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उत्तराखंड के हिमालय में स्थित रूपकुंड झील अपने किनारों पर मिले सैकड़ों इंसानी कंकालों के लिए मशहूर है। आखिर ये लोग कौन थे और इनकी मौत कैसे हुई? जानिए इस रहस्यमयी झील की कहानी, प्राचीन डीएनए की जांच से हुए चौंकाने वाले खुलासे और उन सवालों के बारे में, जिनके जवाब आज भी पूरी तरह नहीं मिले हैं। यह वीडियो रूपकुंड के इतिहास और इसके पीछे छिपे रहस्य को समझने में आपकी मदद करेगा।
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Transcript
00:02दिमाध्य के समुंद्र तन से करीब 16,000 फीट के उचाई पर एक ऐसी जील है जिसके किनारे बरब पिदलते
00:11ही सैक्र उफ कमकार दिखाई दिने लगते हैं
00:18क्या ये किसी भयानक हादसे में मारे गई यात्रियों के थे या इसके पीछे कोई ऐसा रहस्य है जिसका हिसा
00:24आप इतिहास में शिपा है
00:26उत्राखंड के चमोली जिले में स्थित इस जील का नाम है रूटकंड चारों तरफ उचे पहार, बरफीले रास्ते और बेहत
00:34कठिन मौसम
00:35इस सुनसान जगह पर इनसानों की हडियां और खोपडिया मिलने से ये जील दुनिया भर में चर्चा का विशय बन
00:42गई
00:44सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि यहां मिले सभी लोग एक ही समय पर नहीं मरे थे
00:49ऐसा बाद में विज्ञानिक जांच से पता चला
00:52लेकिन इस कहानी की शिरुवात कैसे हुई
00:55साल 1942 में एक वन अधिकारी हरी किशन मदवाल ने इस जील के आसपास बड़ी संख्यामी इंसानिक अंकाल लेखे
01:03उस समय बिड़श अधिकारियों को शक हुआ कि ये किसी जापानी सैनिक दल के अफशेश हो सकते हैं
01:11लेकिन जाश पदा चला कि ये हडियां उससे कई ज्यादा पुडानी थी
01:15इसके बाद शुरू हुई उस रहस्य की तलाश जिसने बैग्यानिकों को भी हैरान कर दिया
01:22इस घटना को समझने के लिए कई कहानिया सामने आई
01:25स्थान या लोककता के मताबिक कन्नोज के राजा जसधवल उनकी गर्वती रानी और उनकी साथियों का एक दल ननन्द देवी
01:35की यात्रा पर निकला था
01:36कहा जाता है कि देवी के प्रकोप से बचने का कोई रास्ता नहीं मिला और भीशन ओला ब्रिष्टी में पूरा
01:43दल मारा गया
01:44ये कहानी काफी समय तक प्रचलित रही कुछ लोगों ने माना कि ये प्यपाड़ी या यात्रियों का दल रहा होगा
01:51जो बड़फीले तूफान में फज गया एक दूसरी संभावना महामारी की भी थी लेकिन इसमें से किसी कहानी को निर्नाय
01:59ग्रूप से साबित करने वाला सबूत नहीं मिला
02:02फिर 2019 में इस रहस्य ने एक ऐसा मोर लिया जिसकी शायद किसी ने कलपना भी नहीं की थी
02:09विज्ञानिकों की एक अंतराश्ट्री टीम ने 38 कंकालों के प्राचीन डीने की जाच की साथ ही रेडियो कार्बन डेटिंग से
02:18उसकी उम्रखा पता लगाया गया नतीजे चौकाने वाले थे
02:21इन कंकालों में से 23 लोगों की अनुवनशिक पहचान दक्षिन एशिया की लोगों से मिलती थी
02:2814 लोगों की वानशुगत पहचान भूमदाय सागरिया शेत्र से जुरी मिली
02:33वहीं एक व्यक्ति की पहचान दक्षिन पूर्वे एशिया से संबन्दित थी
02:37सबसे बरी फुलासा उनकी उम्र को लेकर हुआ
02:41दक्षिन एशिया संबों के लोग लगभग 800 इस्वी के आसपास के थे
02:46जबकि दूसरे संबों के अफशेश लगभग 18 इस्वी के थे
02:51यानि इन सभी लोगों की मौत एक ही दुरभटना में नहीं हुई थी
02:55लेकिन इससे एक नया सवाल पैदा हुआ
02:58लगभ 1000 साल के अंतरल्प में अलग अलग श्रेटी से जुरे लोग
03:03इस दुर्गम जील तक कैसे पहुँचे
03:05क्या वे किसी यात्रा पर थे
03:08या उनके यहां पहुँचने की वज़़ा कुछ और थी
03:11विज्यानिकों के पास अभी इसका पूरा जवाब नहीं है
03:14उनकी मौत का सथी कारण भी निश्चित नहीं हो पाया है
03:18रूपकर्ण का रहसे अपसल्प सैकरों कंकालों का नहीं
03:21बलकि अलग-अलग समय और दूर दरास के इलाकों से
03:25आई लोगों की कहानी बन चुकी है

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