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  • 6 minutes ago
इजराइल के संसदीय चुनाव का नतीजा स्पष्ट नहीं रहा है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला दक्षिणपंथी गुट (लिकुड के नेतृत्व में) सबसे बड़ा राजनीतिक समूह बनकर उभरा है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से पीछे रह गया है. अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के अच्छे प्रदर्शन ने राजनीतिक समीकरण को और उलझा दिया है. इससे देश की सत्ता किसके हाथ में होगी, यह तय करने में उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है.  चुनाव प्रचार के दौरान, यहूदी विपक्ष के कई नेताओं ने अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करने का विरोध किया था, जबकि नेतन्याहू ने भी उनके समर्थन पर निर्भर रहने से इनकार कर दिया है. जॉइंट लिस्ट जो इजराइल में अरब-बहुसंख्यक राजनीतिक दलों का एक गठबंधन है, 2015 के चुनाव से पहले हदाश, बलाद, राआम और ताल ने मिलकर बनाया था. इसके बावजूद, इस गठबंधन ने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने में मदद करने की इच्छा जताई है. इससे आइसेनकोट पर यह तय करने का दबाव बढ़ गया है कि क्या उन्हें उन पार्टियों के साथ बातचीत करनी चाहिए, जिनकी राष्ट्रीय पहचान और फिलिस्तीनी मुद्दे पर उनसे बिल्कुल अलग राय है.

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00:03इस्राइल के संसदिया चुनाव में किसी को स्पष्ट पहुमत नहीं मिला है।
00:51अगर वो बहुमत साबित करने में नाकाम रहते हैं तो फिर दूसरे गटबंधन या पार्टी के नेता को सरकार बनाने
00:59के लिए आमंत्रित करेंगे।
01:00अमंत्रित किया जाएगा। उन्हें भी अपना बहुमत साबित करना होगा। तब तक नेतनी आहूं कारेवाहक प्रधान मंत्री बने रहेंगे।
01:06और अगले साल की शुरुआत में फिर से चुनाव हो सकते हैं।
01:10जब तक कोई एक पार्टी या गटबंधन बहुमत साबित नहीं कर देता तब तक एक कारेवाहक सरकार बनी रहेगी।
01:17चुनावों में अरब समुदाय की बड़ी भागिदारी की वजह से अरब पार्टिया एक बहतर स्थिती में है।
01:24हाला कि इसराइल की कोई भी पार्टी अरब समुदाय के पूर्ण समर्थन और भागिदारी के साथ सरकार नहीं बनाना चाहेगी।
01:33Bureau Report, ETV Bharat
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