00:10असानी से घुटने नहीं टेकने चाहिए जितनी बार परिस्थिती प्रतिकूल हो रही है उतनी बार समझलो आपको एक बडा मुका
00:18मिल रहा है जितनी बड़ी प्रतिकूल ता उतना बड़ा
00:21मौका और जितनी बार आप प्रतिकूल इस्थिति में अडिग रह जाते हो आपके भीतर कुछ बहुत ठोस सा निर्मित हो
00:29जाता है और अगली बार आप फिर और ज्यादा बड़ी परिस्थिति को जेल पाते हैं सामने मुश्किल खड़ी हो और
00:35मैं मुश्किल की बात कर रहा हू
00:36किसी सही लक्ष के संदर्व में सामने मुश्किल खड़ी हो मुस्कुराया करिये अगर ये मौका मिला है यही तो मौका
00:43है अपनी आंतरिक मास्पेशियां मजबूत करने का कोई बड़ी चुनोती ना हो मैं तो कहता हूँ उस समय पे हार
00:48मान लो उसको तो खेल समझ के छोड़
00:49पर जैसे ही सामने दुश्मन मजबूत लगे तब तो कभी भी हार मत मानो