00:05४ुछ रिस्ते खून के होते हैं तो कुछ बक्त और भरोसे के साथ बनते हैं।
00:09हैदराबाद और राची के वीच ऐसा ही एक रिस्ता पिछले करीब 45 बर्सों से कायम है।
00:15दिवाली आते ही हैदराबाद की वेपारी अपने कृत्रें फूलो और सजावती समान के साथ राची पहुचते हैं।
00:59अपर वजार की सेवासदन गली में दुकाने सचती है और रंग बिरंगे फुलो से बाजार की रौनक बढ़ जाती है।
01:07यसरीब कारुबार नहीं बलकि पिढ़िहों से चली आ रही एक परंपरा है जिसे नए पिढ़ी भी पुरे उत्सा से आगे
01:14बढ़ा रही है।
01:15हद्राबचा है हम, हर साल आते हैं, फाइंतिस साल शेहारों में बच्चा तरह तक से आ रहो है।
01:21यह थोड़ा माल लेने को सस्ता में बेस झाल है हम, हम तो अगरीद में है, थोड़ा थोड़ा जमा करते
01:32है, एक साल लगता है जमा करें।
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02:18दुकान लगाया करते थे अब उनके बेटे भी इस कारूबार में हाथ मटा रहे हैं बच्पन में जिन लोगों ने
02:25अपने बड़ों को फुलों की दुकान सजाते देखा आज वही इस परंपरा की जिम्यदारी सम्हाल रहे हैं राची आना और
02:32पुराने ग्रहाकों से मिलना इन
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03:31से इनकी दुकाने सजी रहती हैं कई विपारी राची में ही
03:36अपने हाथों से फूलो की लडियां और मालाय तयार करते हैं
03:40इनके काम में हुनर के साथ बढ़ों से सीखी कला की जलक भी दिखाए देती हैं
03:46वेपारियों का कहना है कि राची के लोग हर साल उन्हें अच्छा रिस्पॉंस देते हैं, स्थानिय दुकांदार भी ठोक में
03:53समान खरिदते हैं, इस बार मौसम की परिशानी के कारण शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन अब ग्राहक पहुचने लगे हैं
04:17और मौती वाला हार, और साइड में लाएका नगात, जालार, सब आइटम रहे हैं अपना पास, और नजर बंद के
04:25वह भी देशते हैं
04:26यहां लोगों से कितना प्यार मिलता है जार कटने हैं? जार कर बहुत प्यार मिलते हैं, घरिब को छोड़े जान
04:30रखते हैं
04:32सब ठीक है, अच्छा दिक्रा तब तो ले रहे हैं अच्छा रहता है, दिवाली बित्ते ही यह वेपारी बाफस हैदराबार
04:49लोट जाएंगे, कुछ दिनों का यह बाजार भले ही खत्म हो जाएगा, लेकिन इनके बनाए फूल राची के घरों की
04:55सजावट में बने रहेंग
04:57करीब 45 साल से जारी यह सिलसिला बताता है कि कुछ परंपराएं कैलेंडर से नहीं, बलकि तीडियों की मेहनत और
05:06लोगों के भरोसे से जिन्दा रहती है
05:10चंदन्भटाचारिया, ETV भारत, राची