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  • 9 minutes ago
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव परिणाम पर भारत की नजर बनी हुई है. नई दिल्ली हालात पर बारीकी से नजर रख रही है. भारत के लिए चिंता यह है कि ट्रंप के कमजोर होने के बावजूद उनकी अनप्रेडिक्टिबिलिटी कुछ भी करा सकती है. साथ ही अगर मध्यपूर्व के हालात नहीं बदले और ट्रंप ने कोई भी ऐसा फैसला लिया, जिसकी वजह से तनाव और अधिक बढ़ा तो भारत के लिए यह ठीक नहीं हो सकता है. चिंता यह है कि अगर मिडिल ईस्ट में फिर से तनाव बढ़ता है, तो इस इलाके में मौजूद भारतीयों की जान को खतरा हो सकता है और ऊर्जा (ईंधन) की कीमतें बढ़ सकती हैं. भारत अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता ला चुका है, जिसके चलते अब कुल तेल आयात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है. पहले यह आंकड़ा 50 से 70 प्रतिशत के बीच हुआ करता था.नई दिल्ली को इस बात का पूरा एहसास है कि अगर संघर्ष और तेज होता है, तो इसके क्या नतीजे हो सकते हैं.

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00:30If you have any questions, please do not answer your questions.
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02:05पतिशेशगियों का मानना है कि Republican की हार की underneath Trump पर लगाम लग Kirsty में
02:10प्रणियंत्रण नहीं रहने से उनके लिए अपनी मनमानी और एकतरफा नीतियों को जारी रखना बेहत मुशकिल हो जाएगा.

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