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वीडियो जानकारी: 25.03.2026, AIIMS, रायपुर

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Transcript
00:00अचारे जी मैं अपने जीवन को सुंदर बनाना चाहती हूँ पर आदतों को बदलना बोखत मुश्किल होता है।
00:06सुंदर तो एक कसाई भी अपनी दुकान को बनाना चाहता है।
00:10वो भी कुछ दो-चार काम करता होगा।
00:13पर क्या वो वास्तविक सुंदर बरदाश्ट कर पाएगा।
00:17तो चाही तो यह कि वहाँ पर कतल है और खून है और मास है और कराह है और दुक
00:22है।
00:24और स्वार्थ के लिए दूसरे का शोशन है और चीरफाड है।
00:30एक सीमा के आगे अगर उसको जाना है, वास्तविक सुंदर अगर उसको लाना है, तो फिर तो उसे अपने आपको
00:40अपने काम को ही बदलना पड़ेगा।
00:43आप जैसे हैं वैसे रहते हुए जीवन को सुंदर बनाने का सपना छोड़ दीजिए।
00:50बिल्कुल छोड़ दीजिए। आप जैसे हैं वैसे ही रहते हुए ये अर्मान त्याग दीजिए कि जीवन सुंदर हो जाएगा।
01:01आपको ही बदलना पड़ेगा। अगला गियर लगाईए, उचे उठिये।
01:08सुंदर्ता एक बाहरी फैलाव में नहीं है कि मैंने इतनी चीज़ें ले आले।
01:12सुंदर्ता एक आरोहन है, एसेंशन है, वर्टिकल राइज है।
01:22मैं अब वो नहीं हूँ जो मैं पहले हुआ करती थी।
01:26शास्त्रीए तौर पर सुंदर्ता की परिभाशा जानती है क्या है।
01:31जो कुछ भी प्राकृतिक है, सब सुंदर है।
01:35और प्राकृतिक से अर्थ है नहीं कि बस जंगल पहाड न दी।
01:40प्राकृतिक से अर्थ है जिसमें अहंकार नहीं है।
01:43तो आप एक मशीन बनाए चाहे आप एक कविता लिखें वो भी प्राकृतिक हो सकती है अगर उसमें हंकार न
01:50हो
01:51जहां हंकार है कुरूपता बस वहीं है बाकी सब सुन्दर है

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