00:00ुद्ध के अहंकार को तोड़ना और उसका मनोबल कमजोर करना था।
00:27यह गुप चाल किसी और की नहीं, बलकी भगवान श्री कृष्ण की एक सोची समझी रणनीती थी।
00:33श्री कृष्ण जानते थे कि बिना मानसिक रूप से तोड़े अजे करन को हराना असंभव था।
00:39शल्य के हर ताने ने करन के भीतर की उर्जा को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया था।
00:44युद्ध के निरनायक शन में जब करन का पहिया धंस गया, शल्य मदद से पीछे हट गए।
00:50वही ताने और अपमान करन के अंत का सबसे बड़ा कारन बन गए।
00:54इस प्रकार शब्दों के बानों ने हथियारों से भी पहले करन को पराजित कर दिया।
00:59महा भारत का यह प्रसंद सिखाता है कि मानसिक कमजोरी शारिरिक बल से ज्यादा घातक होती है।
01:05ऐसे ही अनसुने रहसियों को जानने के लिए सनातन धारा को लाइक और फॉलो करें।