00:00आपदाम, अपहरतारं, दातारं, शर्बशंपदाम, लोकाभिरामं, स्रीरामं, भूयो भूयो नमाम्यहं, प्यारे मित्रो जैश्याराम, जैमातादी मित्रो आज आप से चर्चा करते हैं,
00:10स्राद्य कर्म के मुख्य आवस्यक नियम क्या हैं, इसी विसे पे करेंगे चर्चा,
00:16स्राद्ध कर्म कब करना चाहिए स्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय में करना चाहिए प्रातह काल या संध्या के समय
00:26स्राद्ध कार्द को भूल कर भी नहीं करना चाहिए
00:29स्राद्ध का भोजन तैयार करने के सबसे पहले पंच बली पांच बलियां दी जाती है किसको गाये को कव्ये को
00:40कुट्टे को देवताओं को और चीटी को ये पंच बली बिधान है कव्या को पितरों का संदे सुबाहक बताया गया
00:51है इससे उन्हें ग्रास देना अनिवाद है
00:59पयोग अनिवादय रूप से करना चाहिए काले तिल से तरपन करने से पित्रदेयोता प्रशन होते हैं
01:07स्राद्ध के दिन किसी सात्त्विक वॉराम्वन को बुला करके स्रद्धा पूरवक पिंड़दान तरपन इत्यादि के कार्द्ध को शंपन कराना चाहिए
01:19और उनको भोजन कराना चाहिए यथा योग जैसी आपकी सामर्त है वस्त्र पात्र दक्षणा फल मिश्ठान नित्यादी दे करके उनको
01:30बिदा करना चाहिए
01:31स्राद कैसे करें तो पित्र पक्ष के दवरान पूर्वजों की आत्मा की सांती के लिए स्राद करना अत्यन्त आवस्यक है
01:42बिद बिधान से स्राद कर्म करना अत्यन्त महत्त पूर्ण बताया गया है
01:48दोपाहर में दोपाहर का मतलब होता है कुपूत वेला में मद्यान के समय गंगा जल काला तिल कुशा इत्याज से
01:59सात्तिक व्राम्मनों के द्वारा तरपन के काद्र को करना चाहिए
02:05बंश बली जो पंश बली विधान बताया गया है कववा कुटा गाए चीटी और इसके साथ में देवताओं को भोजन
02:16लगा करके ही अन्यकार्य को शंपन करना चाहिए
02:20अतित्यों का सम्मान करना चाहिए और ऐसा करने से पित्र देवता प्रशन होते हैं
02:26अगर आप चाहते हैं किसी भी तरह की पित्र पूजन से सम्मंधित जानकारी या पित्र तरपन करना चाहते हैं तो
02:35शंपर्ग करिएगा
02:36मैं पुना आप से मिलूँगा तब तक के लिए आप तबी को जैजै स्रिशीता राम