00:00और यह सुनाया के लोगतन तो बचाओ की मुझे रैलियां कर रहे हैं
00:03जहां भी इनके जो राष्टी अध्रक्ष हैं वो सुनाया भो तक पहुंच गए 100-200 लोगों के साथ
00:10उसको रैली करनी चाहिए हमें बचाओ
00:14देश बचाओ की काई को रैली करते हैं लोगतन से बचाओ की काई के रैली करते हैं
00:18इसी इलेक्टरियल बांड की वजए से बीजेपी के पास 6,000 करोट पर नीचे हैं
00:25जिस तरह से कल का हमने जनसलाब देखा रानमी लाग्राउंड में और उसके इर्द गर्द
00:36आँखों देखी बात है क्योंकर मैं तो मैं तो वहां बैठा था और मैं जा रहा था बस में जा
00:40रहा था
00:44और लगबग एक और धेर घंटा धेर गंटा का हमें लगा रामनी लाग्राउंड पॉंचने में
00:50और
00:51जैसे ही हम वहाँ पहूंचे
00:53तो वहां बेरिकेड लगे लुए थे
00:56इस लिए लगे लुए थे
00:57कि चपपा चपपा
00:59जमीन लोगों से भरी हुई थी
01:01हम आगे नहीं बड़ पा रहे थे
01:03और पुलिस ने
01:04ये कहा कि साफ जैसे ही हम बैरिकेड
01:06खोलोंगे खोलेंगे तो ये क्योंके रामलीला ग्राउंड तो पूरी भर ही हुई थी जैसे ही खोलेंगे सारा जन सलाब उदर
01:14चले जाएगा तो सेक्यूरिटी का क्या होगा तो वहां बीस मिनिट हमने रुकना पड़ा ये पुलीस को बताने के लिए
01:23कि हमें तो जाना ही है न
01:24तो रैली होई नहीं पाएगी तो बड़ी मुश्किल के साथ और मतलब के लोगों लोग भी समझ गए कि हमें
01:39नहीं अंदर जाना चाहिए पहली बार तो ये लाखों की तरदात में लोग ते मेरे मेरा जो अनुमान अपना है
01:47वो लगबग 5-6 लाख लोग क्यूंके पार्क ज
01:54जो भी रास्ते हैं सब भरे हुए थे कोई मुझे खाली देखे नहीं रहा थे हम तो खड़े भी रहे
02:02थे तो पहली बात तो ये उनको थोड़ा फिकर लग रहा है और ये सुनाया कि लोग तन तो बचाओ
02:12कि कुछ रैलियां कर रहे हैं जहां भी इनके जो राष्टी अत्रक्
02:21अपना प्रदर्शन इसको रैली करनी चाहिए हमें बचाओ देश बचाओ कि काहे को रैली करते हो लोग तन बचाओ कि
02:28काहे के रैली करते हो हमें बचाओ किसी तरीके से चलिए एक बात दूसरी बात जो इससे भी महत पूर्ण
02:40है अगर छे लाख लोग एक जगा एक खटा हो
02:44जाएं और शांती पूर्ण एक हो जाए सभा रहली शांती पूर्ण कोई हिंसा का वाक्य नहों तो ये से साफ
03:02जाहर है कि हिंदुस्तान में जो जनता है वो विरोत तो करेगी लेकिन शांती पूर्ण तरीके से
03:11और इससे ये सवाल उठता है कि जब जनतर मंतर में पहली बार प्रोटेस्ट हुई तो हिंसा किसने करवाई
03:23अगर छे लाख लोग पुलीस तानात है कोई एक वाक्य हिंसा का नहीं हुआ
03:33तो फिर जनतर मंतर में हिंसा क्यों हुई क्यों कि वहाँ भी जो हमारे युवा लोग थे वो तिशांती पूर्ण
03:42अंचन कर रहे थे विरोत कर रहे थे
03:47और द्रमेंदर प्रणान का स्टीफा माग रहे थे और मैं सरकार को चाहूंगा कि पता करें कि किन लोगों ने
03:56हिंसा की
03:57क्यों कि मुल्म मालूम है कि उनको मालूम है कि किसने की और पता नहीं करेंगे
04:07ट्रक कौन लाया जिसमें पत्थर बढ़े हुए थे कौन लोग थे को बिना वर्दी के यहां बैठके खड़े हुए थे
04:19यह एहम सवाल उठता है इंसा आप करवाओ लाठी चार्च आप करो पेलेजगन आप चलाओ और दोश युवां के उपर
04:33लग दो
04:34यह इनकी राजनीती है हम फ्रांस के जैसे नहीं है हम अल्बेनिया के जैसे नहीं है
04:46स्पेन के जैसे नहीं है हमारा इतिहास शांती पूर्फ प्रिटेस्ट करने का है
04:57और यह चलता रहेगा जब तक उस लक्ष पे नहीं पहुंचेंगे जो राहूल गांदी ने
05:08कल और परसों विस्तार से देश को बताया पहली बात तो यह दूसरी बात
05:21के राहूल गांदी और जो भी नेतागन है विपक्ष के
05:31बात कर रहे हैं वोट चोरी का वो बहुत एहन है और अगर इस तरह से वोट चोरी हो तो
05:40समझ लिएजिए कि जो लोकतंतर की बुनियाद है वो यह अतनी कमजोर हो जाएगी कि लोकतंतर का मायना ही नहीं
05:48रहेगा लेकिन मैं कुछ
05:50आपको इतिहास की बात करना चाहता हूँ आपको विस्तार से बताना चाहता हूँ कि यह चोरी का मामला शुरू कहां
05:58से हुआ अब याद कीजिए
06:03दोजार सत्रा दोजार सत्रा को क्या हुआ फिनैंस एक्ट में संशोदन लागया और फिनैंस एक्ट के अंतरगत
06:19यह कह क्या कि कोई भी कॉर्परेशन चाहे वो प्रॉफिटेबल हो या नहीं हो लॉस मेकिंग भी हो तो वो
06:32पार्टी को डॉनेट कर सकती है
06:37यह फिनैंस एक्ट में लखा गया और साथ में इंकन टैक्स में भी संशोदन हुआ ताके कोई टैक्स नहीं लगेगा
06:49और यह जो स्कीम थी और बाहर की बाहर के भी कॉर्परेशन जहां की हिंदोस्तान कंट्रोल करते हैं वो भी
06:58पैसा दे सकते हैं
07:00यह पहले इन चीजों पर पाबंदी थी अब इसके पीछे सोच क्यों थी क्योंकि नोट चोरी तो हो चुकी थी
07:16इसके पीछे सोच यह थी कि अब हमें पैसा एकटा करना है
07:22ताके हमें आगे वाले दिनों में सरकार को चोरी सरकारों को चोरी करना है जहां कांगरेस की सरकारों हों वेपक्ष
07:28सरकारों
07:30ठीक है तो 2017 में स्कीम यह लागू की अरुन जेटली साहब और इसके पीछे सोच क्या थी इलेक्टरल बांड
07:41की सोच
07:43तो 2018 में इलेक्टरल बांड आगए लागू हो गए और फिर खुले आम इंडोनेशन मिलने लगे बीजेपी को
07:59और इसी इलेक्टरल बांड की वज़े से बीजेपी के पास छे हाजार करोड उनको मिल चुके थे
08:10ठीक है साथ साथ में जिन्नों ने जिन्नों ने इनको पैसा दिया नैचरली उनकी पर दो मन में होगा कि
08:20हमें भी कुछ मिलना चाहिए तो उनको कांट्रैक्ट मिलने लगे
08:25और लोग कहते हैं और अनुमान करते हैं कि उस तरीके से पैसा भी दूसरे तरीके से आने लगा है
08:33तो छे हजार करोड तो वाइट आ गया जिससे बाजपा के दफ्तर बन गए हर जिले में जिससे आर एसेस
08:43के दफ्तर फाइव स्टार सेवन स्टार बन गए ठीक है और सारा एलेक्ट्रानिक वर्क हिंदोस्तान का बीजेपी का वो बन
08:52गया
08:53क्योंकि इस पर तो कोई रोक लगे नहीं सकती यह तो वाइट का पैसा था तो चेक का पैसा था
08:57तो उस संपत्ति को इन्होंने इस्तमाल किया ठीक है और कैश के द्वारा जहां जनसाबार जी जाते थे करोण और
09:08रुपया खर्च होते थे वो तो लग रहा था और मैं तो मु
09:19क्रेक्रेट सेक्टर पे कबज़ा만 द्या कर लिए और इसके द्वारा मीडिया पे कबज़ा लिए ठीक है फिर जब यह सब
09:31हो गया, इनका अपना नेरिटिव हो गया, बिन्हों ने इन्होंने सरकार
09:35चोड़ी करने का काम शुरू करते हैं कि सरकार ने कुछ चोड़ी करवा आपको याद होगा कि सरकार ने गिरने
09:46लगी जहाँ जहाँ भी कॉंग्रेस सरकार थी वो कॉंग्रेस सरकार कुई रख गिराने लगे कॉर्परेट सेक्टर इनके इस्थास था कॉर्परेट
09:56सेक्टर ने
09:56पैसे दे रखे थे और फिर ये लोगों को माराष्टा से सूरत ले जाते थे, सूरत से गुवाटी ले जाते
10:04थे
10:06और चुनी सरकार को गिरा देते थे