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ARUNACHAL में चीन के लगातार बढ़ते रणनीतिक दबाव और तिब्बत में बन रहे मेगा-डैम प्रोजेक्ट्स के जवाब में भारत सरकार द्वारा अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के सियांग अपर बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट यानी SUMP को लेकर इस समय पूर्वी सियांग और ऊपरी सियांग जिलों में भारी तनाव और हिंसा का माहौल बना हुआ है जहाँ प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 163 लागू कर दी है जबकि आदि समुदाय के लोग अपनी पूज्यनीय नदी 'अने सियांग', पुश्तैनी जमीनों, जंगलों और पर्यावरण को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं और उनका यह प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है क्योंकि उनका मानना है कि यह विशाल जलप्रपात उनके गांवों और संस्कृति को हमेशा के लिए डुबो देगा और दूसरी तरफ एनएचपीसी लिमिटेड द्वारा स्थानीय समर्थन जुटाने के लिए चलाई गई 11 करोड़ रुपये की पीआर रणनीति और सीएसआर गतिविधियां भी जनता के इस भारी विरोध के आगे पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय आदिवासियों के अधिकारों के बीच का यह संघर्ष अब एक गंभीर राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया है।


The proposed 11,200-MW Siang Upper Multipurpose Project in Arunachal Pradesh has triggered massive violent protests and severe social unrest as indigenous Adi communities fiercely oppose the mega-dam to protect their sacred Ane Siang river, ancestral lands, and fragile Himalayan ecosystem from permanent submergence. While the Indian central government pitches this massive water-storage dam as a vital strategic countermeasure against China’s aggressive upstream hydropower developments in Tibet, local residents have taken to the streets alleging a complete lack of transparent dialogue and consultation before the pre-feasibility surveys. The situation escalated dramatically with 12-hour bandhs, arson, and attacks on NHPC offices and local political leaders' residences, prompting authorities to deploy the Rapid Action Force and impose Section 163 restrictions across Pasighat and surrounding districts. Meanwhile, NHPC's heavy Rs 11-crore public relations push and pro-people CSR activities have miserably failed to win local trust, highlighting a deepening crisis where national security priorities collide head-on with local displacement fears and indigenous rights.

#SiangDam #ArunachalPradesh #NHPC #SiangUpperMultipurposeProject #ChinaHydropower #NorthEastIndia #AdiCommunity #IndiaChinaBorder

~HT.178~PR.512~ED.104~GR.506~VG.HM~

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00:09अरणाचल प्रदेश के पास इघाट की सड़कों पर इस वक्ट सन्नाटा है लेकिन ये सन्नाटा किसी शांती का नहीं बल्कि
00:15उस तुफान के बाद का है जो पिछले कुछ दिनों में वहां फूटा था
00:19हाला तो काबू में रखने के लिए 163 लागू है जगा जगा सुरक्षा बलतैनाथ है और जिला प्रशासन कह रहा
00:27है कि स्तिती नियंतरण में है लेकिन इस खामोशी के पीछे सुलग रहा है एक ऐसा गुस्सा जो भारत के
00:34सबसे बड़े और महत्रोकांशी प्रोजेक्ट्स में
00:37से एक को हिला कर रख रहा है क्या है यह पूरा मामला क्यों अरुनाचल की पहाड़ियों और नदियों के
00:43बीच अचानक हिंसा बड़ा कुपी क्या है वो 11,200 मेगा वाट का मेगा डाम प्रोजेक्ट्स जिसके खिलाफ लोग सड़कों
00:53पर उतराएं और क्यों नहच्पीसी का 11
00:57करोड रुपे का वो पी आर कैम्पेइन फेल होता नजरा रहा है जो स्थानिय समर्थन जुटाने के लिए चलाया गया
01:06था आईए कहानी की शुरवात से शुरू करते हैं सबसे पहले बात करते हैं उस प्रोजेक्ट की जिसके एर्द गिर्द
01:12ये पूरा विवाद भूम रहा
01:13है इस प्रोजेक्ट का नाम है सियांग अपर मल्टी पॉर्पोस प्रोजेक्ट यानि SUMP इसे बना रही है नाशनल हाइड्रो एलेक्ट्रिक
01:22पावर कॉपरेशन यानि NHPC Limited और ये कोई छोटा मोटा प्रोजेक्ट नहीं है बलकि 11,200 मेगावाट की शमता वाला
01:30एक विशाल हा�
01:36सियांग नदी पर बनाने की योजना है अब ज़रा इस नदी के भुगोल को समझीए सियांग नदी वही है जिसे
01:43तिवित में यालूम संको कहा जाता है ये नदी तिवित से बहती हुई अरुनाचल प्रदेश में प्रवेश करती है और
01:51फिर असाम में जाकर इसे भ्रम्मा प
02:05तोर पर बहुत गंभीर है इसके पीछे एक बहुत बड़ी वज्जा चीन भी चीन तिवित के मिदोग इलाके में ब्रह्मपुत्र
02:13यानि यालूंग सांकों पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बना रहा है चायना के इस कदम से भारत
02:21की चिंताए
02:22बढ़ गई की भविश्य में वो पानी को रोख सकता है या मोड सकता है ऐसे में भारत का ये
02:28सियांग अपर प्रोजेक्ट एक तरहां का काउंटर मेजर है सरकार का तर्क है कि इस मेगा डाम के जरिए भारत
02:35डाउन्स्ट्रीम में पानी की उपलबता को सुरक्षित रख सकेग
02:39बाड पर काबू पा सकेगा और चीन के उपरी प्रोजेक्ट के रणरात्मक असर को बैलन्स कर पाएगा लेकिन यह कहानी
02:47का सिरफ एक पहलू है दूसरा पहलू वो है जो जमीन पर पहाडों के बीच बसने वाली लोगों की आखों
02:54से दिखा जा रहा है सवाल ये है कि जब सर
03:01आनिये लोग इसके खिलाफ सडकों पर उतर आए हैं और वो इसका विरोध कर रही है रेकिन दर्शकों क्यों इस
03:08विरोध ने देखते ही देखते इतना वाइलिंट रूप ले लिया इसके पीछे कई गहरी और जायज वज़ा है सबसे पहली
03:15और सबसे बड़ी वज़ा है वि
03:31सियांग या मान सियांग के रूप में पूझते हैं उनका मानना है कि ये विशाल जलशाय उनके दरजनों गाओं पुस्टैनी
03:39जमीन खेती बाड़ी और एतिहासिक बस्तियों को हमेशा के लिए पानी में डुबो देगा दूसरा बड़ा डर है आजीविका और
03:47सांस्कृतिक
03:48पहचान का नुकसान जो लोग अपनी जमीन अपनी खेती अपनी पारंप्रिक मचली पकड़ने के तरीकों और अपनी संस्कृति से गहराई
03:56से जुड़े हैं उनके लिए इस जमीन से उखाड़ फे के जाने का मतलब अपनी पूरी पहचान खो देना है
04:02पीसरी और सबसे दर्
04:16क्विक प्रोन माना जाता है वेग्यानिकों और स्थानिये लोगों दोनों की ये गंभीर चंता है कि इतने बड़े पहमाने पर
04:24पानी का भंडारन और निर्मान इस नाजुक एकोसिस्टम को हमेशा के लिए तबाह कर सकता है और अगर कभी भुकम
04:31जैसी प्राकृतिक आपद
04:43है कि NHPC और प्रशासन ने बिना उनकी रजामंदी के बिना किसी पारदर्शी बातचीत के चुप चाप प्रीफीजिबिलिटी सर्वे और
04:54ड्रिलिंग का काम आगे बढ़ाना शुरू कर दिया लोगों का कहना है कि उनकी अवाज सुने बिना उन पर फैसला
05:01थोपा जा रहा है
05:02यही वज़े है कि धीरे धीरे यह संतोष एक बड़े बवंडर में बदल गया है।
05:32पोल्ड और अगजानी शुरू कर दी रिपोच के मुदाबित प्रदर्शनकारियों ने नच्पीसी के दफ्तर को निशाना बनाया एक पुलिस स्टेशन
05:39पर हमला किया और यहां तक की राजनीतिक निताओं जैसे राज्य के बीजेपी अध्यक्ष करलूंग मोयांग और वि
05:59प्रजनिक सबाहों पर रोक लगा दी गई, कई कारेकरताओं को हिरासत में लिया गया और स्थिती को संभालने के लिए
06:05रापिड आक्षन पोर्स यानि आरेफ के जवानों को तैनात करना पड़ा।
06:09दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पेमा खंदू ने लोगों से शांती बनाए रखने की अपील की हैं और साफ किया है कि
06:17सरकार जनता की हर शिकायत पर खुले मन से बातचीत करने के लिए तयार हैं लेकिन इस पूरे घटना करम
06:23के बीच कॉपरेट और सरकारी तंत्र की एक और ब
06:39चौकाने वाली बाती है कि ऐसा तब हो रहा है जब NHPC ने स्थानी इस तर पर लोगों का समर्थन
06:46जुटाने के लिए प्रो पीपल CSR आक्टिविटीज यानि समाजिक कल्यान के कामों पर जोर दिया था और इसके लिए एक
06:55पब्लिक रिलेशन्ज यानि पी आर एजंसी तक को
07:08दिल चीतना था जमीनी हकीकत के सामने लेकिन ये सब कुछ पुरी तरह फेल हो चुका है लोग समझ चुके
07:15हैं कि करोणों के विज्ञापनों और पियार अभियानों से उनकी जमीनों और उनकी मासियां को बचाने का खत्रा कम नहीं
07:23हो जाता आज स्थिती ये है कि एक तरफ �
07:26की राष्ट्रे सुरक्षा रनरात्मक जरूरतें और चीन के बढ़ते प्रभाव का दबाव हैं तो दूसरी तरफ अपनी जल जंगल जमीन
07:35और अस्मिता को बचाने के लिए सडकों पर उत्रा हुआ आधी समुदाई है प्रशासन भले ही दावा कर रहा है
07:42कि स्थिती नियंत्
07:54सियान डाम के स्ववाद ने एक बार फिर विकास बनाम दिनाश और राश्रे हिद बनाम स्थानी अधिकारों की उस पुरानी
08:01बहस को सबसे बड़े पहमाने पर लाकर खड़ा कर दिया है जिसका जवाब ढूनना सरकार और नीती निर्मा तो दोनों
08:08के लिए सबसे बड़ी च
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