00:00जिन्होंने जीवन में उत्कृष्टता नहीं देखी, उनके लिए चलना इसलिए ज़री है कि उत्कृष्टता देख लें, वो नहीं चलें, तो
00:09उन पर अभियोगी होगा कि ये, जीवन जिस हे तुम मिला था, वो तो तुमने पाया नहीं, तो तुम रुख
00:17कैसे गए, तो उन
00:29देखने को ज्यादातर लोग तरस्ते हैं, और उसको देखा तब जब तुम चल रहे थे, उसको चलते हुए ही देखा
00:38जा सकता है, उसको सिर्फ गती में ही पाया जा सकता है, उसके दर्शन ही गती में होते हैं सिर्फ,
00:46तुमने उसको देखा, जो औरों को दुरलब है, और उ
00:59सकते हो इनको तो पता ही नहीं किस से वंचित रह गए पर जिन्होंने पाया हो अगर वो पाने के
01:05बाद थम जाएं तो जीवन फिर कड़ा आरोप लगाता है वो आरोप अपने उपर मत लगने दीजिए आप आपने संघर्ष
01:14करा है और प्रतिकूल परिस्थिति में आप जहां �
01:18तक आये हैं वो बात अपने जीवन में तो रखिये ही औरों के जीवन में पहुंचाने का पूरा प्रयास करिये
01:24लिए लिए