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  • 3 hours ago
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों समेत 42 पूर्व जजों ने गुरुवार को कड़े शब्दों में लिखे एक खुले पत्र में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरे संवैधानिक संस्थानों को कमजोर करने के लगातार चल रहे अभियान पर गहरी चिंता जताई. हस्ताक्षर करने वालों ने बिना सबूत के “वोट चोरी” के आरोपों पर सवाल उठाए हैं, और चेतावनी दी है कि संवैधानिक अधिकारियों को बार-बार “चोर” और “समझौता करने वाला” कहने से लोकतंत्र में लोगों का भरोसा कम होने का खतरा है. संस्थाओं की आलोचना एक लोकतांत्रिक अधिकार है. पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज हेमंत गुप्ता और पंकज मित्तल समेत अन्य के हस्ताक्षर किए हुए पत्र में कहा गया है, "यह बदनामी नहीं है." मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव करते हुए, हस्ताक्षर करने वालों ने जोर दिया कि यह एक कानूनी तौर पर तय काम है जिसका मकसद साफ और सही मतदाता सूची पक्का करना है. पत्र में चेतावनी दी गई, "भरोसा लोकतंत्र की करेंसी है", और कहा गया कि चुनावों को गलत साबित करने की कोशिशों से अशांति फैल सकती है और अराजक तत्वों को बढ़ावा मिल सकता है."

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Transcript
00:28।
00:30और समझोता करने वाला कहना लोकतंत्र में जनता के भरोसे को कम कर सकता है।
00:34SIR का बचाओ करते हुए हस्तक्षर करने वाले पूर्वजजों ने जोर दिया कि ये एक कानूनी प्रक्रिया है जिसका मकसद
00:42साफ और सही वोटर लिस्ट सुनिशित करना है।
00:45भरोसा ही लोकतंत्र की पुंजी है और चुनावों की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिशें अशांती फैला सकती हैं और
00:54राजक तत्वों का होसला बढ़ा सकती है।
00:56चुनावायों को लेकर एक अंग्रेजी अखबार के खुलासे के बाद विपक्षी पार्टियां यूथ संगठन और सीजेपी लगातार प्रदाशन कर रही
01:05है।
01:06और मुख्य चुनावायुक्त के स्थीफेगी मांग कर रही है।

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