00:28।
00:58आज देवी देवताओं के धार्मिक आयोजनों की पहचान है।
01:00नर्सिंगे के जितना छोटा होगा उतना बनाने में ज़्यादा टाइम लगता है।
01:05तो एक नर्सिंगे को बनाने में लग बग लग बग एक से डेट दिन लग जाता है।
01:11छोटे नर्सिंगे को एक से डेट दिन लग जाता है।
01:14लोग इसको बहुत पसंद कर रहे हैं।
01:16In the city of Narsinghya, there are art, framing, so people are looking for a lot of attention.
02:06पूजा पाठ होती है।
02:37पूरी प्रक्रिया हातों से होती है और एक नर्सिंखा तयार करने में तीन से चार दिन लग जाते हैं।
02:44इसके कीमत भी इस्तिमाल की गई धातों के आधार पर बाइस हजार से साथ हजार रुपे तक होती है।
02:52नर्शिंगे में यह रहता है कि अस्तिमाल भी बनता है।
02:55और हमारे काफी चीजों में यूज होता है जैसे देवी देपताओं में यूज होता है।
03:01और इसके साथ में जो इसकी उमर है बहुत ही पुरानी है।
03:33नर्शिंगा अब हिमाचल की संस्कृती का प्रतीक होने के साथ
03:36खास महमानों को दिये जाने वाले पारमपरिक उपहारों में भी शामिल हो चुका है।
03:42राश्टपती द्रौपदी मुर्मु के मनाली दौरे के दौरान उन्हें नर्शिंगा भेट किया गया था।
03:48मैं वर्श 2022 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हिमाचल दौरे के दौरान भी उन्हें या पारमपरिक वाध्ययंत्र उपहार में
03:57दिया गया था।
03:58कुलो से ETV भारत हिमाचल के लिए बालकृष्ण शर्मा की रिपोर्ट।