00:00सुधा का एक बदन एक सुगंदित फूल की तरह खिला हुआ था
00:03और उस फूल की खुश्बू पूरे महले में ताजगी भरने का काम करती थी
00:08सुधा की नशीली आखें, होटों की लाली
00:11और कमसिन जिस्म की बनावट किसी को मुदहोश कर देने के लिए काफी थी
00:16जहां सुधा को देखने भर से लोगों की जिन्दगी में रंग भर जाता था
00:20वहीं सुधा की जिन्दगी बेरें थी
00:22क्योंकि उसका पती दूर देश में रहता था
00:25सुधा अपनी सास कमला के साथ रहती थी
00:27और कमला उसे किसी से बात नहीं करनी देती थी
00:30खासकर उसकी उम्रवालों के साथ
00:32कहामी तो बड़ी मज़दार है यार
00:35ऐसा करते हैं
00:36दूद दे आते हैं फिर पढ़ेंगे
00:49दूद
01:17सुधा को देखते ही रंजन की आखे वहीं अटक गई
01:21जिस सुधा की खुश्बू से रंजन अभी तक अंजान था
01:25उस खुश्बू ने आज पहली बार में ही रंजन को सुगन से भढ़ दिया था
01:34तुम
01:36वो जो पहले दूद देने आते थे ना चाचा जी
01:40वो गाउं गये हुए है तो आद से हमी दूद देने आएंगे
01:47अच्छा
01:51तो
02:02सुधा के बलावस से बाहर आता हुआ चुस्त वाला जिसम
02:07सुधा के गदराय जिसम की सुन्दंतर ने एक पल के लिए रंजन को सम्मोहित कर लिया था
02:13और रंजन उस सम्मोहन में फसा सुधा की तरफ एक टकने हार रहा था
02:19उसके हाथ सुधा के जिसम को चुनी के लिए छट पटा रहे थे
02:26क्या कर रहे हो अभी सारा दूद गिर जाता
02:30ना दूद गिरने देंगे और नहीं आपको
02:36पर हम तु गिर चुके आपकी गोद में
02:42इरादा तो कुछ और गिराने का है
02:45तो फिर अंदर चलो
02:48चलो
03:34आखों से सीधा अंदर गुसोगे क्या?
03:39सारा दूद गिरा दिया
03:42नहीं वो आपकी स्माहिल बड़ी खुबजूरत है
03:45बस वही देख रहे थे
03:57ये कौन है?
03:59ये वो सुरेश है ना?
04:01उसका भतीजा है
04:02वो गाव चला गिया है तो
04:04कुछ दिनों तक यही आएगा दूद्दे में
04:07मैं अंदर जाती हूँ
04:10ठीक है
04:11मैं भी चलता हूँ
04:12कल फिर आऊंगा
04:28माजी चाय
04:30तुमको बोला था ना?
04:32अपनी उमर के लड़कों से जड़ दूर रहा करो
04:35और उसको देख के हस क्यों रही थे तुम इतना?
04:38माजी मैं कौन सा बाहर गई थी किसी लड़के से बात करने?
04:41वो तो सुरेश का भतीजा आया था
04:43दूद देने के लिए तुम मैं बस दूद ले रही थी
04:47इतनी तयार होकर?
04:49पती तो घर पर है नहीं
04:50तुम इतनी तयार क्यों होती हो?
04:53खुद के लिए
04:54मुझे अच्छा लगता है ऐसे सच सवर कर रहना
04:58तुम्हें अच्छा लगता है
05:00सब पता है
05:02अपसे पतीला बहार रख दिया करो
05:04वो आएगा और दूर डाल कर चला जाएगा
05:06और जब वो चला जाएगा जाकर पतीला उठा कर ले आना
05:33सुधा का केला पनम उसे परिशान कर रहा था
05:36उसके पास सुन्दर जिस्म तो था
05:39लेकिन उस जिस्म का एहसास करने वाला साथ नहीं था
06:11हलो क्या आप मुझसे थुड़ी देर बात कर सकते हैं
06:18मुझे बहुत अकेला महसूस हो रहा है
06:22देखो सुधा मैं तुमारी फिलिंग को समझ सकता हूँ
06:24लेकिन मैं आभी बात नी कर सकता बहुत बीजियू में
06:28मैं तुम्हें बात में कॉल करता हूँ
06:29मैं आभी फोन रखता हूँ
06:42आपकी स्माइल बड़ी खुबसूरत है
06:44बस वही देख रहे थे
06:47रंजन को अपने खयालों में सोच कर सुधा का मन
06:50और गदराया जिस्म कुछ और ही चाह रहा था
07:05आपकी स्वाँ
07:07आपकी स्वाँ
07:08अपकी स्वाँ
07:39दूद में बहुत शक्ती होती है
07:47कैसे पता चलेगा
07:50कि तुम्हारे दूद में शक्ती है
07:53अभी पता चल जाएगा
07:54पियो
08:10तुम्हारे पीलो
08:12देखो तो ये दूद की शक्ती तुम पर कितना काम करती है
08:29हूँ
08:51पहु खाना बनी है क्या जी माजी
08:58सपने में आकर उसने तो मेरी तड़प और बड़ा थे
09:07कुछ तो करना होगा
09:25समिल तो बढ़िया है
09:27दूद
09:28सुधा शादी शुदा होने के बावजूद कई दिनों की प्यासी थी
09:32वही रंजन को उस छोटे बच्चे वाली प्यास थी
09:35दोनों एक दूसरे की जलक पाने को बेताब
09:40रुखो
10:16कल वाली मल की नहीं आई
10:19क्यों तो मैं हमें दूद देने में कोई इतराज है क्या
10:21नहीं नहीं वो चाचा जी ने कहा ता कि हिसा
10:24लो हुआरे साथे काल दूद दा कि हुआरे साथे
10:38दूद हाजार हुए थे ना
10:45वो
10:53पैसे
10:59आज से शाम को भी दूद देना
11:01जी बिल्कुल बिल्कुल
11:03ठीक है
11:04जी चलते हैं
11:14तुझे मना किया था न बाहर आने के लिए
11:18वो मा जी आपके बेड़े ने पैसे भेजे थे
11:21मैंने सुचा वो आया है तो
11:24दे देते हूं बिल
11:25चल अंदर तुझे तो वैसे भी बहाना चाहिए गर मर्दों को देखने के लिए
11:31चलो बहुत हो गया
11:51आगे तुम
11:54जी ज्यादा इंतजार तो नहीं करना पड़ा ना
11:56नहीं नहीं नहीं हमा सभी ही आएं
12:01अंदर आचा
12:04मा जी नहीं है क्या
12:05मा जी बाहर गए कल आएंगी
12:09अंदर चलो
12:11चलिए चलते हैं
12:23तुम यहाँ बैट जाओ
12:25मैं थोड़ा फ्रेश होके आती हूँ
12:28ठीक है
12:34तब तक यह बुखी पढ़ लेता हूँ
12:37सुधा ने रंजन को घर के अंदर आने का नियोता दे दिया था
12:42लिखने यह नियोता सिर्फ घर के अंदर आने का नहीं
12:45बल्कि उसके जिस्म की आग को बुझाने का था
12:59तुम अपने दूद में पानी तो नहीं मिलाते न?
13:05सुना है
13:07दूद में अगर पानी मिल जाए
13:09तो वो सिहत के लिए अच्छा नहीं होता
13:17इस पूरे शहर में मुझसे अच्छा दूद कोई नहीं दे सकता माडम
13:23इस पूरे शहर में तुम जैसा दूद वाला भी तो नहीं होगा
13:32सच में
13:34बलकिल
13:48अरे
13:52यह क्या कर रहे हो
13:54देखना चाहते हूं
13:55झाल
13:55झाल
13:55झाल
13:55झाल
13:55झाल
13:56झाल