00:10सब प्रेमियों की निशानी है दो दो चार चार घंटे लगे हुए यह फोन पर फोन पर नहीं तो आमने
00:15सामने बैटके एक दूसरे भेजा चबा रहे हैं
00:19अब मजाल है कि उधर से कचरा फेका जा रहा हो इधर से तुम फोन काट दो बेवफा कहला होगे
00:25और कितना मजा आता है पता होता है कि हम यहांते बेवकूफी की बाते पेले जा रहे हैं पेले जा
00:30रहे हैं और सामने एक मजबूर इंसान उसको जेले जा रहा है जेले जा रहा ह
00:35फिर कोई आएगा चानक से को फिर कहेगा वो पत्थर दिल इंसाल तू नहीं समझेगा इस पेलने और जेलने का
00:42नाम ही तो इश्क है
00:42मैं पत्थर दिली सही मैं बहुत खुश किसमत हूँ अगर मुझे वास समझ में नहीं आती
00:48पईतना ही आपसे विंती कर सकता हूँ न पेलो न जेलो