00:04हर साल पश्रम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान ऐसे भव्य पंडाल बनते हैं जिन्हें देख कर आँखों पर विश्वास
00:11करना मुश्किल हो जाता है लेकिन क्या आप जानते ही कि आज पूरी दुनिया में मशूर ये उत्सव कभी राजाओं
00:18और जमदारों के घर की
00:19शान हुआ करता था आखर कैसे मा दुर्गा की पूजा राज महलों से निकल कर पूरे बंगाल का बड़ा उत्सव
00:26बन गई
00:29और अज पूजा का संबंद भगवान राम की एक ऐसी धार्मिक परंपरा से कैसे जुड़ा आईए आपको बताते हैं
00:36बंगाल की दुर्गा पूजा की धार्मिक जड़ें देवी दुर्गा और महिशासुर की पौरानिक कथा से जुड़ी है जिसे दुर्गा सब्तशती
00:43भी कहा जाता है
00:44में देवी द्वारा महिशासुर का वद करने का वर्नन मिलता है
00:48मादुर्गा को यहां शक्ति और अधर्म पर वजय का प्रतीक माना गया है
00:52बंगाल की लोगप्रिय रामायन परंपरा विशेशकर कृतिवास रामायन में भगवान राम द्वारा रामायन के युद्ध से पहले
01:00शरद रितु में देवी दुर्गा की पूजा करने की कथा भी मिलती है इसे ओकाल बोधुन कहा जाता है अर्धार्थ
01:08देवी का असमय आवाहन ये धार्मिक परंपरा बंगाल की शारदिय दुर्गा पूजा को एक खास पहचान देती है अब बात
01:16करते हैं इतिहास की
01:19बंगाल में दुर्गा पूजा के भव्वे आयोजनों का संबंद लंबे वक्त तक राजाओं जमिदारों और संपन परिवारों से रहा कोलकाता
01:27की शोभा बाजार राजबाडी की पूजा जिसे राजा नवकृष्ण देव से जोड़ा जाता है इसकी प्रसिद मिसाल है इस
01:47बारह मित्रों द्वारा सामोहिक पूजा आयोजित करने की परंपरा को बारोयारी पूजा के शुरुवाती उधारणों में गिना गया धीरे धीरे
01:54सर्वजनिक दुर्गा पूजा का विकास हुआ और महलों के लोग मिलकर पूजा आयोजित करने लगे अब ये केवल किसी र
02:16अधुनिक कला के जरीए अनोखी दुनिया रची जाती है। इसी सांस्कृतिक महत्व के कारण 2021 में कोलकता की दुर्गापूजा को
02:25युनेसको की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनेधी सूची में शामल किया गया।
02:46अलाव और बंगाल की संस्कृतिक पहचान की कहानी है। ये मादुर्गा महिशासुर कावत करने वाली आदिशक्ती भी है और अपने
02:53माय के आने वाली बेटी भी। शायद यही वज़ह है कि हर साल पूरा बंगाल उनके स्वागत में एक साथ
02:59खड़ा हो जाता है।