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एक फौजी पिता का सीना जहां देश सेवा के अनुशासन से चौड़ा होता है, वहीं व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली अपनी ही बेटी से 10 साल की खामोश दूरी उनके दर्द को बयां करती है। 29 वर्षीय नेहा बोरा की कहानी पारिवारिक वैचारिक मतभेदों और सड़क के जनसंघर्ष के बीच की एक मिसाल है। उत्तराखंड के सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाली नेहा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस, बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी और फिर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के 'स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स' से थिएटर व परफॉर्मेंस स्टडीज में शोधार्थी के रूप में अपनी शैक्षणिक पहचान बनाई।

AISA National President and JNU PhD scholar Neha Bora has emerged as a central figure in national student activism. Coming from an Indian Army background in Uttarakhand, her 10-year ideological rift with her father reflects the deep personal and political contrasts behind her journey. From participating in anti-CAA protests and a 23-day hunger strike alongside Sonam Wangchuk to leading demonstrations against the Election Commission over Special Intensive Revision (SIR), Neha's story highlights youth resistance and political change in modern India.

#NehaBora #JNUProtest #SIRProtest #OneindiaHindi

~PR.250~HT.408~ED.106~GR.508~VG.HM~

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00:08एक बाप का सीना गर्व से चोड़ा भी हो सकता है और दर्द से चलने भी लेकिन एक फौजी पिता
00:14जब अपनी बेटी के लिए ये कह दे कि वो जिसे अपना अधिकार समझ कर सड़कों पर लड़ रही है
00:19वो शायद गलत रास्ते पर चली गए
00:21तो बाद सर्फ राजनिती या च्छाता अंदोलन तक सीमित नहीं रहती दस साल से पिता और बेटी के बीच एक
00:27खामोश दीवार खड़ी है एक तरफ सरहत की हिफाज़त करने वाला वो अनुशाशन जो व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले
00:34सौ बार सोचता है और दूसी त
00:48गूती नजर आती है जहां पारिवारिक रिष्टों का टूटना और सड़क के संग्राम का उठना एक साथ दर्ज होता है
00:54दिल्ली की तपती सड़कों पर जब खाकी वर्दी का पहरा सक्त होता है और बैरिकेट्स की लोही की सलाक हैं
01:00आगे बढ़ने से रोकती है तब भी जि
01:06वो नेहा बोरा ही हैं हाली में मुख्य चुनावायोग ज्यानिश कुमार के स्थीफिकी मांग और मतदाता सूची के विशेश कहन
01:12पुनरीक्षन यानि की SIR कूलिकर उठे विवादों ने दिल्ली का तापमान बढ़ाया फुल्स की गाड़ियों में जबरन बिठाया जाने क
01:18के बाद नेहा बोरा जिस बेवाकी से कैमने के सामने चला कर कहती हैं कि विरूत प्रदेशन करना कोई भीख
01:25या दया की खैरात नहीं मलकी देश के नागरिक का बुनियादी हक है उसने इस पूरे देश का ध्यान अपनी
01:31तरफ की जा
01:32बारे अक्टूबर को जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वार्डर के साथ हुए मार्च में नेहा आगया के चलती नजर
01:37आईं तो ये साफ हो गया कि जेनियू के कमरे से निकली ये आवाज अब राश्वर राजनीती के बड़े कैनवास
01:42पर अपनी जगहा बना च�
01:57दिल्ली यूनिवरसिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन किया और फिर डॉक्त बियार रामबेटका यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिक्री हांसिल
02:05की पढ़ाई कई इस सफर आगे बढ़ा और वो जवहललाल नहरु यूनिवरसिटी यानि की जेनिय
02:10के School of Arts and Aesthetics तक पहुंची जहां से वे Theater और Performance Studies में PhD की शोधार्थी बनी
02:17रंगमंच की इस दुनिया ने नेहा को सिर्फ कला नहीं सिखाई बलकि समाच की असमानताओं विवस्ताओं की कम्यां और सत्ता
02:24के तोर तरीकों को बारीक नजरों से देखना सिखाया नाटक के मंच से श
02:40प्रमुक आवाज बन चुकी हैं। उनकी सख्रियता का इतिहास देखें तो 2019-20 में नागरिक्ता संशोधन कानून के विरूट से
02:47लिकर शिक्षा और परिक्षां में होने वाली धान्रियों के खिलाफ लड़े गए हार एक बड़े आंदोलन में उनकी मौसूद की
02:53दर्स रही
02:54हाली में लद्दा के चर्चत कारेकरता सोनम वांग्चुक के साथ जंतरमंतर पर 23 दिनों तक चले कटिन भूख हड़ताल में
03:01पी नेहा की मजबूती ने हर किसी को हैरान कर दिया। इतनी लंबी भूख हड़ताल के बावजूद उन्होंने चाद्रफितों और
03:07नागरिकधिक
03:22वो साफ कहती हैं कि अगर सरकार लोगों के विरूद से डग कर जंतरमंतर जैसी तय जगाहों को भी बंद
03:28करने लगे और पुलस फॉच को सड़कों पर उतारते तो समझ देना चाहिए कि सत्ता में बैठी लोग घबरा गए
03:34हैं। थेटर की पढ़ाई से शुरु हुआ एक आ
03:51सवाल भी उठाती है और एक ऐसी पीडी का चहरा भी सामेल आती है जो अपने अधिकारों के लड़ाई में
03:57सब कुछ दाओं पर लगाने से पीछे नहीं हटती। नेह बोरा को लेकर आप कितना जानते हैं उनके ससंधर्श के
04:04लड़ाई, हक के लड़ाई को लेकर आप कितना स
04:21बürok के लाई झाल समौरी के लाई समौरी के लाई सक्राइब लगाराइब रख और समी ठcience में सब करी नहीं
04:26है

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