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  • 15 minutes ago
हिमाचल प्रदेश की देव संस्कृति में ढोल नगाड़ों और शहनाई के साथ एक और वाद्य यंत्र की गूंज का अपना अलग महत्व है. यह है नरसिंघा, जिसकी आवाज सदियों से पहाड़ों की देव परंपराओं का हिस्सा रही है. कभी रणभूमि में युद्ध शुरू होने और समाप्त होने का संकेत देने वाला यह वाद्य यंत्र आज देवी देवताओं के धार्मिक आयोजनों की पहचान है. खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने जून 2026 में नरसिंघे को जीआई टैग प्रदान किया है. इसके बाद कारीगरों को इसकी बिक्री बढ़ने की उम्मीद है. हिमाचल की देव संस्कृति, जहां देवी देवताओं के रथ निकलते हैं तो ढोल, नगाड़ों और शहनाई के साथ नरसिंघे की गूंज भी सुनाई देती है. कुल्लू, मंडी, शिमला और किन्नौर में धार्मिक आयोजनों के दौरान इसका विशेष महत्व है. पहाड़ी क्षेत्रों में इसे नरसिंघा कहा जाता है, जबकि देश के मैदानी और निचले इलाकों में इसी तरह के वाद्य यंत्र को रणसिंघा के नाम से जाना जाता है. इसका संबंध महाभारत से है. तांबा, पीतल और चांदी जैसी धातुओं से बनने वाले इस वाद्य यंत्र के पहले आठ अलग अलग हिस्से तैयार किए जाते हैं. इसके बाद इन्हें जोड़कर नरसिंघे का आकार दिया जाता है. पूरी प्रक्रिया हाथों से होती है और एक नरसिंघा तैयार करने में तीन से चार दिन लग जाते हैं. इसकी कीमत भी इस्तेमाल की गई धातु के आधार पर 22 हजार से 60 हजार रुपये तक होती है.

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00:28।
00:58आज देवी देवताओं के धार्मिक आयोजनों की पहचान है।
01:00नर्सिंगे के जितना छोटा होगा उतना बनाने में ज़्यादा टाइम लगता है।
01:05तो एक नर्सिंगे को बनाने में लग बग लग बग एक से डेट दिन लग जाता है।
01:11छोटे नर्सिंगे को एक से डेट दिन लग जाता है।
01:14लोग इसको बहुत पसंद कर रहे हैं।
01:16In the city of Narsinghya, there are art, framing, so people are looking for a lot of attention.
02:06पूजा पाठ होती है।
02:37पूरी प्रक्रिया हातों से होती है और एक नर्सिंखा तयार करने में तीन से चार दिन लग जाते हैं।
02:44इसके कीमत भी इस्तिमाल की गई धातों के आधार पर बाइस हजार से साथ हजार रुपे तक होती है।
02:52नर्शिंगे में यह रहता है कि अस्तिमाल भी बनता है।
02:55और हमारे काफी चीजों में यूज होता है जैसे देवी देपताओं में यूज होता है।
03:01और इसके साथ में जो इसकी उमर है बहुत ही पुरानी है।
03:33नर्शिंगा अब हिमाचल की संस्कृती का प्रतीक होने के साथ
03:36खास महमानों को दिये जाने वाले पारमपरिक उपहारों में भी शामिल हो चुका है।
03:42राश्टपती द्रौपदी मुर्मु के मनाली दौरे के दौरान उन्हें नर्शिंगा भेट किया गया था।
03:48मैं वर्श 2022 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हिमाचल दौरे के दौरान भी उन्हें या पारमपरिक वाध्ययंत्र उपहार में
03:57दिया गया था।
03:58कुलो से ETV भारत हिमाचल के लिए बालकृष्ण शर्मा की रिपोर्ट।

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