़ेंस ले कैसे लिए जाते हैं जिससे हमें
03:15इतना लुकसान हो या फाइदा हो तो देखिए यह एक ब
03:31आपका नाम है We Also Make Policy तो जो मैंने 36 साल की सेवा सरकार में की ही उसमें जितने
03:38भी पॉब्लिक इंट्रेस्ट के या पॉलिसी मैटर्स मैंने डील की है उसमें कैसे डिसीशन हुए किस तरह से पॉब्लिक इंट्रेस्ट
03:47को वाच किया गया नहीं किया गया वो मैंने सब लिख लि
04:01विशे के बारे में जानने के लिए जिसका सवाल आपने किया तो आप ये दो किताब पढ़ी है और इस
04:08किताबों के बाद अगर फिर आप कोई उसमें निकले वे सवाल पूछेंगे तो मैं आपको जरूर समय दूँगा और उसमें
04:17आपको एक्स्प्लेइन करूँगा बड़
04:30इस किसम का महौल नहीं देखा जो अभी इस समय देश में चल रहा है जिस तरह से सिविल सर्विंट्स
04:39के साथ सेवाओं पर दबाब बनाया जा रहा है इमर्जिंसी के समय में सरकार में नहीं आया था ये 1975
04:46की बात है उस समय तो मैं पढ़ता था लेकिन उसके बाद से और 2019 तक
04:52जो 83 से 36 साल मैंने सेवा की इस किसम की चीज़ बहुत दवाब बनें आपको उस किताब में पढ़ने
04:59से मिलेगा कई ऐसे मौके आए जिसमें
05:02politicians के साथ, ministers के साथ जगडा हुआ और अंत में मैंने 2019 में तो सरकार से voluntary retirement लिया
05:10था क्योंकि सरकार के साथ काम करने की करना मुझे उचित नहीं लगा तो इस्तिती आज बन गई है
05:18क्या था कि आपने वियारेस का सोच लिया एंड इतनी अच्छी नोकरी आपने छोड़ दी वह मौमेंट क्या था 2019
05:26का कोई भी मौमेंट पर decision नहीं होता और होना चाहिए लेकिं ट्रिग्रिंग पॉइंट अगर आप बता सकें तो कई
05:36सारी चीजह होती है मैंने वह पूरी वा
05:48साथ काम करता हूँ वो मुझे पसंद नहीं करती है वो मेरा तबादला चाहती है कई सारे ऐसे issues बनने
05:56लगे budget को लेके RBI के surplus को के मामले को committee को लेके और फिर एक स्थिती में कि
06:06सरकारी जो note sheet है उसको उनका बदलवाना चाहता है और ऐसा लिखना चाहता है जो की उचित नहीं
06:15हैं और जो जो हुमारे honest views express किये गए थे उनको खतम कर दे तो यह सब जो मौके
06:22ऐसे बने तो फिर मैंने तै किया कि इस सरकार के साथ काम करने में कोई फाइदा नहीं है और
06:30अपनी रवान की होगी
06:33लेकिन it must be tough because you're working for the country और suddenly such situations happen अब चलिए आपने बहुत
06:40ज़्यादा काम नहीं किया नहीं तो मेरा दिमाग clear है
06:46कि अगर सेवा में रहते हैं और public service कर सकते हैं और ऐसे पॉलसी निर्ड़े लेने में मदद कर
06:55सकते हैं जो देश के हित में हैं तो सेवा में रहना चाहिए
06:58सेवा में मैं अपनी रोजी रोजगारी के लिए नहीं काम करता था ना मुझे कोई ऐसा इंटरेस्ट था कि मुझे
07:05कोई power exercise करनी है या कोई ऐसा बड़ा आदमी बनके दिखना है वो सब चीज़े मुझे नहीं चाहिए थी
07:11तो इसलिए जब मुझे लगा कि यह अब काम नहीं
07:25परसमली लोग बोलें एंटिनेशनल मोदी जी के खिलाब बस एक नहीं रण नी थी और जैसे अगर आपका इंटर्व्यू सुनेंगे
07:33तो बोलें कि अच्छा इनको तो निर्मुला सितारवन जी पसंद नहीं करती थी तो अब यह खुनस निकाल रहे क्योंकि
07:38इनको नौकरी �
07:39चोड़नी पड़ी है जो भी हो अगर मुझे बहुत अच्छे पत उससे में देने के लिए तयार थी सरकार यह
07:57मानती थी कि मैं काफी काबिल
08:00विट सचे इवरहाम हूँ वो मुझे छोड़ना भी नहीं चाते थे वो इशू अलग है वो लोग जो जिसकी जैसे
08:08जितनी समझ होती है उसके इसाफ से बात करते हैं आपका जो यह सब्जेक जो अभी आपने कहा कि मुझे
08:14इंटिनेशनल कहा गया नहीं कहा गया देगे हमारी
08:18विवस्ता में जैसे बहुत सारे लोग हैं वो अपनी अपनी समझ के हिसाफ से और अपने अपने दिमाग के हिसाफ
08:26से बाते करते हैं मैं ऐसे लोगों को एक टर्म इस्तिमाल करता हूँ उनको मैं डॉमपीज कहता हूँ वो डॉमपीज
08:35में डॉक्स जो बार करते हैं मंकी जो
08:38काट खाते हैं और पिक्स जो
08:41आपके साथ कुष्टी करना चाहते हैं
08:43गंदगी में तो ऐसे
08:45लोग जो कुछ भी कमेंट का इस्तेमान
08:47करें उनसे मुझे कोई फरक नहीं पड़ता
08:48तो कौन
08:50anti-national कह रहा है उस पे
08:52जादा important है या
08:54कौन
08:56और कौन नहीं कह रहा
08:58उस पे important तो मुझे इन चीज़ों से
09:00कोई परशानी नहीं नहीं है
09:01आप खूब कही है आराम से गई है
09:04square root लगा लिजे
09:05जो भी मर्जी हो आप इतनी मुना
09:07करके कह लिजे इसे मेरी हिसेयत
09:10पे कोई फरक नहीं परता
09:12सब्सक्राइब थोड़ा समझाइए हम
09:14fourth largest economy से
09:16sixth largest economy हो गया है
09:18एक सपना देखा जारते कि
09:20भी तर्ड largest economy
09:21बट फिर भी भारत का जो
09:23total GDP it is much lower
09:26बतलब 10 times lower than the first one
09:27तो possibility क्या है
09:30और साथ में थोड़ा से और जोड़े देता हूं
09:322047 विक्सित भारत का सपना
09:35उसके बारे में थोड़ा समझाइए
09:37कि ये सपना हकीकत बनेगा
09:39कि it is just a dream
09:41for 20-20 साल और
09:42चल जाएका
09:43कभी भी आप
09:46भविश्य के बारे में सपने देखे
09:49तो सपने
09:51और विजन में फरक होता है
09:53ड्रीम और विजन में फरक होता है
09:55ड्रीम को आप
09:59विजन में भी बदल सकते हैं
10:01और या आप उसको ड्रीम को
10:03शेख चिल्ली के ख्वाब में भी बदल सकते हैं
10:06तो दोनों में बहुत
10:07परिवर्तन हैं
10:09अगर आप के पास
10:11मादा है, समझ है
10:12ताकत है, तो आप
10:15विजन बनाके उसको
10:17हासिल करने का प्रयास करिए
10:28हम छटी से
10:29छटी पर आ गए हैं आज के दिए
10:32कभी भी हम चौथे पर
10:33तो पहुँचे ही नहीं, ये तो
10:35false claim किया
10:37गया था नीती आयोग के द्वारा
10:39दो एक साल पहले, उस समय हम
10:42नीती आयोग जैसी
10:43संस्ता उस समय मिस्रीड करती थी
10:45जो एक साल आगे
10:47पर anticipated
10:49IMF ने आखड़ा दिया था
10:50जो उस समय की अखिकत नहीं था
10:53उसको लेके वो ये
10:55कहने लगे थे कि हम जपैन से आगे निकल गए
10:57वो साल जब जपैन
10:59से हम आगे निकले नहीं
11:00और अब तो इस्तिती ये हो गई कि हम
11:02पाँच्वे से चटे पे आगे जैसा
11:04आपने भी खुद भी कहा
11:06पाँच्वा चटा चौथा तीसरा
11:10ये बहुत
11:11बहुत ज़्यादा मायने नहीं रखते
11:12जिसे आपने खुद कहा
11:14कि जो एक नंबर है वो
11:1630 ट्रिलियन पे है 32 ट्रिलियन पे है
11:19दो नंबर जो है चाइना वो करीब 20 ट्रियन पर है और हम पिछड़ रहे हैं तीसरे में करीब 4
11:25ट्रियन से नीचे होके जबकि हमारी जनसंख्या और चीन की जनसंख्या बराबर है अमेरिका की जो एकॉनमी जो पर कैपिटा
11:35इंकम है वो आमसे करीब करीब 15-17 गुना जादा है
11:40तो ऐसे में कंपैरिजन करके और अगर हम तीन नंबर में पहुंच भी जाए क्योंकि बाकी जो दूसरे देश हैं
11:47अभी आगे जैपैन, इंगलेंड और जर्मनी वो बड़े छोटे देश हैं उनकी पॉपुलेशन बहुत कम हैं तो हमारे से एक
11:55बड़ा दस भी पॉपुले�
12:09हैं कि हम उनसे आगे निकल के टोटल जीडीपी में तो हमें इस बात कोई भी ऐसा सपना भी नहीं
12:16देखना चाहिए, यह तो मुगालता है, सपना नहीं है, पर कैपिटा इंकम में हम 142 में नंबर से 145 में
12:25नंबर पे आतें दुनिया में, बहुत पिछड़े में बहुत पिछ
12:31लोगों की जो अच्छी जिने की इच्छा है, वो नेशनल जीडीपी से पूरी नहीं होती, वो पूरी होती है, पर
12:43कैपिटा जीडीपी से, एक बात, बीच में रोका सर, लेकिन आपने जब पर कैपिटा की बात की, फिर मुझे डिस्पैरिटी
12:52की यादा है, भारत में डिस्
13:01पाकिस्तान की तरह बन जाएगा, कि there are only riches or the poor, तो अभी थोड़ा सा समझाईए, जो हमारा
13:08मध्यमवर्ग है, उसका क्या हाल है, जो गरीब है, उनका क्या हाल है, तो अगले पाट साल में आप भारत
13:15को कैसे देखते हैं, भारत के लोगों को कैसे देखते हैं, डिस्पैरिटी
13:31हैं, जिसमें बहुत जादा लोग रिच्छे है, थोड़े से लोग ज्यादा रिच्छे, बहुत सारे लोगे ज्यादा गरीब हैं, जिनके पास
13:40एक दिन में खाने का अनाज का भी टोटा पड़ा जाता है, तो यह वाली इस्थिती जो है, वो बहुत
13:48खराब इस्थिती को ब�
14:01है actually हम पाकिस्तान की दिशा में जा रहे हैं दोनों तरह से
14:05economically भी जहां distribution of income उस तरह का है और दूसरा
14:10religious views में भी जितना पाकिस्तान 20 साल 30 साल पहले कट्टर
14:14पंथी बनके बर्बादी की रास्ते पे निकला हम उसी तरह से
14:18कट्टर पंथी बनके बर्बादी के रास्ते पे जा रहे हैं दूसरा देश उसका जो
14:24दूसरा पाकिस्तान का हिस्सा बंगलादेश वो दूसरी तरह बूब कर रहा बंगलादेश हमसे
14:29बहुत पीछे हुआ करता था per capita income में और income distribution में आज हमसे
14:46उस पे रेली काम करना चाहिए पाकिस्तान की दिशा में हमें नहीं जाना
14:52जाये थोड़ाजा अब दर्शकों को यह समझाइए कि हमले करना चाहते हैं लेकिन हमारी ओकत क्या है
15:06है अभी इस दुनिया के सामने और हम दर्शकों को यह कैसे समझना चाहिए देखिए आजकल कोई भी डेटा आता
15:12है उस पर विवाद हो जाता है
15:14मिसिंफॉर्मेशन शुरू हो जाता है और जो मेन मुद्ध है वो तो सब भूली जाते यह तो हमने देख लिया
15:20दर्शकों को थोड़ा सा समझाए रियालिटी ओफ इंडिया इंडिया इंट्रम्स अव डेटा आप से हम मैं डेटा नहीं बता पाऊंगा
15:28आप डेटा जरूर अ�
15:42चुका है और टीवी से भी उच चुका है तो कहां उनको असली इंफॉर्मेशन खोजनी चाहिए अगर सच में उनको
15:48भारत की स्थिती जाननी है दो सवाल है सुर इसमें एक जो चीज बहुत ज़ादा जरूरी है वो देश की
15:55नागरिकों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वो
15:59अपने दिमाग में questioning attitude अपना है, curiosity के बाद में question आता है, पहले कोई भी data दिया जाए
16:11या कोई भी claim किया जाए उसको face value पे नहीं लेना चाहिए
16:18हमें कोई भी नागरिकों नीचे से छोड़े से छोटी income हला हो या छोड़े से छोड़े पद पे हो या
16:25student है कोई भी हो, उसको यह समझना चाहिए कि यह real है या इसमें कोई जोल है, कोई इसमें
16:33बनावटी बात है, तो अगर इस attitude से आप शुरुवात करते हैं, तो फिर आप �
16:40कि जो data आपके सामने दिया गया है, उसी data में असलियत निकलाती है, कोई ऐसे data sets नहीं है
16:49देश में, कि यह तो सही data set है और यह गलर data set है, कुछ चीजों को छोड़के, जातर
16:57चीजों में जो data दिया जाता है, अब जैसे मैं आपको उधार नबताओ, GDP के बारे में तो काफी च
17:06data आया, कि हमारी 14% increase हो गई अगस्त के महने में, और फिर यह हमारी net GST increase
17:18जो है, करी 9% हो गई, मैंने उस पे लिखा और बताया, कि आप बैमानी कर रहे हैं, बट
17:25बैमानी क्या कर रहे हैं, कि पिछले साल हमारा जो GST says की आमद नहीं आती थी, आपने पिछले साल
17:31की base से उसको ह
17:36हो गई, वो revenue थी, उस revenue को हडा ने सकते हैं, लेकिन इसको देखने के लिए बहुत जादा नहीं
17:42चाहिए, थोड़ी सी inquisitiveness चाहिए, कि पिछले साल की जो GST बताये गई थी, वो सही बताये गई है या
17:50नहीं बताये, वो भी data वहीं पे आपके उपलब थे, पिछले साल जो press release
17:53आपने जारी की थी, वो भी उपलब थे और इस साल की press release भी जा रही है, तो अगर
17:58कोई भी छोटा, छोड़े से छोटी सवाल उठा के उसको चेक करें तो उसको पता लग जाएगा, मैं आपको और
18:04पिजा सो धारन दे सकता हूं, लेकिन समय की कमी के कारण से, मैं ये इस बात
18:10पर नहीं जाना चाहता अभी, कि कौन सा data reliable, कोई भी data reliable नहीं, एक बात तो सरकार में,
18:18कि आप वो छुपाएंगे तो भी उसकी हकीकत आप जान पाएंगे, आप जानने में इंट्रेस्ट होना चाहिए, तो आप पहुंच
18:28पाएंगे सही जगा, लेकिन भारत का इंट्रेस्ट
18:31थोड़ा खतम हो गया, reality और सच्चा ही जानने में, उनका जो focus कुछ और ही है, एक चीज में
18:37आपको कभी skeptic नहीं बनना चाहिए, या उमीद नहीं छोड़ने चाहिए, कि यहाँ दो सभी गढ़बढ है, इसलिए कुछ नहीं
18:49है, यह attitude बहुत गलत है, विजय सर्दान साब का �
18:54एक interview ले रहा था, दो घंटे का हमने podcast किया, at the end मैंने पूछा, वोट किसको दीजेगा, तो
19:01उन्होंने बोला मैं मोधी ली को दूँगा, and he said so many, you know, things about how the system is
19:09so corrupt, and it's a failure, despite that he said कि मैं वोट तो मोधी ली को दूँगा,
19:15यह इस मैं इस सवाल पर नहीं जाना चाहता, कि लोग निरणे करें कि किसको वोट देंए उनका वहतिकद निरणी,
19:25और उनको हर एक आदमी को entitled है, कि हो किसको वोट देना चाहता और किसको नहीं वोट देना चाहता,
19:32यह मेरी नजर में जो contestants हैं, उनकी भी कमी हैं, कि जो contestants हैं
19:38वो अपना पक्ष लोगों के सामने ठीक से नहीं रख पाते हैं या वड़ेवर इस इशू पे मुझे नहीं जाना
19:44चाहिए मैं केवल इसमें इंट्रेस्ट इतना इस चीज में इंट्रेस्ट हो सकता हूं कि किसी पर्टिकलर मैटर पे सरकार का
19:53रुख सही है नहीं है उसकी हम रि
20:09प्रेश्ट अलग रहती है अपने लिए अप्रोच अलग अलग रहती है वह उसी शुपे जाने से कोई फैदा नहीं है
20:18चलिए बस मैं आखरी सवाल मुझे पता है हमें 20 मियट मिले दे और मैं उसको स्ट्रेच नहीं करूंगा आखरी
20:23सवाल है अगले पाट साल में भारत को क्
20:29सरकार की बात नहीं करते हैं ब्यूरोक्रासी तो चलाती है चलिए प्रेश्यर्स कुछ भी हो सकते हैं बट आपने जैसे
20:36बोला कि शुड़ नॉट पी स्केप्टिकल तो अगले पाट साल आप कैसे देखते हैं भारत के
20:43मुश्किलात से नजर आ रही है इस इस्तिती में तो क्योंकि जो सरकार का रुख अभी शुरू में हमने डिस्कस
20:50किया
20:50institutions को capture कर लेना compromise कर देना उनको जब आपके institutions आपको सही बात बताने के लिए और सही
20:59देशा मेले जाने के लिए काम नहीं करते हैं चुपाने के लिए काम करते हैं तो आपके परिशानी इसी तरह
21:05से हमारी देश की technological development हमारा उसमें हम काफी बिच्चड रहे हैं देश में जिस त
21:18तरह से हमने यूज किया अपनी agencies को इन सब चीजों एक ऐसा महाल बना हुआ है देश में जिसमें
21:25सब लोग cross purposes पे काम कर रहे हैं बजाए देश को एक साथ आगे ले जाने के लिए तो
21:33थोड़ी सी मुश्किलात नजर आ रही हैं आगे 4-5 साल तक के लिए मैं एक किताब लिख
21:47दी डॉलर 10 trillion dream कि हम अपनी हमारी है कि हम 10 trillion dollar की economy को बनाएं दोजार
21:56चोबिच में पांस साल बाद जब मैंने उसको पहला review किया तो उसका title मैंने बदल दिया तो उसका title
22:01किया अब दोजार उना पड़ा है कि क्या उसका title होगा
22:18मुश्किलात की स्थिती की तरफ जाता नजर आ रहा है
22:21तो अभी कोई टाइटल फाइनल नहीं किया है
22:24लेकिन ऐसा नहीं लग रहा कि बोड़ा हैपी किसम का टाइटल
22:28चलिए I hope कि हम जब का फ्यूचर सेफ हो
22:31and we have a happy life
22:33और भारत में जो लोग हैं
22:35उनका per capita income भी थोड़ा इंप्रूवो
22:37that they can live with dignity
22:40शुक्रिया जर अपने वक्त दिया
22:41और हमें समझाने कोशिश की बहुत ही
22:43short conversation था I'm sure की
22:45दर्शक और जादा सुनना चाहेंगे
22:46तो मैं आपसे request करूँगा कि जब भी
22:48हमारा जो guest relation के लोग है
22:51शुक्रिया जब आपसे contact करें
22:53तो हमें और वक्त दे और हमारे
22:55काफी सारे live shows भी होते हैं
22:57उसमें भी आप participate करें
22:58with other people there are very
23:00very great people who are coming in
23:02who are supporting governments as well
23:05but you'll enjoy the conversation
23:07very sure certainly
23:09किसी समय और
23:11अच्छी लंब
23:12मैं बहुत सारे podcast करता हूँ
23:14कोई 2 गंटे के कोई 9 गंटे के
23:16आपके साथ भी
23:17खुशी होगी उस तरह का भी podcast करने के लिए
23:20thank you very much
23:21thank you so much for your time sir
23:22I'll see you soon
23:23see you, see you, bye

Recommended