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  • 7 minutes ago
यूक्रेन के ब‍िना ही उससे जुड़े मुद्दे पर मंथन करेंगे तीन ताकतवर देश, देखें कूटनीत‍ि

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00:04लबस्कार आप देख रहे हैं आज तक आपके साथ मैं हूँ सईद दंसारी स्वागत है आपका कूटनीती में
00:10सोचिए दुनिया के तीन सबसे शक्ति शाली नेता मिलकर अंतरराश्ट्रे राजनीती का भविश्यताई करने बैठें
00:18और जिस देश का मुद्ध सबसे बड़ा हो तो उसे मीटिंग में बुलाया ही ना जाए
00:22रूसी राश्वती पुतिन ने अगले महिने चीन में होने वाले एपिक एपी एसी शिगर सम्मिलन के दौराण
00:28टरम्प और शीज जिंग्पिन के साथ संभावित मुलाकात का प्रस्ताव रखा
00:33क्रेमलिन ने माना कि बाचीत में विचार जरूर आया था लेकिन अभी कोई अजंडा तैय नहीं
00:38तो क्या दुनिया के बड़े निर्णे अब भी अंतरराष्टे सम्मिलनों में ही होते हैं
00:43पिर असली सौदेबाजी तो बंध कमरों में तीन बड़े देशों के बीच सिमट कर रहे गई है
00:49कूटनीती में आज हम बात इसी पर करेंगे पोतिन, टरम्प और जिंग्पिंग के नए समीकरण पर
00:54यूकरेन के डर वैश्वित को उटनीती के बदलते तोर तरीकों पर
01:08सबसे बड़ा पेच यूकरेन को लेकर है
01:10रिबोर्ट्स के अनुसार पोतिन यूकरेन युद्ध को अपनी शर्टों पर खत्म करने के लिए बात करना चाहते हैं
01:15और इस बाचीत की मेज़ पर ना तो जेलिंस की होंगे और ना कोई यूरोपियन ने था
01:19मतलब जिस जमीन पर युद्ध लला जा रहा है उसका निनने वो तीन देश करेंगे
01:24जिन मेंसे कोई भी यूकरेन का प्रत्रदित्व नहीं करता
01:27यूकरेन के विदेश मंतरी ने चेतावनी दी बिना यूकरेन के बाचीत में शामिल हुए
01:33शान्ती लाने के बजाए पुतिन के होसले और बुलंद होंगे
01:36लेकिन सवाल ये भी है कि क्या पुतिन ट्रम्प और जिन्पिंग तीनों एक ही मेंस पर बैठ कर एक ही
01:42चीज़ चाहेंगे
01:43या चाहते हैं बिलकुल नहीं
01:45पुतिन को अपनी शर्टों पर यूकरेन युद्ध का अंत चाहिए
01:48ट्रम्प का ध्यान युकरेन सेदिक परमानों हत्यारों को कम करने और व्यापायर पर है
01:53जिन्पिंग अभी अपने पते नहीं खोल रहे हैं
01:57बतलब तीन नेता तीन अलग अलग प्रास्मिक ताहिए
01:59ये कोई तैय शुदा शान्ती समझाता नहीं
02:03बलकि इस बात की होड है कि बादचीत की दिश्शा तीनों में से कौन तैय करेगा
02:07लेकिन ये संभावित मुलाकात सर्फ युकरेन तक्सीमित नहीं
02:10ये इशारा करती है कि दुनिया अब बड़े बड़े अंतरराश्ट्री संगठनों से हट कर
02:15सीधे बड़े देश्ट्रों के बीच होने वाली बंद कमरे की बादचीत या सौदों की तरफ पड़ रही
02:22दोसरे विश्वीद के बाद युएन विश्वेफ़ार संगठन डबली टियो जी ट्वेंटी और नेटो जैसी संस्थाएं इसलिए बनी थी
02:29ताकि छोटे देशों को भी अपनी बात कहने का अधिकार मिले लेकिन जब बड़े बड़े देश अकेले बैठकर निर्णाय करने
02:36लगे तो छोटे देशों की शक्ती और कमजोर होते हैं
02:39यही डर यूरोप, जापान, दक्षनक कोरिया और हमारा देश भारत भी इसमें शामिल है भारत जैसे देशों को है
02:47यह अगर महाशक्तियां आपस में ही सब्ताय कर लेंगी तो हमारे पास उन निर्णायों को मानने के लावा और क्या
02:53बचेगा
02:55अगर यह बैठक हो जाती है तो हो सकता है कि युद्ध रोकने या परमानों हद्यारों पर कोई बाच्ची तागे
03:00बढ़ जाए
03:01लेकिन खत्रा इस बात का भी है कि अगर छोटे देशों के संप्रभुता को सौदेबाजी का जरिया बना लिया गया
03:07तो यह दुनिया के लिए खतरनाक परमपरा बन जाई
03:09अब देखना ये होगा कि क्या ये तीनों मिलते हैं जो निर्णे करते हैं उस पर हम तेयार होते हैं
03:17कुटनी ते मैं आज के लिए बस्त नहीं आप प्लीज अपना बहुत खैल रखेएगा देखते रखिए आज तरह
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