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ضلع سانگھڑ سندھ کا ایک ایسا خطہ ہے جہاں قدرتی حسن، قدیم تاریخ، ثقافتی روایات اور ترقیاتی سرگرمیاں ایک ساتھ نظر آتی ہیں۔

اس ویڈیو میں ہم ضلع سانگھڑ کے خوبصورت اور تاریخی مقامات کی سیر کریں گے، جہاں اچرو تھر (سفید صحرا) اپنی منفرد خوبصورتی کے باعث توجہ کا مرکز ہے، جبکہ بوطار جھیل اپنے کنول کے پھولوں اور دلکش قدرتی ماحول کے لیے مشہور ہے۔ اسی طرح چوٹیاری ڈیم کا پُرسکون منظر اور قدرتی حسن سیاحوں کو اپنی جانب متوجہ کرتا ہے۔

ویڈیو میں جام نواز علی اور کھپرو سمیت ضلع سانگھڑ کی اہم تحصیلوں، بہتر ہوتے سڑکوں کے بنیادی ڈھانچے، صدیوں پرانی تاریخی عمارات، قدیم قبرستانوں اور علاقے کی ثقافتی روایات کا بھی جائزہ لیا گیا ہے۔

سانگھڑ کے روایتی کھانوں میں مچھلی کی سجی ایک منفرد اور مقبول ذائقہ ہے، جو اس خطے کی مقامی ثقافت اور کھانے پینے کی روایت کی خوبصورت عکاسی کرتا ہے۔

📍 ضلع سانگھڑ — سندھ، پاکستان
🌵 اچرو تھر
🌸 بوطار جھیل
🌊 چوٹیاری ڈیم
🏛️ تاریخی عمارات اور قدیم قبرستان
🍽️ مچھلی کی سجی
🛣️ سڑکوں اور ترقیاتی منصوبوں کا جائزہ

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Transcript
00:10खुशाम दीद
00:10आज हम पाकिस्तान की एक ऐसे हिस्से का जाइजा लेने वाले हैं जो आम तोर पर दुनिया की नजरों से
00:16ओज़ल रहता है
00:16ये है जिला सांगः एक ऐसी अनोखी जगा जहां बिलकुल मुक्तलिफ मनाजर और तसदाद एक ही खिते में आकर आपस
00:24में मिल जाते हैं
00:25ऐसी कौन सी जगा हो सकती है जहां एक तरफ दूर दूर तक पहले सफैद सहरा हो
00:30दूसी तरफ जजीरों के बीचों बीच सदियों पुरानी अजीम हवीलियां खड़ी हो
00:34और साथ ही आग पर भुनी हुई लजीज तरीन रिवायती खुराग भी दस्तियाब हो
00:38सुनने में किसी तखयोलाती कहानी जैसा लगता है
00:41और यही चीज आगे आने वाले हकाइक के लिए एक जबरदस तजस्स पैदा करती है
00:46लेकिन ये कोई कहानी नहीं है
00:47जवाब है सिंद का जिला सांगहर
00:50ये इस बात का सबूत है कि किस तरह ये अकेला खिता सफर करने वालों के लिए
00:55हवास बाखता और तारीखी हैरानियों का एक मुकमल मजमुवा अपने अंदर समोई हुए है
00:59तो चलिए आज के इस सफर में हम इन चार एहम नुकात पर बात करते हैं
01:05पहला सांगहर की तरफ जाने वाले रस्ते
01:07दूसरा सहरा की हैरत अंगेज जीले
01:10तीसरा माजी की बाजगर्ष्ट
01:13और आखिर में यहां का एक लाजवाब पक्वान
01:16पहला हिस्सा दे रोड्स टू संगहर
01:19आईए देखते हैं कि इस आलाखे तक पहुंचने का रास्ता कैसा है
01:23माजी में यहां के रास्ते इतने खराब और तूट-फूट का शिकार थे
01:27कि लोग अपनी गाड़िया लाने से हिचके चाते थे
01:29लेकिन अब मनज़र बिलकुल बदल चुका है
01:31हालिया हुकूमती मनसूमों की बदौलत
01:34जिन में मुकामी सियास्तदान एमने शाजिया मरी की
01:36मनजूर करदा स्कीम्स भी शामिल है
01:38अब यहां चमचमाती और हमवार सडके बन चुकी है
01:41यहां सफर करना अब इंतहाई आसान और महफूज हो गया है
01:45और इन नई सडकों पर सफर करते वे जो मनजर बनता है न वो वाकी कमाल है
01:49इक खुशक सहरा की तरफ जाते हुए रास्ते में हेरत अंगीज तोर पर सरसब जरह ये लाके आते हैं
01:55कपास के खेट, गन्ने की लंबी फसलें और आम के वसी बागाद इस सफर को इंतहाई खुशकवार और ताजगी बख्ष
02:02बना देते हैं
02:03दूसरा हिस्सा लेक्स ओफ दे डेजर्ट
02:05आईए इन रास्तों से आगे निकल कर अच्छो थर के राजों से परदा उठाते हैं
02:10जब इन पोखता सडकों को छोड़कर रास्ता आच्छो थर की तरफ मुड़ता है तो एक नया तजस्स चनब लेता है
02:16इस सख्त और खुशक रेतीली जमीन के तीन से चार किलोमेटर कहराई में अगर क्या चुपा हो सकता है
02:22जहां पहुंचने के लिए मखसूस 4x4 जीबे बुक करनी परती है
02:26वहां चुपी है बोतर जील
02:27सफेद सहरा की बीचूं बीच मीठे पानी का ये चश्मा किसी हैरान कुन मौजज़े से कम नहीं
02:33जो 7 किलोमेटर लंबा और 1.5 किलोमेटर चौड़ा है
02:36एक ऐसी जील जो फूलते हुए कमल के फूलों से लदी हुई हो
02:41उसका तसवूरी कितना दिलकश है
02:43सर्दियों के मौसम में चलने वाली थंडी हवा
02:45और यहां हिज़त करके आने वाले परिंदों का वसी मनजर
02:49इस जगा को एक मुकमल जन्नत का रूप दे देता है
02:52दिलचस्प बात ये है कि ये जील अकेली नहीं है
02:55बलकि ग्रेटर थर नैशनल पार्क के आबी निजाम का एहम हिस्सा है
02:58होतासल में ये है कि चोटियारी डैम
03:01जमराओ के नाल से आने वाले सेलाबी पानी को जमा करता है
03:04जो बाद में फैल कर मुक्तलिफ मौसमी जीलों का एक वसी नेटवर्क बनाता है
03:08इसी निजाम में माखी रिवर भी शामिल है
03:10जिसका नाम यहां कसरत से पाए जाने वाली शेहत की मक्यों की वज़ा से बढ़ा है
03:14है ना है रात अंगेज
03:18अब रुख करते हैं सांगर की गहराई में छुपी कदीन तारीख की तरफ
03:22यहां कुदरती मनाजर के साथ साथ कदीन तारीख का एक मुकमल खाकावी सामने आता है
03:28कुबा मीर्स शादाद के कबरिस्तान में 1693 में बनने वाला मिया नासर मुहमद मीर फताली का मकबरा हो
03:34या 1734 का मिया नासर मुहमद मीर शादाद का मकबरा
03:38इसके इलावा 19 सेंचरी के तालपूर मीर्स की कबरें भी यहां मौजूद है
03:42इन कबरों पर पत्थर की बारीक तराशी और फ्रेसको की रंगीन नकाशी उस दौर के अजीम फन का बहतरी नमुना
03:50है।
03:51फिर आता है 1936, ये वो साल था जब यहां मौजूद अजीम हवेलियां वीरान हो गई।
03:56इन ही वीरान हवेलियों को मकामी जबान में मारिस कहा जाता है।
04:00चोटियारी डैम के जजीरों पर जुनेजो बरादरान की बनबाई हुई ये तीन मंजिला हवेलियां अपने अंदर एक अचीब सी इसरारियत
04:07रखती हैं।
04:08इनकी सबसे बड़ी खासियत इनकी तीन से चार फुट मोटी मिटी और गारे की दीवारें थी जो मौसमी शिदत को
04:15रोकती थी।
04:16जब जदीद सड़के नहीं थी तो शाम के वक्त इनी जील के किनारों पर महफिले सचती थी।
04:21अब खंडरात होने के बावजूद इनका जादू काइम है।
04:24चौथा और आखरी हिस्सा, A Culinary Masterpiece
04:28आईए चक्कर देखते हैं यहां का एक अजीम पकवान।
04:32जैसी सांगर शहर में शाम ढलती है, एक मशूर मकामी पकवान तयार किया जाता है।
04:37पूरे दो घंटे लगते हैं इसमें, ये वक्त असल में उस सबर और लगन को जाहर करता है जो इस
04:43डिश की बुनियाद है।
04:44सर्दियों की ठंडी रात हो, सामने कुंडी हुई आग जल रही हो और आहिस्ता आहिस्ता भुनती हुई एक वस्यो अरीज
04:50मचली, क्या ही मनजर बनता है।
04:53ये अब्दल जबार मला के स्टॉल का माहौल है, जहां स्लो रोस्टिंग का ये बेमिसाल तरीका अपनाया जाता है।
04:59इस मुन्फरज सजी को बनाने के मराहिल इंतहाई दिलचस्प हैं।
05:02पहला कदम नर्म और ताजा मीठे पानी की रोहु मचली का इंतखाब किया जाता है।
05:07दूसरा कदम इस पर मुकामी खुश्क मसाले जैसे धनिया, जीरा और काली मिर्च लगाए जाते हैं।
05:13यहां सबसे वाज़ और हिरान कुन बात यह है कि इसमें तेल या पानी का इस्तमाल बिल्कुल सिफर है।
05:18तीसरा कदम मचली को लकडी की सीखों पर लगाकर आग के इर्दकिर्द आहिस्ता आहिस्ता भुनना।
05:23नतीजे में जो बगेर तेल का नरम पकवान मिलता है, उसकी क्रीमा तकरीबन साड़ी चार डॉलर फी किलो होती है,
05:29जिसे एक फर्द बासानी शौक से खा सकता है।
05:32इस लाजवाब जाइके के बारे में खुद अब्दुर जबार मला का कहना है कि अल्ला ने हमारे हाथों में जाइका
05:38रखा है, लोग इसे खाते हैं और बार बार वापस आते हैं, इन्होंने ये अनोखा हुनर अपने उस्तादों से सीखा
05:44था।
05:45इनकी सज्जी की शहरत का अंदाजा इस बात से बखुबी लगाया जा सकता है कि मकामी रुहानी पेशवाओं से लेकर
05:50आज के दौर के अजीम ट्रावल व्लॉगर्स तक हर कोई इस दुकान का रुख जरूर करता है।
06:15पहतरीन इम्तजाज मौजूद है। इस जाइजे से ये सबक मिलता है कि आम रास्तों से हटकर जो मंजले होती हैं
06:20वो हमेशा नई तजरुबात से भरी होती है। तो जब भी अगली बार सफर का इरादा बने ऐसे छुपे हुए
06:26खजानों को खोजना एक यादकार तच्वब
06:28साबित हो सकता है।

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