00:00नदी को बहते देखा है पहाडी नदी जैसी पहाडी नदी होती है और पहाड में भी वो नहीं जो रिशिकेश
00:06हरिद्वार पहुच गई है और उपर देखा है वो क्या बिल्कुल आइल्स के उपर से बह रही होती है
00:20तो इतना साफ कैसे होता है पानी पत्थर पर से बह रही है मिट्टी पर से बह रही है इतना
00:29साफ कैसे है कि ऐसे ही लेते हो तुम और अंजुली में और पी लेते हो और कोई नहीं बीमार
00:33पड़ता वो तो पूरे तरीके से एक्सपोजड है ना और यहां बड़ी सफाई होती है
00:41मशीने लगी हुई है, सब लगा हुआ है
00:43उसके बाद भी इसको ढखना पड़ता है
00:45क्याते हैं ढखा हुआ पानी नहीं थो पीना नहीं
00:47वो जो नदी बहर है यो ढखी हुई है
00:49तो पानी साफ कैसे है
00:53प्रक्रत को प्रक्रत गंदा नहीं कर सकती
00:59यहाँ पर इस पानी के ग्लास को सच पूछा तो हवा से नहीं बचा रहे है आप स्वयम से बचा
01:07रहे हो
01:08क्या मैंने इस पानी को ऑक्सीजन से बचाने के लिए इस पर धकन रखा
01:14क्या मैंने प्रक्रति को प्रक्रति से बचाना चाहा है
01:18प्रक्रति माने H2O और प्रक्रति माने O2
01:22मैंने प्रक्रति को इनसान से बचाने के लिए इस पर धक्कन रखा
01:28इसमें ऑक्सीजन घुल जाए अच्छी बात है
01:32इसमें dust क्यों घुले, धुआ क्यों घुले, धूल क्यों घुले
01:37वो सब gases क्यों घुले जो प्राकृतिक रूप से हवा में होनी ही नहीं चाहिए
01:42और वो सब gases भी जो मनुष्य द्वारा उतसर्जित है
01:49ये बड़े गड़बड की बात है, और वो पानी में जब घुलती है
01:52तो उनसे एक अमली ये घुल तयार होता है, एक acidic solution
01:59लेकिन मनुष्य धुआ धूल भी फेकता है हवा में
02:03और न जाने कितनी तरह की worth gases भी
02:06इसलिए आपका जो पानी खुला रखते हो आप
02:08फिर थोड़ी देर में आप कहते हो रात भर का खुला पानी ये मत पी हो
02:12क्योंकि मनुष्य ने हवा को जो गंदा करा है
02:14कई वो गंदगी इसमें न पहुँच जाए
02:17तो आप प्रक्रति को प्रक्रति से नहीं बचा रहे आप प्रक्रति को अहंकार से बचा रहे हो