00:00रणाम अचारे जी, मैं UK Civil Services में गाम करती हूं, Department for Environment, Food and Rural Affairs.
00:06ऐसा क्या किया जाए, जिस वज़े से global warming, climate change ऐसे बड़े-बड़े issues पे actual में कुछ हो
00:13सके?
00:14डेटा ही सामने रखना पड़ेगा, जब तक डेटा की जगा होप है सामने, तब तक तक तो उस होप को
00:23endlessly stretch किया जा सकता है.
00:25होप ये रहती है कि हमारे पास आज राइट टेकनॉलोजी नहीं है, इसलिए हम इतने आदा emissions करते हैं.
00:33हमारे पास वो टेकनॉलोजी है, जो पुरानी है, पॉल्यूटिंग है, तो इसलिए emission हो रहा है.
00:38एक होप ये भी है कि एक राइट टेकनॉलोजी आ जाएगी, जो कार्बन कैप्चर कर लेगी.
00:42तो हमने सारी बात किस पर डाल दिये फिर, कि कमी है, किस में कमी है, टेकनॉलोजी में कमी है.
00:50और दूसरी चीज़ हम डाल देते हैं, आम तरवे कि पॉलिसी में कमी है.
00:54कि सही policies बना देंगे, सही tax वरे लगा देंगे, तो जितनी भी polluting चीज़े होंगी, इनका consumption कम हो
01:01जाएगा, तो अपने आप emission कम हो जाएगा
01:03जब तक empirical evidence सामने नहीं लाए जाएगी, कि ये दोनों ही तरीके काम नहीं कर सकते, hope बनी रहेगी
01:13और empirical evidence हमारे सामने खूब मौझूद है, पॉलिसी रूट से नहीं होने वाला, जहां से होने वाला है वो
01:21कोई जादू की बात नहीं है, जहां से होने वाला है
01:24उसके लिए मैंने का हमारे पास hard empirical evidence मौझूद है
01:27अब इस पे आप अगर अमल नहीं करना चाहते इसको देखना ही नहीं चाहते
01:32तो इस सिर्फ बदनीयती है और बदनीयती का फिर कोई इलाज नहीं होता
01:44कर दो दो दो आपर अमल नहीं होता है