00:00अचार जी हमसे गल्थियां क्यों होती है, हम तो प्यॉर सोल है ना, यही बात तो गीता भी कहती है
00:06भगवत गीता कहीं भी सोल इत्यादे की कोई बात नहीं करती और प्यॉर सोल औगेरा यह कहां से ले आए
00:13आप क्या कर दिया मैं नहीं जानता
00:24गीता यूही कोई हवा में छोड़ दिया गया धुआ नहीं है
00:31हेज को भगवत गीता नहीं बोलते
00:34भगवत गीता क्या है, लेजर
00:38जो चीज जैसी है वैसी है, टू माने टू, टू पॉइंट जिरो जिरो जिरो वन भी टू नहीं होता
00:50यह सब कहां से आ गया, प्यूर सोल्स और यह सब कुछ
00:54यह जहां से भी आया है, मैं आपसे विनमरता से कह रहा हूँ
00:58बुरा मत मानियगा, भगवत गीता से नहीं आया है
01:01यह किसी के अपने आग्रहों से आया होगा
01:05बहुत तरह के कल्ट चले है, बहुत तरह के संप्रदाय बने है
01:11उनके अपने अपने अंधविश्वास रहे हैं
01:14और उन अंधविश्वासों को जायस्ठ हराने के लिए
01:17उन्होंने वेदान्त का उपनेशदों का गीता का सहारा ले लिया
01:24आवरण उढ़ लिया
01:25क्योंकि जब आप कहोगे यह तो मेरे छोटे से संप्रदाय का अंधविश्वास है
01:31तो लोग मानेंगे नहीं और इजट भी नहीं मिलेगी
01:34दूसरी और आप अपने ही अंधविश्वास को जब इस तरह से पेश करोगे
01:38कि यह जो मैं बोल रहा हूँ न यह तो
01:41गीता में लिखा हुआ है
01:42तो फिर उस बात को एक व्यापक स्विकारेता मिल जाती है
01:46लेकिन मैं फिर से आपसे कहना जाता हूँ
01:49इस तरह कि कोई बात भगवद गीता में कहीं नहीं है
01:52इसलिए छूटते मैंने आप से कूचा कि क्या आप गीता प्रतभागी है
01:55हमारा कोई गीता प्रतभागी है
01:57कभी नहीं कहने वाला कुछ हो जाए
01:58मर जाएगा पर कभी नहीं करेगा
02:00we are pure souls
02:02उल्टे हम जानते हैं हम क्या है
02:04गीता प्रतुभागी हाथ उठाएंगे
02:06हम क्या है
02:07क्या नाम है हमारा तुम कौन हो
02:10अरे नाम बताओ न यार अपना
02:12असली वाला
02:13जुन्नू
02:14ये अंतर होता है
02:17जवाब आते हो लोगधर्म की दिशासे
02:19और जवाब आते हो गीता प्रतुभागी बनके
02:21लोगधर्म वाला बोलेगा मैं तो pure soul हूँ
02:24फिर हाथ उठाएंगे हैं
02:25गीता प्रतुभागी फिर से
02:26आप कौन है अपना नाम बताइएगा
02:29धनिया
02:36अपने बारे में गलत फेहमी पालने से
02:39बड़ा दोश दूसर नहीं होता
02:41प्योर सोल बन गया