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  • 16 minutes ago
वडनगर से पीएम हाउस तक, जानिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन और संघर्ष की पूरी कहानी

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00:00बचपन में अपने एरादों में संकल्प का बीज बोया था प्रधान मंत्री बोधी रे
00:04जिसे कई वर्ष तक अपने श्रम से सीचा और इस तरह वो संगहर्षों के कठोर धरातल पर चलते चलते प्रधान
00:12मंत्री आवास तक पहुँचे
00:14लेकिन इस एक रास्ते में कई रास्ते थे, कई मोड भी थे
00:37पौरानिक नगरी वड़नगर जहां महादेव की धरोहर भी है और तानसेन की सुरीली विरासत भी
00:45वर्तमान में विलीन इस शहर का इतिहास यूं तो धाई हजार साल पुराना है
00:50लेकिन 75 वर्ष पहले गूंजी किलकारी ने इस शहर को नई पहचान दी
00:55तब दामोदर दास मूलचंद मोदी के घर उनके तीसरे बेटे का जन्म हुआ था
01:03बड़ी बड़ी शक्सियतों के पैतरिक आवास को समारक बनाने के बारे में आपने कई बार सुना होगा
01:09लेकिन अब एक ऐसे प्रधान मंत्री की कहानी भी सुनिये जिसकी शुरुआत एक 50 गज के घर से होती है
01:16ये वही जगह है जहां पर नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ था
01:21आज इसे कुछी महीनों पहले तोड़ना पड़ा है क्योंकि आसपास के इमारतों पर इसके जरजर हालत का प्रभाव पड़ रहा
01:29था
01:31बहराल आप सोचिए कि कितनी कठिनाई से कितनी कठिन परिस्थितियों से कितने सीमत दाइरे से निकल कर एक व्यक्ति की
01:40उड़ान आस्मान को पार कर गए
01:45छे भाई बहनों में मोदी का बचपन बेहत गरीबी में गुजरा
01:54हमें गरीबी क्या होती है वो देखने के लिए जाना नहीं पड़ता है
02:00क्योंकि हमने बचपन गरीबी में बिताया है
02:09साम को जब घर में चूला न जले बच्चे रात रात रोते रहें
02:16तब पता चलता है गरीबी क्या होती है
02:31पिता को परिवार का पेट पालने के लिए चाई की दुकान चलानी पड़ती थी
02:35तो मोदी भी उनका हाथ बटाते थे
02:37अरे नरेंद्रा बेटा ये सब भी बराबर है
02:41पहले बाकड़ा साफ करें लोगों को बैठना है
02:43अरे तुमारा बेटा नरेंद्र बहुत अच्छा लड़का है
02:48अग्यागारी पुत्र है देखना बड़ा होकर मेरा नाम रोशन गड़ेगा ये
02:53पाबुजी केदली में चाहे निकाल दो
02:55ट्रीन आने वाली है आप बस मेटा ये निकाल दी है ये ले जा और सुन ज्यादा तेज नहीं भागना
03:01ये तो दोनों गिर जाओगे चाहे भी और तुम भी है ये ले यहां से करीबन 200
03:07इनकी स्कूल है यहां यहां यह ये उस्टाशन में इनके पitष की केंटीन चनलती थी तब
03:13वो स्कूल से जब छुटते थे तैस कृति रिशेस होती थी तब भरहां से सीधे अपने
03:20जी को चाई के धंदे में मदद करने के लिए यहां आते थे मैं 35 साल तक बिच्छा मांग करके
03:26खाया हूँ अब कि जिगे गले ने उतरे कई लोगों के घर में इसलिए खाने का कोई बचा जूद आजब
03:35मैं कभी बता करके नहीं जाता था जाता था पड़ा है तो खाता था पन
03:47की जिन्दगी में सब कुछ सिवाए उनके असाधारण व्यक्तित्व के
04:10अच्छे तरसे शक्ति है वो कोई स्वार्थी नहीं है वो सब सेवा करते है तो स्कूल की अंदर हमने अच्छे
04:21तरसे
04:21सभी में पार्ट लिया थै करमत्गमत में वी पार्ट लेता था नाटक चेटक में वी पार्ड लेता थै और कहीं
04:30Studien को
04:31कोईने कोई लगह लखनस परदा हो तु उसमें भी पार्क लेते थैं फिर कॉलेज में तो मने अन्टाक gradually disentत
04:37किया पगर खनो पार यगा
04:40पगर्खा एले जूते गुजराती में पगर्खा बोलता है एक दिन बापो बार बेट रहे थे तो उनकी मोजडी एक कुटता
04:49ले गया तो इसके उपरा पुरा नाटक था और वो एमन कोलेज में बहुत अच्छी तरह से पेश किया था
04:58उनको बार बार तालिया बस्ती थी तो �
05:22आज इस समय एहमदाबाद के वड़नगर रेलवे स्टेशन पर मौजूद हूँ जो बच्मन में नरेंद्र मोदी के जीवन यापन का
05:29जरिया था आज इस स्टेशन की शेहर की
05:33पहचान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जुड़ी है यही पर उनके पिता चाय के दुकान लगाया करते थे ठीक
05:41उसी जगे पर अब कुछ मरम्मत करके उस स्थान को रख दिया गया है लेकिन यहाँ पर उनके पिता चाय
05:49बनाते थे नरेंद्र मोदी बच्मन में च
06:01यह कहानी बच्चा बच्चा जानता है लिकिन यह कहानी है संघर्ष की तो यह कहानी है उम्मीद की यह कहानी
06:10बताती है कि आप कितनी भी नीचे से शुरुआत क्यों न करें आपका लक्ष कितना बड़ा है आप कितनी उचे
06:19तक सपना देख सकते हैं आप उसे पूरा करने के लि
06:34रेल्वे स्टेशन पर जहां पिता चाय की दुकान चलाते थे, उसके ठीक पीछे मोदी का स्कूल था
06:44घंटी बचते ही, वो दुकान छोड़ स्कूल चले जाते थे
06:49अरे जा नरे मिरा, ये ले अपना बस्ता और स्कूल जा, घंटी बच गई है
06:54और सुन, अच्छे से पढ़ना, ठीक है बाबुजी, मैं अच्छे से पढ़ना और आपको अर्मा के नाम रोशन करूँगा
07:00सरस, सरस, सरस, जा, जा, जल्दी, और सुन, दुकेर को इधरी है ना, ठीक है बाबु, आओ जे
07:07हम कहते हैं मुकदर का सिकंदर पर मुकदर का सिकंदर भी तो वही हो सकता है जिसने मेहनत की हो
07:16यह नरेंद्र मोदी का स्कूल है जहां पर कभी वो शिक्षा प्राप्त करते थे
07:21लोग उनके अभिने को भी याद करते हैं, एक NCC कडेट के तौर पर उनका समय याद करते हैं
07:26और सबसे बढ़कर बात ये कि यहाँ पढ़ने वाले गरीब घरू के बच्चे भी ये सोचते हैं
07:33कि वो जीवन में कुछ भी हासिल कर सकते हैं, क्योंकि उनके सामने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण है
07:45प्रधान मंत्री को जिन टीचरों ने पढ़ाया, उनमें से अधिकांचा बहुत वृद्ध हैं
07:50हालनकि अभी भी जो आयोजन होते हैं, उसमें वो स्कूल आते हैं
07:54लेकिन आप सब जो आप यहां पढ़ाते हैं, क्या प्रधान मंत्री को देखकर आप सब महसूस करते हैं
08:02और जो टीचर सुनाते होंगे, वो कहानिया तो सुनाते ही होंगे
08:06पहले तो मोदी जी हमारे स्कूल के चात्र रहे है, उस बात का हमें गर्व है
08:12हमारे बच्चों के लिए यह सबसे बड़ा मेसेज है
08:15हम बच्चों को कहते हैं कि एक सामाने परिवार से आया हुआ बच्चा आद देश की प्रधान मंत्री तक पहुचा
08:23है
08:23आप में भी ऐसी कई शक्तिय है कि आप भी कुछ कर्श पाते हैं
08:27तो हमारे लिए सबसे बड़ा मेसेज मानिया नरेंदरबे मोदी साहिब का जीवन है
08:32उनके बुद्पूर वर टीचर कहते थे कि नरेंदरबाई बाले काल से ही सिस्त वाले थे
08:39एन्सीसी के अच्छे कैडिश रह चुके है
08:42उन्होंने नाटक किया था जिसमें जोगिदा स्कुमान का रोल किया था
08:47जब जब उनके टीचर आते हैं तो वो ये बात अवश्य करते ही हैं
08:54अभिने में भी वो मश्यूर थे और नित्रुतों के गुण तो बाले काल से ही उन्होंने थे ही
09:01तीसरी तस्वीर है ना
09:052017 में सर यहां पर पढ़नगर आये थे
09:09तो यहां स्कूल में आकर उन्होंने अपनी स्कूल की मिट्टी को सर पर चड़ाया
09:18और आखों में आसू आ गए उनको बाले काल का जीवन उनके सामने आ गया है
09:24और हमारे लिए इससे बड़ा आनंद की बात तो और कुछ हो ही सकते नहीं
09:31सिर्फ स्कूल ही क्यों पूरे वर्डनगर में मोदी के बचपन की तमाम कहानिया सब की जुबान पर है
10:02बेरहाल जिस वक्त मोदी स्कूल में पढ़ रहे थे गुजरात में आरसेस का विस्तार हो रहा था
10:08किवल आट साल की उम्र में मोदी शाखा से जुड़ गए
10:16लक्षमन राओ इनामदार उर्फ वकील साहब ने मोदी को बाल स्वैम सेवक की शपत दिलाई
10:22आरसेस की शाखा में शिरकत ने मोदी की शक्सियत में कई टहनिया जोड़ दी
10:27लेकिन मोदी का मन बेचैन था हिंदुत्व के प्रचार में वक्त बिताएं या एक सन्यासी का जीवन जीएं
10:33मोदी की जिंदगी में दो साल ऐसे भी आए जब वो कहां थे कोई नहीं जानता
10:48कदर के निचे गरुचेटी में उनने साधना की है ऐसा मेंने सुना है
10:54उनका जो अभी, वहां के स्वामी अभिराम जी कर गए नरुदा के नरवना अस्न मना है
11:00उनकी साथ मेरे बात हुई थी तो उन्हें बता खाए नरंदर जी हम हमारे आया करते थे
11:09केते हैं दो साल की इस अग्यात्वास में मुदी ने हिमाले की खाक विछानी फिर वो लोट आए और एहमदाबाद
11:15जाने का फैसला किया
11:17शेहर के बस्टैंड पर चाय का ठेला लगाया
11:21मेरा बेग्राउंड भी बिलकुल सामान्य गरीब परिवार का है
11:30आप मैं से बहुत कम लोगों को मालूम होगा मैंने पहली बार अभी दो दिन पहले दिली में आया था
11:35तो
11:36पहली बार अपने मूँ से मैं बोला था
11:39मित्रों में बच्पन में रेल के डिबे में चाय बेचता था

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