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  • 2 days ago
महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में जब मद्र देश के राजा शल्य ने सूर्यपुत्र कर्ण का सारथी बनना स्वीकार किया, तो इसके पीछे एक भयंकर मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक रहस्य था। जानिए कैसे शल्य ने हर पल कर्ण का मनोबल तोड़ा।
Transcript
00:00ुद्ध के अहंकार को तोड़ना और उसका मनोबल कमजोर करना था।
00:27यह गुप चाल किसी और की नहीं, बलकी भगवान श्री कृष्ण की एक सोची समझी रणनीती थी।
00:33श्री कृष्ण जानते थे कि बिना मानसिक रूप से तोड़े अजे करन को हराना असंभव था।
00:39शल्य के हर ताने ने करन के भीतर की उर्जा को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया था।
00:44युद्ध के निरनायक शन में जब करन का पहिया धंस गया, शल्य मदद से पीछे हट गए।
00:50वही ताने और अपमान करन के अंत का सबसे बड़ा कारन बन गए।
00:54इस प्रकार शब्दों के बानों ने हथियारों से भी पहले करन को पराजित कर दिया।
00:59महा भारत का यह प्रसंद सिखाता है कि मानसिक कमजोरी शारिरिक बल से ज्यादा घातक होती है।
01:05ऐसे ही अनसुने रहसियों को जानने के लिए सनातन धारा को लाइक और फॉलो करें।

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