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  • 3 weeks ago
देशभर में फैली जयपुर रियासत की संपत्तियों की कहानी. राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र भेज मांगा मालिकाना हक. अंकुर जाकड़ की रिपोर्टे...

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00:00जैपुर के पुर्व राजपरिवार के संपत्यों का दायरा सिर्फ राजस्तान तक सिम्टा हुआ नहीं था, बलकि कई दूसरे राज्यों और
00:08विदेशों तक में इसकी संपत्यां देखने को मिलती हैं.
00:19जैपुर के राजपरिवार की जो संपत्यां हैं, वो कहां कहां और किस किस रूप में मौजूद हैं?
00:27जैपुर के राजा मुगल प्रतम सरणी की सुबधार थे, तो जहां जहां यह रहे, वहां वहां इन्होंने संपत्य बनाई.
00:34दिल्ली, रैसिना हिल्स, लाल किला के आसपास का इलगा, ब्रणावन, उज्जेन, मालवा का बहुत सरी चीज़े, बुंदेल खंट, आपके कासी
00:48के पास में, हिमाचल, यहां तक कि जो वरतमान बांगलादेश है, वरतमान पाकिस्तान है, वहां भी जैपुरी रियासत की सं
01:00जो कि इसके उपर कुछ प्रकास डालता है, यह 1990 में छपाता है, इसमें कुछ मैप्स हैं, कुछ प्लांस है,
01:07जो वहां पर उन संपत्यों की ब्योरो की रुप में, जो की एक रिलीजियस प्रोपर्टी भी थी, एक ऐसी प्रोपर्टी
01:15जिसमें राजा महां रहता भी था, दि
01:21दिल्ली की जो समस्त जमीन है, वो जेपुर की जमीन की रुप में जानी जाती है, और जब दिल्ली बनी,
01:28कलकटा से दिल्ली राजदानी आई, तो इस बात को लेके अंग्रेजों ने हमसे चर्चा करी कि हमें यह संपत्य जीए,
01:35उस संपत्य के बदले, उस समय के राजा माद
01:50सारे घाट, जिनका ना केवल दार्मिक महत्वता, सांस्क्रितिक महत्वता, वो भी जेपुर महाराजाओं ने अपने पैसों से खरीदा, और वहाँ
01:58पर वो रुखते थे, हरिद्वार में एक जगह थी, बद्री बावला की हवेली, वहाँ पर मादु सिंग जी रुखते थे
02:04और उनका मुखित देशी यह होता था कि स्नान का परपस था, इसके लावा वहाँ पर वो राजनितिक मुद्दों पे
02:10भी चर्चा होती थे, बंगाल में काफ़े चारी जमीन रही, कि सूबेदार रहे, मालवा के रहे, बंगाल के रहे, दिल्ली
02:17के अंदरे उन्होंने च्छा
02:34आज भी संपत्तियां क्लासिफाइड है, जिसका कपड़ द्वारा में रिकॉर्ड है, और अगर उसके उपर चर्चा की जाए, बहुत लंबी
02:41चोड़ी चर्चा हो सकती है, और जेपुर की संपत्ति रियासतों में, जेपुर से बाहर सबसे ज़्यादा थी, हाँ, हम भी
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03:02जुरू की मंदिर जुड़े जो मंदिर है, वो भी है, घात भी देखने को मिल जाते है, गंगो दो करदे।
03:32तो जेपुर्ण ने न केवल संस्कृति को बनाने काम किया और वो रिकोर्ड अभी तक है 1949 तक और उसका
03:38आखरी बार सर्वे हुआ था 1963 देवस्तान विवाग बना लिया गया था तो यह तै किया गया था कि कहां
03:45-कहां बाहर बार कुछ मंदिरों को देवस्तान के जरिये आज भ
04:01प्रिवाग का जिम्मा नकेवल जेपुर नकेवल राजस्तान बलकि भारतवर्स और भारत के बाहर तक की चीजों में भी पुरा रहा
04:10है आजा दोने के बाद हम वहां जाए नी सकते थे पाकिस्तान में वांगलादेश में लेकिन पूरे भारतवर्स में इस
04:16तरह काबूल में
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