00:002014 की जीतने सिर्फ BJP को सत्ता तक नहीं पहुँचाया बलकि भारत्य चुनावी राजनीती का पूरा मॉडल बदल दिया
00:08बूथ मैंजमेंट, सोशल एंजिनेरिंग और माइक्रो प्लानिंग अब राजनीती के नए हथियार बन चुके थे
00:14लेकिन आमिच्छा की रणीती यहीं नहीं रुकी, इसके बात शुरू हुआ BJP के विस्तार का सबसे बड़ा भ्यान
00:20ऐसे राजे जहां कभी कमल का नाम सक कमजोर था, वहां भी पार्टी ने अपनी जमीन बनानी शुरू कर दी
00:27सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं था, सवाल था भार्टे राजनीती की नई इबारत लिखने का
00:3625 अक्टूबर 1964
00:42गुजरात का एक छोटा सा शहर मांसा
00:45एक साधरन व्यापारी परिवार में अमिच्छा का जन्म होता है
00:49ना कोई राजनीतिक विरासत, ना कोई बड़ा राजनीतिक सरनेम, लेकिन बचपन से ही एक आदत अलग थी, लोगों को देखना,
00:57समझना और याद रखना
01:01स्कूल के दिनों में अमिच्छा भीड का हिस्सा कम, भीड को समझने वाले छातर ज्यादा थे
01:08पंटी सेवन में यहां से स्कूल में से दिल्ली की टूर बनाई थी हमने, कुल 68 परसन थे, 60 स्टूडन
01:16थे, 8 टीचर्स थे, इसमें अमिध भी भी शाथ में थे, उस टाइम पे वो छोटे से छोटे बच्चे, यंग
01:22स्टूडन करीब 14-15 साल के ही थे, लेकिन कोडिनेट करने
01:27में सबसे बड़ी आ रहे थे हमारी साथ, इंद्रिय गांधी से मिले हम, तो इंद्रा जी गांधी जी गए, तो
01:32बैठने में सब का आगे थे, वो छोटे थे, तो इंद्रा जी के पास में बैठे थे, उनके बगल में
01:36बैठे थे, क्वेचन सासर भी ओने गुजराते में भी कि
01:39अमिल शाह को जानने वाले बताते हैं कि उन्हें शुरू से संगठन बनाना पसंद था, लोगों को चोड़ना, टीम बनाना
01:46और हर चीज को विवस्थित तरीके से चलाना
02:09उन सबको इघटा करके रात दो दो बजे तक सबको बुला के और प्रचार इतना उस टाइम इतनी सुविदा नहीं
02:17थी, वाट्सप नहीं था, सोशेल मीडिया नहीं था, तो उन्होंने उस टाइम पे पूरा ऐसा एक ऐसा एक चैन बनाया
02:2716 साल की उम्र में अमिक्षा RSS से जुड़ते हैं, RSS की शाखाओं में अनुशासन था, नेटवर्क था और राजनिती
02:35को समाज के जरिये समझने का तरीका था, और इसी दौरान गुजरात में 1980 के तशक की शुरुवात में नरेंद्र
02:43मोधी और अमिक्षा की मुलाकात होती ह
02:46एमदाबाद के कॉलेजिन युवाओं से बाक्षित करने का, तो उसकी तैयारी करने के लिए मैं जहां रहता था, वो वोड
02:54में आये थे, नानपुरा वोड में आये थे, बहुत कम युवा थे, और बहुत अच्छे तरीके से उन्होंने RSS का
03:03काम, RSS के बारे में वो उद्ये
03:15और अन्त में बता है कि अगर RSS को जानना है, तो इनको सुनना चाहिए, तो आप लोग जितने हो
03:22सके उतने युवाओं को लेकर कारेकर में आई, उसक में RSS का स्वेम्शक बन चुका था, परन्तु पहली बार संग
03:35के माध्यम से देश का युवा क्या कर सकता है, वो उन्हों
03:39अच्छे सटिक तरीके से बहुत कम समय में समझाया है।
04:09वाजपा में नरेंदर भाई की फेवर में जब महोल नहीं था, और यहां केशु भाई की सरकार थी, तब भी
04:17नरेंदर भाई के साथ गुजरात में जो चार-पांच लोगों ने शासक से बिना डरे संबंध बनाए रखे, उसमें से
04:27अमित भाई एक रहे है।
04:31अमित भाई के संकट के दिनों में भी अमित भाई ने कभी उनका साथ नहीं चोड़ा है।
04:40अमित शाह के लिए हर सीट अलग युद्ध, 1997 में अमित शाह पहली बार गुजरात विदानसवा पहुंचे।
04:48इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी जाजनितिक पकड़ मस्बूत की, फिर आता है साल 2001 और नरेंदर मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री
04:58वंते।
05:01और यही से मोदी शाह की जोड़ी पूरी ताकत से सामने आते हैं।
05:10अमित शाह, स्तरकार और संगठन दोनों में तेजी से प्रभावशाली होते जाते हैं।
05:15गुजरात की राजनिति में उनका नेटवर्क मस्बूत होता गया।
05:18सेहकारी संगस्थाओं से लेकर स्थानिय चुनावों तक शाह ने संगठन को मीचे तक फैलाने का काम किया।
05:252010 में राजनितिक विरोधी कहने लगे कि आमित शाह का करियर खत्म हो गया।
05:30लेकिन शायद यही से उनकी सबसे बड़ी वापसी शुरू होती है।
05:51अमित्षा ने खुद को सिर्फ गुजरात तक सिमित नहीं रखा।
05:54उन्होंने राष्टी राजनिति को पढ़ना शुरू किया।
05:57और बीजेपी के भीतर एक ऐसे रणितिकार के रूप में उभरे जो चुनावी गणित को जमीन पर बदल सकता था।
06:042013 लोगसवा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी एक मुश्किल सवाल से जूज रही थी।
06:10कैसे जीता जाए उत्तर प्रदेश।
06:12बीजेपी ने ये जिम्मेदारी अमित्षा को सौपी थी।
06:15सिर्फ कुछ महिनों का समय था अमित्षा के पास।
06:18और उन्होंने उत्तर प्रदेश को नेता की तरह नहीं, मैनेजर की तरह देखा।
06:22उन्होंने चुनावी राजनीती को माइक्रो मैनेजमेंट मॉर्डल में बदल दिया।
06:28अमित्षा की खुद की एक संगत्रनात्मक समरपन की भावना।
06:35और मुझे लग रहा है कि वो उनके फिलोसोफी के अध्यान से आई है।
06:41बहुत कम लोगों को पता है कि वो बड़े पाठक है।
06:46बहुत से किताबे पढ़ते हैं, आज भी पढ़ते हैं।
06:49जब पढ़ते हैं तो लगता है उनको कि इसमें से ये काम लेना चाहिए, ये प्रिरणा लेनी चाहिए।
06:57तो अच्छा पाठक जो हता है, रीडर, वो अच्छा राजनेता भी बन सकता है। उसका उदारण अमित भाई है।
07:072014 के जब नतीजे आये, तो बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में एतिहासिक जीत दर्च की और उसी दिन साफ हो
07:14गया।
07:14अमित शाह अब सिर्फ संगठन मंत्री नहीं रहे। वो भारती राजनीतिके सबसे बड़े चुनावी रणे टिकार बन चुके हैं।
07:21इसके बाद बीजेपी का विस्तार सिर्फ हिंदी बेल तक सिमित नहीं रहा।
07:26अमित शाह ने बीजेपी को सिर्फ चुनाव जीताने वाली पार्टी नहीं मनाया, बलकि लगातार चुनाव लड़ने वाली राजनीतिक मशीन में
07:33बदल दिया।
07:34आज भार्टी राजनीतिका हर तल भूत मेनेजमेंट की बात करता है।
07:52कर दो कर दो