00:09अरणाचल प्रदेश के पास इघाट की सड़कों पर इस वक्ट सन्नाटा है लेकिन ये सन्नाटा किसी शांती का नहीं बल्कि
00:15उस तुफान के बाद का है जो पिछले कुछ दिनों में वहां फूटा था
00:19हाला तो काबू में रखने के लिए 163 लागू है जगा जगा सुरक्षा बलतैनाथ है और जिला प्रशासन कह रहा
00:27है कि स्तिती नियंतरण में है लेकिन इस खामोशी के पीछे सुलग रहा है एक ऐसा गुस्सा जो भारत के
00:34सबसे बड़े और महत्रोकांशी प्रोजेक्ट्स में
00:37से एक को हिला कर रख रहा है क्या है यह पूरा मामला क्यों अरुनाचल की पहाड़ियों और नदियों के
00:43बीच अचानक हिंसा बड़ा कुपी क्या है वो 11,200 मेगा वाट का मेगा डाम प्रोजेक्ट्स जिसके खिलाफ लोग सड़कों
00:53पर उतराएं और क्यों नहच्पीसी का 11
00:57करोड रुपे का वो पी आर कैम्पेइन फेल होता नजरा रहा है जो स्थानिय समर्थन जुटाने के लिए चलाया गया
01:06था आईए कहानी की शुरवात से शुरू करते हैं सबसे पहले बात करते हैं उस प्रोजेक्ट की जिसके एर्द गिर्द
01:12ये पूरा विवाद भूम रहा
01:13है इस प्रोजेक्ट का नाम है सियांग अपर मल्टी पॉर्पोस प्रोजेक्ट यानि SUMP इसे बना रही है नाशनल हाइड्रो एलेक्ट्रिक
01:22पावर कॉपरेशन यानि NHPC Limited और ये कोई छोटा मोटा प्रोजेक्ट नहीं है बलकि 11,200 मेगावाट की शमता वाला
01:30एक विशाल हा�
01:36सियांग नदी पर बनाने की योजना है अब ज़रा इस नदी के भुगोल को समझीए सियांग नदी वही है जिसे
01:43तिवित में यालूम संको कहा जाता है ये नदी तिवित से बहती हुई अरुनाचल प्रदेश में प्रवेश करती है और
01:51फिर असाम में जाकर इसे भ्रम्मा प
02:05तोर पर बहुत गंभीर है इसके पीछे एक बहुत बड़ी वज्जा चीन भी चीन तिवित के मिदोग इलाके में ब्रह्मपुत्र
02:13यानि यालूंग सांकों पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बना रहा है चायना के इस कदम से भारत
02:21की चिंताए
02:22बढ़ गई की भविश्य में वो पानी को रोख सकता है या मोड सकता है ऐसे में भारत का ये
02:28सियांग अपर प्रोजेक्ट एक तरहां का काउंटर मेजर है सरकार का तर्क है कि इस मेगा डाम के जरिए भारत
02:35डाउन्स्ट्रीम में पानी की उपलबता को सुरक्षित रख सकेग
02:39बाड पर काबू पा सकेगा और चीन के उपरी प्रोजेक्ट के रणरात्मक असर को बैलन्स कर पाएगा लेकिन यह कहानी
02:47का सिरफ एक पहलू है दूसरा पहलू वो है जो जमीन पर पहाडों के बीच बसने वाली लोगों की आखों
02:54से दिखा जा रहा है सवाल ये है कि जब सर
03:01आनिये लोग इसके खिलाफ सडकों पर उतर आए हैं और वो इसका विरोध कर रही है रेकिन दर्शकों क्यों इस
03:08विरोध ने देखते ही देखते इतना वाइलिंट रूप ले लिया इसके पीछे कई गहरी और जायज वज़ा है सबसे पहली
03:15और सबसे बड़ी वज़ा है वि
03:31सियांग या मान सियांग के रूप में पूझते हैं उनका मानना है कि ये विशाल जलशाय उनके दरजनों गाओं पुस्टैनी
03:39जमीन खेती बाड़ी और एतिहासिक बस्तियों को हमेशा के लिए पानी में डुबो देगा दूसरा बड़ा डर है आजीविका और
03:47सांस्कृतिक
03:48पहचान का नुकसान जो लोग अपनी जमीन अपनी खेती अपनी पारंप्रिक मचली पकड़ने के तरीकों और अपनी संस्कृति से गहराई
03:56से जुड़े हैं उनके लिए इस जमीन से उखाड़ फे के जाने का मतलब अपनी पूरी पहचान खो देना है
04:02पीसरी और सबसे दर्
04:16क्विक प्रोन माना जाता है वेग्यानिकों और स्थानिये लोगों दोनों की ये गंभीर चंता है कि इतने बड़े पहमाने पर
04:24पानी का भंडारन और निर्मान इस नाजुक एकोसिस्टम को हमेशा के लिए तबाह कर सकता है और अगर कभी भुकम
04:31जैसी प्राकृतिक आपद
04:43है कि NHPC और प्रशासन ने बिना उनकी रजामंदी के बिना किसी पारदर्शी बातचीत के चुप चाप प्रीफीजिबिलिटी सर्वे और
04:54ड्रिलिंग का काम आगे बढ़ाना शुरू कर दिया लोगों का कहना है कि उनकी अवाज सुने बिना उन पर फैसला
05:01थोपा जा रहा है
05:02यही वज़े है कि धीरे धीरे यह संतोष एक बड़े बवंडर में बदल गया है।
05:32पोल्ड और अगजानी शुरू कर दी रिपोच के मुदाबित प्रदर्शनकारियों ने नच्पीसी के दफ्तर को निशाना बनाया एक पुलिस स्टेशन
05:39पर हमला किया और यहां तक की राजनीतिक निताओं जैसे राज्य के बीजेपी अध्यक्ष करलूंग मोयांग और वि
05:59प्रजनिक सबाहों पर रोक लगा दी गई, कई कारेकरताओं को हिरासत में लिया गया और स्थिती को संभालने के लिए
06:05रापिड आक्षन पोर्स यानि आरेफ के जवानों को तैनात करना पड़ा।
06:09दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पेमा खंदू ने लोगों से शांती बनाए रखने की अपील की हैं और साफ किया है कि
06:17सरकार जनता की हर शिकायत पर खुले मन से बातचीत करने के लिए तयार हैं लेकिन इस पूरे घटना करम
06:23के बीच कॉपरेट और सरकारी तंत्र की एक और ब
06:39चौकाने वाली बाती है कि ऐसा तब हो रहा है जब NHPC ने स्थानी इस तर पर लोगों का समर्थन
06:46जुटाने के लिए प्रो पीपल CSR आक्टिविटीज यानि समाजिक कल्यान के कामों पर जोर दिया था और इसके लिए एक
06:55पब्लिक रिलेशन्ज यानि पी आर एजंसी तक को
07:08दिल चीतना था जमीनी हकीकत के सामने लेकिन ये सब कुछ पुरी तरह फेल हो चुका है लोग समझ चुके
07:15हैं कि करोणों के विज्ञापनों और पियार अभियानों से उनकी जमीनों और उनकी मासियां को बचाने का खत्रा कम नहीं
07:23हो जाता आज स्थिती ये है कि एक तरफ �
07:26की राष्ट्रे सुरक्षा रनरात्मक जरूरतें और चीन के बढ़ते प्रभाव का दबाव हैं तो दूसरी तरफ अपनी जल जंगल जमीन
07:35और अस्मिता को बचाने के लिए सडकों पर उत्रा हुआ आधी समुदाई है प्रशासन भले ही दावा कर रहा है
07:42कि स्थिती नियंत्
07:54सियान डाम के स्ववाद ने एक बार फिर विकास बनाम दिनाश और राश्रे हिद बनाम स्थानी अधिकारों की उस पुरानी
08:01बहस को सबसे बड़े पहमाने पर लाकर खड़ा कर दिया है जिसका जवाब ढूनना सरकार और नीती निर्मा तो दोनों
08:08के लिए सबसे बड़ी च
08:25Download the OneIndia app now