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  • 1 minute ago
सवाईमाधोपुर. बदलता पर्यावरण अब केवल प्रकृति के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। जिले में बढ़ते शहरीकरण, सड़कों पर उड़ती धूल, वाहनों के धुएं और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खासकर सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए प्रदूषित वातावरण परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति भी सजग रहने की जरूरत है।

जिले में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक निर्माण कार्यों, सड़क किनारे उड़ने वाली धूल और वाहनों की आवाजाही के कारण वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसका सीधा असर श्वसन तंत्र पर पड़ सकता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से खांसी, सांस लेने में परेशानी, एलर्जी और दमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे मरीजों को प्रदूषण के कारण अधिक परेशानी हो सकती है।
सांस के मरीजों की बढ़ी परेशानी
जिले में दमा, अस्थमा, एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी है। बारिश के बाद यह समस्या ज्यादा बढ़ रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से 400 मरीज इन समस्याओं को लेकर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। धुआं, प्रदूषण और मौसम में बदलाव से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
धूल और धुआं बढ़ा सकते हैं सांस की परेशानी
सवाईमाधोपुर में सड़क निर्माण, भवन निर्माण और यातायात वाले क्षेत्रों में धूल का स्तर अधिक रहने पर लोगों को परेशानी होती है। दुपहिया वाहन चालकों और सड़क किनारे काम करने वाले लोगों का लंबे समय तक धूल और धुएं के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे वातावरण में मास्क का उपयोग, घर के आसपास स्वच्छता और धूल को नियंत्रित करने के उपाय जरूरी हैं।
पेड़-पौधे बढ़ाने से मिलेगा फायदा
पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए जिले में अधिक से अधिक पौधरोपण के साथ मौजूदा पेड़ों का संरक्षण भी जरूरी है। शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ने से धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा खुले में कचरा जलाने से बचना, वाहनों का अनावश्यक उपयोग कम करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण का भी रखें ध्यान
विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य भी पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। जिले में पर्यावरण संरक्षण को केवल पौधरोपण तक सीमित रखने के बजाय हवा, पानी और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। स्वच्छ पर्यावरण से बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
एक्सपर्ट व्यू...
धूल-धुएं से बचाव जरूरी...
प्रदूषित वातावरण का असर सीधे तौर पर श्वसन तंत्र पर पड़ सकता है। धूल, धुआं और अन्य प्रदूषक तत्व सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचते हैं, जिससे दमा और अन्य सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे मरीजों को धूल-धुएं वाले स्थानों से बचने, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार जारी रखने और जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण के लिए सामूहिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। सांस संबंधी समस्या वाले मरीजों को धूल-धुएं से बचने के साथ उपचार लेना चाहिए।

डॉ. अमित गोयल, दमा एवं टीबी रोग विशेषज्ञ, सवाईमाधोपुर


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