00:00IIT जैसे premium संस्थानों में बढ़ती आत्मत्या के cases को लेकर एक बड़ा सवाल है कि आखिरकार students के मानसिक
00:06तनाव से गुजर रहे हैं और इसको लेकर IIT as an institution क्या steps ले रही हैं।
00:12इस पर बात करने के लिए हमारे साथ मौझूद है IIT कानपूर के Center of Mental Health and Wellbeing के
00:18clinical head आलोग बाच पही।
00:20सर सबसे पहले एक बड़ा सवाल है जिस तरीके से हम cases देख रहे हैं लगतार society की cases भी
00:26आ रहे हैं चाहे IIT हो चाहे बाकी institutions हों।
00:29IIT कानपूर ने एक जो Center को Establish किया है जिसमें आप regularly students से interact भी करते हैं।
00:35सबसे पहले इन steps को इस societies को या फिर इस मानसिक तनाव से deal करने के लिए IIT ने
00:42क्या steps लिए हैं और इस जो Center जिसको Establish किया गया है इसकी working क्या है।
00:48देखिए IIT कानपूर at least यहां के बारे में मैं जानता हूँ और और भी जगे।
00:54यहां पर काउंसलिंग सर्विस आइटी कानपूर की इस देश में सबसे पुरानी काउंसलिंग सर्विस है जो करीब 35 साल से
00:59चल रही है।
01:01और मैं भी उससे 27 साल से जोड़ा हूँ तो ओवर टाइम हम लोगों के पास स्टाफ कम था, एक
01:07साइकाटरिस जाता था हफते में एक बार और जिन इस्टुएंट्स को प्रॉब्लम होती थी वो आ जाते थे बट ओवर
01:13टाइम वी हैव चेंज दा प्रोसेस और अभी दस महिन
01:17करने पहले हम लोगों ने काउंसलिंग सर्विस का प्रारूप बदलके उसको सिंटर फोर मेंटल है ने वेलींग कर दिया है,
01:23तो दो काम हुए हैं, पहले काउंसलिंग सर्विस सारे इंस्टिूशन्स में दीरे-दीरे कंट्री में
01:30established हुई हैं over last 10 years or so.
01:33पर सब बड़ी नहीं है,
01:34सब के पास proper personnel नहीं है,
01:37कुछ लोगों ने outsource
01:38कर रखा है अलग-अलग institutes में,
01:40government के भी instructions हैं.
01:42हम लोगों ने एक experiment किया है,
01:45कि हम लोगों ने
01:45थोड़ा model change किया है,
01:48कि बजाए लोग हम तक आए,
01:50Center for Mental Health
01:51and well-being में हमारे पास
01:5410 clinical psychologist हैं.
01:56मैं as a psychiatrist
01:57हफते में तीन बार जाता हूँ.
02:00दो और psychiatrist आते हैं.
02:02एक 600 students के हमारे पास
02:04team है, undergraduate or postgraduate
02:06की, जो हमारे साथ ही काम करते हैं.
02:08हमने model ये change कि
02:10ये बैठ के इंतजार करने
02:12के बजाए,
02:13कि किसी को problem हो,
02:16और वो हम तक आए
02:17और तब हम मदद करें, हम लोगों ने
02:19community outreach बढ़ाई है अपनी.
02:21आप ये समझ सकते हैं कि
02:24building तो है,
02:25तो उसकी boundaries खुली हुई है.
02:28तो हम लोगों ने कई program
02:29शुरू किये यहां पर,
02:31जैसे
02:33hostel visits, हमारे
02:35psychologists regularly हफते में दो बार
02:37hostels में जाते हैं, किसी भी
02:39बच्चे को दिक्कत हो बात कर सकता है.
02:41हम लोगों ने faculty
02:42sensitization program शुरू किये.
02:45मैं और मारी team
02:46हर department में जाके,
02:48वहां की faculty को mental health और
02:50mental illnesses इन सब के बारे में
02:53aware कराने के लिए,
02:54और ये बताने के लिए कि अगर कुछ problem हो,
02:57तो आप हमें inform करिये,
02:59हम बच्चों से
03:00संपर्क करके उनकी मदद करेंगे.
03:03एक open dialogue शुरू किया गया है,
03:06जो आज भी एक है
03:07IT में, जिसमें open forum होता,
03:09अलग-अलग विश्यों पे, exam, stress पे,
03:12PG life के बारे में,
03:13लोग आएं और किसी
03:15expert से openly बात करें.
03:17कुछ courses शुरू किये गए हैं
03:20mental health पे.
03:23प्लस ये activities तो
03:25mental health से related हैं,
03:27कुछ activities well-being के लिए
03:28शुरू की गई हैं.
03:30पर्पस सारा ये है कि एक campus ऐसा हो,
03:35देखिए happiness तो बड़ा
03:36एक ब्रह्म वाला शब्द है
03:38कि आप happiness चेस कर रहा हैं,
03:41वो happiness पे इतना
03:42ध्यान ना रखके, हमारा ध्यान ये है
03:45कि एक open campus हो, जिसमें trust हो,
03:49mental health issues जो हैं,
03:50वो एक stigma ना हो,
03:53कि अक्सर लोग इसलिए नहीं आते हैं,
03:55कि mental health problem है, क्यों हो जाएं,
03:57और open हो लोग एक दूसरे का
03:59हाथ बढ़ा कर support कर सके,
04:01किसी को problem हो तो आप
04:03उसकी मदद कर सके,
04:05ताकि long term में
04:07हर आदमी जिसको दिक्कत हो,
04:08at least अगर उसको लग रहा है,
04:10कि उसको मदद की जरुवत है,
04:12तो उसके पास एक support system
04:14और एक window होनी चाहिए.
04:16यह तो होगी window की बात,
04:17और आपने जो steps ली हैं,
04:18और आप लोग के दौरा जो यह procedures
04:20follow करे जाते हैं,
04:21आप क्योंकि directly students से
04:37सबसे जादा main problem कहा है,
04:38जिसकी वज़े से वो depressed हो रहे हैं,
04:39या फिर उनको issue आ रहे हैं.
04:41देखिए,
04:43यह जो आप प्रश्न पूछ रहे हैं,
04:45इसको मैं थोड़ा
04:48broader perspective में देखना पड़ेगा.
04:51ऐसा कुछ नहीं हो रहा,
04:52जो पहले नहीं होता था.
04:55लेकिन overall society में जो changes आएं हैं,
04:59over last 20 years, 30 years,
05:01technology से,
05:03economy से,
05:05जो ambition है,
05:06जो race बढ़ गई है,
05:08rat race बढ़ गई है.
05:09प्रशर बढ़ गई है.
05:10अब rat race बढ़ गई है,
05:11तो pressure बढ़ गई है,
05:11फिर आप जीतने के लिए दोड़ोगे,
05:13तो जीतने के pressure तो रहे गई हैं.
05:14तो IITs में या जो institutions में हो रहा है,
05:18वो all over the world हो रहा है.
05:21हमारे हाँ भी जो हो रहा है,
05:22वो कोई अलग से,
05:23कोई एक isolated box में चीज़ नहीं हो रही है.
05:27It is just an extension of what is happening in the society.
05:33आप कोचिंग जहां पे होती हैं शहरों में,
05:35वहाँ चले हैं या वहाँ भी आपको यह race दिखेगी.
05:38Schools के level पे,
05:40जो सबसे बड़ी गड़बड हुई है,
05:41मैं तो एक क्लाइन में आपको cause बताता हूँ,
05:44कि life की pace slow थी,
05:46थोड़ी बरदास्ट ज़्यादा थी,
05:48और हम एक generation तक,
05:50पिछली generation तक,
05:52fail होना,
05:53कोई पाप नहीं समझा जाए जाए पापा,
05:55कि आपको कुछ नहीं मिला संगर्ष है,
05:57जीवन संगर्ष लाएगा,
05:59उसमें आपको भी fail होंगे,
06:00कभी pass होंगे,
06:02और ऐसे करते करते,
06:03आपको कुछ कर लेते हैं,
06:05ये major shift हो गया thought process में,
06:08हम शायद अपने बच्चों को जी सिखाना भूल गए हैं,
06:11इस race में की कुछ पाना है,
06:13कि life है,
06:15life तो कभी ना करेगी आपको,
06:17वो ना बरदाश करने की शमता कम होती जा रही है,
06:21anxiety students को होती है,
06:22या फिर failure का जो डर है,
06:24उसकी वज़े से आपको लगता है,
06:25सबसे ज़्यादा issues आपके पास आ रहे हैं,
06:27तो सिर्फ failure exam कहीं नहीं है,
06:29relationship में failure,
06:31अगर कुछ गलत हो जाए,
06:33तो गलती accepted होती थी,
06:34लेकिन बच्चे डरते हैं discuss करने में,
06:37उनको एक shame होती है,
06:39कि घर में कैसे बताएं,
06:40मवाब आपने इतना खर्चा किया,
06:41प्रिशर है,
06:43वो प्रिशर family से भी आ रहा है,
06:46और academics की quality maintain करेंगे,
06:48तो प्रिशर हो गई,
06:49लेकिन जाद तर बच्चे कर लेते हैं उससे,
06:52relationship,
06:54academic failures,
06:56घर से pressure,
06:58प्लस एक unnecessary भविश्च की आशंका,
07:01तो वो छोटी छोटी चीज़ी जो life का हिस्सा होती थी थी ना,
07:11system को जो उनको इसके लिए train नहीं कर रहा है,
07:15तो training तो हम लोगा जोर जो अब है,
07:18जो मैं faculty से भी बात करता हूँ,
07:20और भी forums पे कहता हूँ कि हमारी generation को,
07:23जो हम लोग थोड़ा teaching और इन सब में हैं,
07:26हमें अपने बच्चों को एक level के बाद,
07:29वो स्कूल से निकल के professional courses में आते हैं,
07:32हमें उनको फिर री-train करना चाहिए,
07:34अदाके academic के साथ कहने के mental quotient पे भी काम करना चाहिए,
07:37emotional quotient पे,
07:38emotional quotient कहले उसको यह जीने की कला भही simple,
07:42उस रूप में नहीं जिसमें वर्क्शॉप लोग करते हैं,
07:44बिजनेस चल रहा है,
07:45mental health देखिए, बहुत बड़ा बिजनेस भी बन गया है,
07:48कई तरह के लोग कई चाहरे किसी से सिखा रहे हैं,
07:51वो सब के नीचे bottom line में एक simple सी बात है,
07:54कि life है,
07:55आपको अपने best potential पे पहुँचना है,
07:58उसमें कभी असफलता होगी,
07:59कभी आप जो चाहते हों नहीं मिलेगा,
08:01हर चीज अंत नहीं है,
08:04कल सुबह आएगी,
08:06दिक्कर तब होती है,
08:07जब वो बच्चा जो pressure में होता है,
08:09और वो shame की वज़े से,
08:11help सीख नहीं करता,
08:13या घरवालों से बताता नहीं है,
08:15तो हमारे सब बच्चों से अर्ज इतनी सी है,
08:18और माबाप से भी,
08:19कि बच्चों को उनको flower करने दीजिए,
08:22और open-minded communication open रखिए,
08:25और जो बच्चे कहें,
08:26वो सुईकार करिये,
08:27उसमें कोई label लगाने की जरूवत नहीं है,
08:29तो ये जब हम जिस,
08:31जब ये society बन जाएगे,
08:32कि labels नहीं होंगे,
08:35तब जाके हमारे बच्चे,
08:37क्योंकि आप देखिए,
08:38help हम offer कर रहे हैं,
08:39पर कोई बच्चे अगर नहीं आया हमारे पास,
08:41तो कैसे या करेंगे?
08:42सर, अगर हम ऐसे इस इंस्टूशन बात करें,
08:44आई-टी कानपूर के आप फिकल्टी भी हैं,
08:47top three institutions में से आता है,
08:50society के cases में भी आई-टी कानपूर,
08:51mental pressure की बात होती है,
08:53ऐसे कई cases आया हैं सामने,
08:54जिसमें students ने अपने teachers पे भी आरोप लगाए हैं,
08:57कि कहीं न कहीं उनको बहुत जादा pressure दिया गया,
09:00भाए धंग से treat ने किया,
09:01कि तमाम उस तरीके की जाँच भी चल रही है,
09:03आपके पास जब आते हैं students,
09:04तो जाहिर सी बाते की इसका भी जिकर करते होंगे,
09:06जिस तरीकी से उनको pressure है,
09:08तो आप कितना जो है,
09:10इसमें दोशी मानते हैं institution को,
09:13या फिर ये मानते हैं कि हाँ,
09:15जो teachers है, faculty हैं,
09:16उनका भी कई ना कई रोल इसमें होना चाहिए,
09:18कि एक तरीके से वो students से कैसे deal हैं,
09:20देखिए मैं इतने सालों से secretary कर रहा हूँ,
09:22मैंने लोगों को दोशी मानना कर दिया बंद,
09:24क्योंकि मनुश्य की deeper processes
09:26or psychological underpinnings में कर आप जाएंगे ना,
09:29जैसे conditioning होती ही मनुश्य की,
09:30तो faculty भी इसी society से आ रही है,
09:33बहुत सारे लोग young हैं,
09:35बहुत अब उनकी अपने baggage हैं,
09:36हैं तो human beings ना,
09:38कोई perfect human being होता नहीं है,
09:41सब के हम सब गलती कर सकते हैं,
09:43हम सब अपनी बात express करने में कर सकते हैं,
09:46हम सब एक मनुश्य जो feel कर सकता है,
09:48उस सब मनुश्य feel कर सकता है,
09:50ठीक है,
09:51अब प्रश्न ये है,
09:53कि faculty कोई,
09:55लेकिन समवाद जहां गायब हो जाता है,
09:58माली जै कोई faculty गुस्सा हो गया किसी बच्चे,
10:00उसने कुछ कह दिया,
10:02वो बात हो गई,
10:03अब उसको permanent नहीं बनाना चाहिए,
10:06उस बात को वापस redeem करने के लिए समवाद होना चाहिए,
10:11तो faculty अगर गुस्सा भी हो रहा है,
10:13तो वापस बच्चे को बुला के कह सकता है,
10:15ठीक है कल गुस्से में तो स्टूडेंट्स को प्रॉब्लम नहीं होगी,
10:18प्रॉब्लम क्या होती है,
10:20और यह आप हर इस्तर पर देखते हैं,
10:22आप राजनीत से लेके नीचे तक,
10:23जब आप बात पकल के,
10:25उस बात को पर्मन बना लेते हैं दिमाग में,
10:29तो यह बात सही है कि बच्चे थोड़ा यंग हैं,
10:32भी सीख रहे हैं,
10:33तो उनका इंपल्सिविटी, उनका हॉर्मोनल लेवल अलग होता है,
10:35ब्रेन अलग तरीके से,
10:37एडल्स को थोड़ा सबर करना चाहिए,
10:39पर मैं यह नहीं कहे रहा हूँ कि उनको अननेचरल हो जाना चाहिए,
10:41वो भी मनुश्य है,
10:43समवाद कर लीजे, आपको कुछ लगा रहा है गलती हो रही है,
10:46आप बुला कर बात कर लीजे,
10:47फेकल्टी स्टूडेंट के बीच में समवाद हर इंस्टिउशन में बहुत जरूरी है,
10:52आपने इसका जिकर किया,
10:54क्योंकि आईटी मुंबई का केस जो है वो चल रहा है,
10:56आपने देखा होगा जो प्रोफेसर उनको चुटी पे भी बेशा गया ताकि
11:42मैनेज करें।
11:43उसमें हम उसका सपोर्ट सिस्टम दे देते हैं।
11:45तो ये सपोर्ट सिस्टम का मतलब ये नहीं कि वो मेंटली एल है।
11:49लेकि पहली बात ये बड़ी जरूरी है कि हर आदमी जो काउंसिलिंग के लिए
11:53साइकॉलोजिस के पास, साइकार्टिस के पास आ रहा है,
11:55वो मांसिलिंग रूप से बीमार नहीं है, ये भै लोगों को छोड़ देना चाहिए।
12:00लगता है कि इनफॉर्म करना चाहिए फेकल्टी को गर ऐसे इंसिडेंट हो तो तुरंद इनफॉर्म करें,
12:06ताकि हम उस बच्चे को एक बफर के रूप में दो दिन समाल सकें। फिर आपको जो करना है वो
12:12डिसकस करके किया जा सकें। ये तरीका प्रूफ करता है ठीक ठाक, हमेशा नहीं करेगा।
12:16तो एक मेकनिजम अगर ऐसा हो कि बच्चा पकड़ा गया नकल में और उसको उन्होंने निकाल दिया बार, तो इमीजियेट
12:24उस बच्चे के लिए कुछ सपोर्ट सिस्टम हो जाना चाहिए था। ये इंसिडिशन सो ख्याल रखना चाहिए, कि बच्चा हमारे,
12:30देखे बच्
12:45हम देख रहे हैं, जो आकड़ा है सुसाइट का, उस पे बहुत ज़्यादा एफेक्ट नहीं आया है, जेतना आना चाहिए
12:50था, एक रीजन आपने बताया कि अधर सुसाइटी हम चेंज कर रहे हैं, लेकिन इस इतने स्टेप्स लेने के बाद
12:56भी, वो क्या एक और वज़ा है
12:58जिसको आपको लगता है कि ये केसेज रुखने का नाम नहीं देती है, अगर आप पूरी सुसाइटी को लें, आईटी
13:08और इंस्ट्यूशन को अलग सिन्ना मानें, तो हर जगे, हर पॉपुलेशन में, दो चार पांच परसेंट लोग सुसाइड अटेम्ट करते
13:16हैं या हो ज
13:27चीज है, कि एक समय का फ्रेम है, जिसमें होपलेसनेस आ जाती है, इमीजेट होपलेसनेस, अभी रिलेशनशिप टूटी ब्रेक अप
13:36हुआ, इमीजेट होपलेसनेस, उस वक्त समालने का खेल है, तो मैं ये कह रहा हूँ कि सुसाइट, आईटी को छोड़ी
13:43है, आप पूरी स
13:57स्कूल से शुरू करिये, हमें देखे बात समझेए, एक पूरा-पूरा सिस्टम ऐसा हो गया है, कि हम लोग भय
14:10सही सही, सेल्फिश में नहीं कहूंगा, लेकिन सेल्फ सेंटर होते जा रहे हैं, हमें थोड़ा सा अपने से बाहर स्टेप
14:18करके, बगलवाला कोई भी हो, एक आ
14:31कि एक आदमी सलक पे बैठा था, वो मैं उससे नहीं जानता था, पर हम दोनों हताशा जानते थे, तो
14:41हमारे अंदर एंपथी नम की एक चीज होती है, कि आप अगर दुखी है तो वो दुख आप मुझसे कुछ
14:46ने कही है, मुझे अंदर फील हो जाएगा, लेकिन उसके लि�
14:57टीचर्स, फेकेल्टी, स्टूड्ट सब पे लागू होती है, जिस देश में गलबर हो रही हों जादा लागू होती है, बहुत
15:03बहुत अनम से बात करने के लिए, ये थे आईटी के कानपुर के फेकल्टी, जिन्होंने बताया कि क्या प्रॉब्लम्स आ
15:10रही हैं स्टूड्�
15:15में चेंजेस लाने की जौरत है, साती साथ समवाद इंसिटूट के अंदर हो या बाहर हो उसको बढ़ाने की जौरत
15:20है, फिलहाल कितने स्टेप्स लेने के बावजूद इस तरीके की केसे बढ़ रहे हैं, अब किस लेवल पे जाके जो
15:27संस्थान है, वो इस पूरी जो बढ�
15:31इतना हैं, इनको रोक पाती हैं, ये देखने वाली बात होगी, वीडियो जनले शुमम शुकला के साथ से, मरचावरा कानपूर
15:36आज तक,
15:36दर्मियों के चिट्टी होने वाली थी, मेरे पापा आने वाले थे, तो लोग सभी खुश थे, तो मैं एक बेड़
15:42पे चड़के, डांस कर रहा थे, दांस कर रहा था, लेकिन वो पहले ही आ थे, फ्रीज, उस समय तो
15:55कंटिन्यू नहीं कर सकता था, तो फ्रीज फ्रेम टाइ
16:06झाल
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