00:00कभी मत कहना सड़क गंदी है, सड़क कैसे गंदी होगी, जंगल की पकडंडी भी कभी गंदी देखी है, जंगल में
00:07साधारण पकडंडी होती है, और मनुष्य ही नहीं बनाते हैं, जहां मनुष्य जंगल में नहीं जाता है, वहां भी पकडंडी
00:13होती हैं, बताओ कौन बनाता
00:15जानवर, उदारन के लिए कोई नदी बह रही है या वहाँ कोई तलाब बगएरा है, तो हिरन अपना रास्ता बना
00:21लेते हैं, उसी से आते हैं, उसी से जाते हैं, तो उससे भी कुछ बन जाता है, पक डंडी जैसा,
00:25जंगल में भी रास्ते गंदे नहीं होते, तो यहां हमारी स
00:44सड़क गंदी है, क्या बोलना चाहिए, हम गंदे हैं, हवा नहीं प्रदूशत है, हम हैं प्रदूशन, हम सिर्फ प्रदूशा की
00:54नहीं हैं, हम प्रदूशन हैं, इगो, पॉल्यूटर और पॉल्यूटेंट दोनों है, तब कुछ वही से शुरू होता है