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اس ویڈیو میں ہم نوابشاہ کے تعلیمی اور تاریخی سفر کا جائزہ لیں گے، جہاں سرکاری و نجی جامعات اور دیگر تعلیمی ادارے خطے کی ترقی میں اہم کردار ادا کر رہے ہیں۔

اس کے ساتھ ساتھ گوجری یا قاسم کیریو کے تاریخی مقام پر ہونے والی آثارِ قدیمہ کی دریافتوں کا بھی ذکر کیا گیا ہے، جہاں قدیم تہذیبوں سے متعلق مٹی کے برتن، اینٹیں اور دیگر ثقافتی نوادرات دریافت ہوئے۔ ان آثار میں ہندوازم اور بدھ مت کے ادوار سے منسوب باقیات بھی تاریخی تحقیق کا اہم حصہ ہیں۔

یہ ویڈیو نوابشاہ کے جغرافیہ، تاریخ، تعلیم، قدیم تہذیبوں اور آثارِ قدیمہ کو ایک ساتھ سمجھنے کی کوشش ہے۔

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01:01यानि जिदीद तालीम और जहनों की आवियारी से.
01:04अगर हम आज के नवाब शाँ पर नजर दोड़ाएं तो ये आला तालीम का एक जबरदस गड़ बन चुका है.
01:09यहाँ बैचलर्स के पचपन और डिप्लोमा के ग्यारा प्रोग्राम्स तो हैं ही,
01:12लेकिन हैरे तंगे इस बात यह है कि मास्टर्स लेवल के 125 कोसिस करवा जा रहे हैं।
01:17यानि यहाँ का तालीमी रुजान सिर्फ बनियाद ये डिग्रियों तक महदूत नहीं बलके तहकीक और एडवांस टड़ीज पर कमाल का
01:22फोकस किया जा रहा है।
01:24और इस इल्मी इनकलाब में सबसे बड़ा हाथ पबलिक सेक्टर यानि सरकारी जामियाद का है।
01:54इस इलाके की आब होवा काफी सख्त और खुश्क है।
01:57यहां की गर्मिया लगबग साथ महीने तक चलती हैं और बारिशें बराए नामी होती है।
02:01मगर दिल्चस्प बात ये है कि इसी खुश्क और सख्त मौसम ने एक बहुत बड़ा काम किया है।
02:06उसने सदियों पुरानी तारीख को इस मिटी के अंदर बिलकुल महفوظ रखा है।
02:11इंतजामी लिहाद से भी सिलाके की तारीख बड़ी हंगामा खेज रही है।
02:141843 में चार्ल्ज नेपियर ने सिंद को तक्सीम किया।
02:18फिर 1912 में बरतानवी दोरे हुकूमत में नवाब शा को एक बाकाइदा जिले का दर्जा मिला।
02:23पाकिस्तान बनने के बाद 1954 में सांगरिस से अलग हुआ और फिर 1999 में नोशेरो फेरोज को भी सेलेदा कर
02:30दिया गया।
02:31यानि नक्षे पर लकीरें मसलसल बदलती रही है।
02:34अब हम अपने इस तज्जिय का रुख मूरते हैं उस जानिब जो वागई रॉंग टे खड़े कर देने वाला है
02:38यानि कदीम माजी की दरियाफ्ट खास्तोर पर कासिम कैरियो और गुजरी आर्कियोलोजिकल साइट।
02:45जहन में ये सवाल जरूर उबरता है कि इन शानदार कैंपिसेज और लहलाहाते खेतों के बिलकुल नीचे काई फुट गहराई
02:51में आखिर क्या चुपा है। कोई ऐसा राज जो सदियों से इनसानों की नजरों से ओजल था।
02:56इस हवाले से एक हालिया तहकीक सामने आई है जिसने सब को हैरान कर दिया है।
03:26कि ये महज मटी का धेर नहीं बलके पकी हुई और तराशी के इंटों से बना एक कदीम बुच्स दूपा
03:32है।
03:32और ये कोई सौदो सो साल पुराना नहीं बलके पहली सदी कबल मसी यानि फर्स सेंच्री बीसी का है।
03:38अब चलते हैं उन सुबोतों की तरफ जो इस मटी से बरामद हुएं यानि नवादरात का तज्जिया।
03:44यहां से मिलने वाले मटी के बर्तनों पर एक कमाल की तेकनिक इस्तमाल हुई है जिसे अपलिक डिजाइन कहते हैं।
03:50यह महस कोई सजावट नहीं थी।
03:51कदीम लोग बर्तन के उपर मटी की एक इजाफी तेह लगा देते थे।
03:54ताकि जब इसे आग पर रखा जाए तो वो शदीद गर्मी से चटक ना जाए।
03:58यह उन लोगों की शांदार अमली जहानत का मूँ बोलता सुबूत है कि वो अपने रोज मरा के मसाइल कैसे
04:03हल करते थे।
04:04इसी तना एक और डिजाइन जो यहां से मिला वो है चेकर डिजाइन।
04:08यह बर्तनों पर खाने या ग्रिट बनाने का एक अंदास है।
04:10बिल्कुल एक बसाद की तरह जिसमें एक खाना भरा हुआ और एक खाली होता है।
04:15यह सिर्फ एक नक्षो निगार नहीं है बलके एक ऐसा तारीखी निशान है जिसके ताने बाने मैसोपोटेमिया से लेकर वादिय
04:20सिंध की तहजीब तक जुड़े हुए।
04:21अगर हम इन नवादरात का मवाजना करें तो हमें एक तरफ वो एपलिक तहचड़े बरतन अज़र आते हैं जो किचन
04:27के सकत इस्तमाल के लिए बनाए गए थे और दूसरी तरफ वो बरतन हैं जिन पर नहायत नफासत से फूल
04:33और निशानात कुंदा किये गए हैं।
04:35ये फर्क हमें बताता है कि वो लोग सिर्फ जरूरत के तहत नहीं जीते थे बलके उनके अंदर एक जबरदस्ट
04:40जमालियाती हिस और हुनर भी मौजूद था।
05:05आईए अब इस पूरी कहानी को समीटते हैं और देखते हैं कि वक्त के आईने में ये शहर कैसे मुसलसल
05:11इर्तका के मराहिल तैय करता रहा है।
05:13ये तकाबल वाकि दंग कर देने वाला है। जरा तसफ़ूर करें।
05:16पहली सदी कबल मसी में ये जगा हिंदू और बुद्ध सकाफत, मजभी रसूमात और तिजारत का एक बड़ा मरकज थी।
05:22और आज 21 सदी 20 में ये वही खिताया जो जदीद आला तालीम और साइनसी तैकी के एक मतहरिक मरकज
05:28के तोर पर उभर रहा है।
05:30दो हजार साल से जादा का अरसा गुजर गया लेकिन नवाफशा में इनसानी तरक्की, इल्म और सीखने का अमल आज
05:36भी उसी तरह जारी हो सारी है।
05:38तो इस सब के बाद एक गहरा सवाल हमारे जैनों में रह जाता है।
05:41हमाज जिन जदीद और चमकते दमकते शहरों में बसते हैं।
05:44क्या पता उनकी सडकों और इमारतों के बिलकुल नीचे तारीकी में मजीद कितने ऐसे कदीम रास चुपे हों जो खोजे
05:50जाने के मुंतजर है।
05:51ये वाकिए एक ऐसा ख्याल है जो हमें सोचने पर मजबूर कर देता है।
05:54इस वज़ादी तेजिये में हमारे साथ जुड़े रहने का बहुत शक्रिया।

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