00:00अचारेशी, आप कहते हैं कि जोतिस का कोई विज्ञानिक सबूत नहीं है, इसलिए वो ठीक नहीं है, ऐसे तो अध्वेत
00:06विदान्त का भी कोई साइंटिफिक प्रूफ नहीं है, तो विज्ञानकी के सोटी पर सिर्फ जोतिस कोई क्यों परखा जा रहे
00:12हैं, आपके अपने द
00:13कार्शनिक दाओं को क्यों नहीं, प्रेम जैसा कुछ होता नहीं है, चली खारिश कर देते हैं, प्रेम खारिश कर दें,
00:22तो प्रेम का वैज्ञानिक सबूत लेकर आईए, प्रेम जैसा कुछ नहीं होता, अरे बाबा, दो अलग अलग आयाम हैं, दो
00:37बहुत अलग शेत्र हैं
00:38दो अलग कोटियां हैं, केटेगरीज हैं, इनको आपस में क्यों मिला रहे हो
00:45जियोतिश जो बोलता है, उसकी परक्ष विज्ञान को करनी पड़ेगी
00:51क्योंकि जियोतिश हौतिक दावे करता है
00:57मिटीरियल को ले करके कुछ बोलता है
01:00जगत को ले करके भविश्यवाणियां करता है
01:04और दावे रखता है
01:07और वो ख्षेतर किसका है?
01:10विज्ञान का, तो विज्ञान कहेगा अच्छा ठीक है तुम कह रहे हो
01:14कि शनी की फरानी अवस्था से
01:17मनुष्य पर ये प्रभाव पड़ेगा
01:19तो हम ना पे ले दे कि शनी से मनुष्य पर कितना पड़ता है
01:22वो ख्षेतर विज्ञान का है भई
01:24तो इसलिए जोतिश जो कुछ कह रहा है
01:27उसको विज्ञान की कसोटी पर रखना पड़ेगा
01:32और वेदान्त जो कह रहा है
01:34वो बात अहंकार के लिए है मात्र
01:36और अहंकार विज्ञान की परिभाशा से ही बाहर का है
01:45बुद्ध असी के लोगे हो और अंगुली माल भी असी के लोगा हो
01:49तोनों पर ग्रैविटेशनल पुल बराबर लगेगा
01:52क्योंकि विज्ञान को क्वालिटी ओफ से कोई मतलब नहीं है
01:55पास समझ में आ रही है
01:59विज्ञान सिर्फ मेटीरियल की बात करता है
02:01और ज्योतिश भी चूकि मेटीरियल की बात करता है
02:04तो इसलिए वो विज्ञान के दाएरे में आता है
02:07अज्वायत प्रेदान्स वो बात बोल रहा है जो विग्यान की परिभाशा के बाहर की है