00:00साल 1984, प्रिथवी से 200 किलोमीटर उपर, साल्यूट साथ स्पेस स्टेशन के अंदर, भारत की प्रधान मंत्री ने एक स्क्वाडर्ण
00:10लीडर से वो सवाल पूछा, जिसका जवाब किसी ने और्बिट से पहले कभी नहीं दिया था.
00:15उपर से भारत कैसा दिखता है? सारे जहां से अच्छा, पूरी दुनिया से बहतर.
00:2341 साल बाद, एक ग्रुप कैप्टन ने वही सवाल जिया, एक्सियोम 4 पर, स्पेस स्टेशन की ओर.
00:30भारत के हर एस्टरनौट डेजिगनेट ने उड़ना इसी यूनिफॉर्म में सीखा.
00:38लेकिन उससे भी 41 साल पहले कुछ और पहुँच से बाहर उड़ रहा था.
00:45एक रेकॉनिसेंस जेट 60,000 फीट से उपर, जिसे कोई पकड़ नहीं सकता था.
00:52जब देश सो रहा था, आस्मान का पहरा कौन दे रहा था? और ये कहानी शुरू कहां से हुई?
01:008 अक्टूबर 1932 एक कानून बनता है भारती ये वायू सेना.
01:071 अप्रेल 1933 छे अफसर, 19 हवाई सिपाही, 4 लकड़ी के बाइपलेन. यही थी पूरी एर फोर्स.
01:17सुबरतों मुखर जी, father of the Indian Air Force, ने वो सेना खड़ी की, जो एक दिन और्बिट से जवाब
01:25देगी.
01:26उनके उत्तराधिकारी अरजन सिंग ने वो रैंक पहनी, जो भारतीय सेन ने इतिहास में सिर्फ तीन अफसरों को मिली.
01:331965, पाकिस्तान के पास तेज अमेरिकी सेबर जेक्स, भारत के पास एक छोटा सा फॉलन नैट.
01:42जंग खत्म होते होते, दोनों तरफ के पाइलिट्स ने उसे नाम दिया सेबर स्लेयर.
01:49उसी जंग में स्कौडरन लीडर A.B. देवया ने मिस्टर I.B.A. से एक F.104 गिया और फिर
01:59नौटे ने.
02:0023 साल बाद 1988 में सच सामने आया, उन्हें महावीर चक्र मिला.
02:086 साल बार, श्री नगर में, फ्लाइंग आफिसर सेखों अकेले अपने नैट में 6 हपलावर जेट्स से पिड़े.
02:18वो भी नहीं लोटे, उनका परम बीच चक्र आज भी इस एयोस का अउपनावता है.
02:271988 मालदीव में तखता बलट.
02:30दो आई एल, साथ छे पैरा टूपर्स को लेकर साढ़े तीन हजार किलोमीटर, बिना रुपे, उड़े.
02:38सुबह तक तखता बलट फेड़.
02:431963 मिग 21, भारत का पहला सूपरसॉनिक फाइटर.
02:50आज वही फोर्स दुनिया की चौती सबसे बड़ी ऐर्फोर्स है.
02:55लगधत 17-100 एर्टर.
02:59SU-20 MAI, मैक 2-7.
03:08मिराज 2, मैक 2.2.
03:16सी लेवल पर साउंड बैरियर 1230 किलोमीटर कती घंड़े पर है.
03:21उसे बार करो, तो हवा दिखने लगदी है.
03:25सॉनिक भूम साउंड इफेक्ट नहीं है.
03:27ये एक जेट का अपनी आवाज से आगे निकलना है.
03:31अब वही एर्फोर्स 16,700 फीट उपर.
03:36सबसे ठंडी, सबसे पतली हवा, दौलत बेग पोल्डी, दुनिया की सबसे उची ओपरेशनल एर स्ट्रिप दशकों खाली रहे.
03:4631 मैं 2008, एक IAFAN 32 ने वहाँ उतर कर उसे जिन्दा कर दे.
03:54पांच साल बाद, उसी पट्टी पर C-130J सूपर हर्क्यूलिस उतरा.
04:02यहीं 1984 से ओपरेशन मेगदूद सियाचिन की रक्षा कर रहा है.
04:09इस उंचाई पर हवा इतनी पतली कि इंजन जवाब देने लगते हैं.
04:14यह पाइलेट्स फिर भी उदरते हैं.
04:1860,000 फीट और 16,000 फीट, एक ही एरफोर्स, दोनों एक्स्ट्रीम्स के लिए.
04:24जो स्पेस के किनारे को छू सकते हैं, वही सबसे पहले बाढ़ में भी पहुँचते हैं.
04:33जून 2013, उत्तराखंड में बाढ़, एरफोर्स ने ऑपरेशन राहत शुरू किया.
04:413500 से ज्यादा मिशन, लगभग 24,000 लोग सुरक्षित, दुनिया के सबसे बड़े सिविलियन हेलिकॉप्टर रेस्क्यू में से एक एक
04:53एम आई 17 और एम आई 26 वहां पहुँचे, जहां कोई सड़क नहीं पहुँच सकते थी.
05:00एक एम आई 17 लोटा नहीं, बीस जाने गए, एक कीमत जो ये एरफोर्स जो चाप याद रखती है। ये
05:11जजबा सरहदों तक सीमित नहीं है।
05:192015, नेपाल भुकम, ओपरेशन मैत्री, एक ही दिन में राहत। उसी साल यमन में नेवी के साथ मिलकर 4500 से
05:32ज्यादा भारतियर और 1000 विदेशी नादरिक सुरक्षित निकारें।
05:362021, काबुल, C-17 और C-130, J, सैंकडो भारतियों को वापस लाए। यूक्रेन, 2022, इवाक्यूएशन, तुरकी, 2023, रेस्क्यू टीमें
05:53और राहत सामक, सुडान, 2023, रात के अधिरे में विला लाइस, गरुड कमांडोज ने 121 लोगों को निकाला।
06:05दो एरक्राफ्ट, छे ओपरेशन, एक जजबा, सबसे पहले पहुचना।
06:12जो पंक राहत पहुचाते हैं, वही घर पर कुछ नया भी बना रहे हैं।
06:204 जनवरी 2001, HAL, पेजस की पहली उडा, भारत में डिजाइन, भारत में बना।
06:2915 साल बार, नमबर 45 स्कॉर्टरन, फ्लाइंग डैगर्स में शामित।
06:35सबसे हलके सूपर सॉनिक फाइटर्स में से एक, आगे MK-1A, MK-2 और 5 जनरेशन AMCA
06:4618 जून 2016, अवनी, मोहना और भावना, भारत की पहली महिला फाइटर पाइलेट्स
06:552018, अवनी जतुरवेद, पहली सोलो फाइटर, सौटी
07:032023, गुरुप कैप्टन शालिजा धामी, फ्रन्ट लाइन कॉम्बैट यूनिट की पहली महिला कमांडर
07:12और उपर, 2018 से एक नया शील्ड नजर रख रहा है
07:19S-400, सुदर्शन चक्र, 2021 में ऑपरेशनल
07:27मई 2025, ऑपरेशन सिंदू, बैटरीज वेस्टन बॉर्डर पर तैनाथ
07:35ये शील्ड महसूस करने के लिए है, गिनने के लिए नहीं
07:39हर उडान, हर रेस्क्यू, हर खामोश पहरेदार, सब एक इनसान पकाते हैं
07:46जमीन पर खड़ा वो शक्स, जो हर उडान से पहले सल्यूट करता है
07:51हर 8 अप्टूबर, वही सल्यूट एक परेड बनता है
07:55इस साल 94 साल पूरे, एर बेस बदलते हैं, उपर की गरज नहीं
08:0594 साल से भी पहले, इस एर फोर्स को पता था कि वो क्या रक्षा कर रही है
08:13फॉर्मेशन आखिर में तूटती है, हर जेट अपने खुले आसमान में निकल जाता है
08:2194 साल पहले, चार लकड़ी के बाई प्लेन, आज स्पेस के किनारे की ओर बढ़ता फाइटर
08:30मोटो वही, नभह स्पर्शम दीब्दम, आसमान को गौरव के साथ चूना
08:38और्बिट से जवाब देते स्कौाडरन लीडर से, सल्यूट करते उस शक्स तर
08:44ये कहानी कभी सिर्फ एरक्राफ्ट की नहीं थी, बताएं कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा चूगया
08:51सेबर स्लेयर, साथ हजार फीट का पहरेदार, या वो स्कौाडरन जो किसी के फैसले तक थी ही नहीं
08:58किसी वेटरन को टैग करें, अपना सेल्यूट शेयर करें, बताएं आपको किसने इंस्पायर किया
09:05एर फोर्स डे की शुबकामनाएं, जैहिन