पुनर्वास गृह में संवर रही बुजुर्गों की जिंदगी, विश्व वृद्धजन विशेष...
सवाईमाधोपुर. उम्र के इस पड़ाव पर किसी को अपनों का साथ नहीं मिला तो कोई बीमारी और आर्थिक तंगी के कारण घर से दूर हो गया। किसी को समाजसेवियों ने रेलवे स्टेशन से उठाकर सहारा दिया तो कोई अकेलेपन के बीच भटकते हुए मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह तक पहुंचा। यहां पहुंचने के बाद इन बुजुर्गों की जिंदगी ने फिर करवट ली। घुड़ासी रोड स्थित मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह में रहने वाले बुजुर्गों को भोजन, रहने, चिकित्सा, दवाइयों और नियमित देखभाल की सुविधा मिल रही है।
विश्व वृद्धजन दिवस के मौके पर पत्रिका टीम ने बुधवार को मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह पहुंचकर यहां की व्यवस्थाओं की पड़ताल की और वहां रह रहे बुजुर्गों से बातचीत की। बातचीत में किसी ने अपनों से दूर होने का दर्द साझा किया तो किसी ने पुनर्वास गृह में मिल रहे सहारे को अपनी जिंदगी का संबल बताया। पेश है बुजुर्गों से बातचीत के कुछ अंश...
‘मेरे आगे-पीछे कोई नहीं, अब यहीं मिल रहा सहारा’
रामपुरा कोटा निवासी 60 वर्षीय श्यामलाल बैरवा पिछले चार महीने से मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह में रह रहे हैं। बातचीत में उन्होंने बताया कि परिवार में उनका कोई नहीं है। वह पहले सामान्य चिकित्सालय के आसपास भीख मांगकर गुजारा करते थे। बीमारी के दौरान कुछ समाजसेवियों की नजर उन पर पड़ी और वे उन्हें पुनर्वास गृह लेकर आए। यहां उपचार मिलने के बाद अब उनकी तबीयत ठीक है। श्यामलाल बताते हैं कि यहां समय पर भोजन मिलता है और रहने-सोने के साथ चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध है।
माता-पिता के बाद भाइयों ने छोड़ा साथ
रेलवे कॉलोनी राकेश शर्मा करीब ढाई साल से पुनर्वास गृह में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब चार साल पहले माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद भाइयों ने उन्हें घर से निकाल दिया। अकेले पड़ने के बाद उनके पास कोई ठिकाना नहीं था। ऐसे में वे मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह आ गए। राकेश के अनुसार यहां भोजन और रहने की व्यवस्था के साथ चिकित्सकीय जांच व उपचार की सुविधा भी मिल रही है।
रेलवे स्टेशन से पुनर्वास गृह तक पहुंची जिंदगी
अमृतसर, पंजाब के उम्रपुरा निवासी 89 वर्षीय जोगेन्द्र सिंह करीब छह महीने से यहां रह रहे हैं। उन्हें समाजसेवियों ने रेलवे स्टेशन पर देखा और वहां से लाकर मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह में भर्ती कराया। उम्र के इस पड़ाव पर जोगेन्द्र सिंह के लिए यहां का आश्रय नया ठिकाना बन गया है। वे बताते हैं कि यहां भोजन, रहने और चिकित्सा की सुविधाएं मिल रही हैं और नियमित देखभाल भी होती है।
नि:संतान दंपती को बीमारी और तंगी में मिला सहारा
सीमेंट फैक्ट्री निवासी 88 वर्षीय श्यामलाल सैन और उनकी पत्नी बरफीदेवी करीब दो साल से मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह में रह रहे हैं। मूल रूप से ईसरदा निवासी यह दंपती नि:संतान है। दोनों ईसरदा छोड़कर सीमेंट फैक्ट्री क्षेत्र में रहने लगे थे। श्यामलाल के अक्सर बीमार रहने और आर्थिक परेशानी बढ़ने के बाद दोनों ने पुनर्वास गृह का सहारा लिया। अब यहां उन्हें नियमित देखभाल के साथ भोजन, रहने और चिकित्सा सुविधा मिल रही है। दंपती के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि बीमारी की स्थिति में उपचार और दवाइयों की व्यवस्था समय पर हो जाती है।
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फैक्ट फाइल
कुल क्षमता: 75
वर्तमान में रह रहे लाभार्थी: 59
पुरुष: 33
महिलाएं: 26
वृद्ध पुरुष: 10
वृद्ध महिलाएं: 10