00:00पूछ पनिजादों से, ये हिजर कैस ठेला है
00:06पूछ नोकरी की दरखास रखानी है, क्या करना है?
00:08नोकरी बोकरी की नहीं, वे इश की दरखास रखानी है
00:12अज़ इस नहीं की खाय को पेचाप पी तो
00:18ये तो भरी साग की रखाई है
00:30आरा हूँ बाईह की च्रहित दरवादा।
00:40द्रादा थोड़ोगः ट्राम्टार टोड़ूगा पूरूगः
00:43अर रखांए ढुए पूरूगः
00:52इसलाम लेक परजद खाया?
00:53अब सब लोग खैरीत तो है मिर्ज़ा साथ?
01:06बरिजाद है घर को अब वो अपनी आखरी ट्विशन दस बजे पढ़ा कर आ जाता है अभी तक तो मेरा ख्याल है वो सो भी गया होगा
01:14जिए शिप्ड़ा मेरे बुलाएं ज़र उसमार यही बात होगी उसे
01:23जी परिजाद जी बाराएं लीजे मिर्ज़ा साब आगा परिजाद
01:53अशिए शाव औरी
02:04किया समझ रहते हैं ।ुम समझ रहते हैं यह ने चुपकर बेट जाओगे तो हम तुम तक पहुंच नहीं बाएंगे
02:12मैं? मेरे घर के छट पर आज कूदेध है तो
02:16कुर्देत है तो
02:21क्या कह रहे हैं आप मुझे नहीं को तब
02:30यह लिखाई तुमारी है
02:33यह खत तो
02:35यह लिखाई तुमारी है या नहीं
02:39ची लिखाई तो मेरी है
02:46दिल जा रहा है कि इस वक्त अपने घर में
02:52डाके की कोशिश के इल्जा में तुम्हें जेल करवा दूँ
02:56चक्के बिस्वाओं तुम्हें मैं
02:58पर क्या करूँ
03:01तीस बरसों की महलेदारी है
03:04तुम्हारे मरहूं बाप और तुम्हारे भाईयों से
03:08यही मुहलेदारी और हमसायागीरी मुझे रोक रही है
03:15आप सब गवाएं
03:19आप सब के सामने इसने इकरार किया है कि यह बेहूदा ख़त
03:24इसी ने लिखा है
03:26जो पारते वाक छट पर गिर गया था
03:38आज अपनी और महलेवालों की इज़त की वज़ा से तुम्हे छोड़ना हूँ
03:43तो याद रखना कि इसके बाद अगर तुम मेरे घर के हाथ पास दिखाई दिए
03:49तो इसके नदीजे के जिम्देदार तुम खुद होगे है
03:54चल
04:07चल दिखाई मैंने तेरी सारी जाज की बाद ने चाथ दिखाई जाए
04:15चल आज अदर चल
04:27क्या हूए कुछ बताओ तो तो आप रूट तडब नहीं होगी रपूर तडब नहीं होगी
04:31शुवा? Schwasta के देयर भी काई भी है, एक भी ऐसको बस कर डें, वो जाए मुझने क्वाल के, कि यह शुवाही है, भी केगाई भांस देभा भी आटर है
04:47एकी पले हमारी सनरी सरफ गास मिला�� bias
04:51एकना, टेसी अटेस, एकना क्फरामी तुष्वे, एक भांस करते है
05:01एए इस लिए तुछ पर खरच़ा किया, यह लिखेगा तू एए
05:05एए लिखने नहीं था रहाए लिखने तू आपनी शरीफ जादियों को खंट लिखने थे पर अपनी शकल देगी तुने
05:10हैसियत देगी और काथ देगी तुने
05:12पोगे
05:13बोल ना कि तुसीरा टमिशन प्यार है
05:16शुपकर कर के भाईयों की की शराफत की मेते से पॉलिस में निए निया और लाने तेही पढ़ाई कि आपर मी अधुदि ओझाही हो तो
05:21याह.
05:21वो…
05:22याँ वाइ...
05:25लाई.. वाइ बापर..
05:31याँझ बापर..
05:31याँजगे जाफ चैन्द!
05:33पहरत?
05:51और शोकी भाई आप यहां बैटे हो पदा चला रात मोहले में क्या हो गया
06:03का हुआ भे नहीं अपना राज तो निकुल गया
06:06नहीं शोकी भाई वो अन्य था परिजाद वो फस गया
06:09मुन्ना बता रहा था कि सारे मोहले के सामने मिर्जा साब ने बड़ी बेजज़ती खराब कर दी उसकी
06:14और वो जो आप खात उसकी जट पर छोड़ कर आये थे वो मिर्जा साब के हाथ लग गया
06:19परिजाद ने तो साफसा बोल दिया होगा अपड़ा नहीं शोकी भाई बहुता बैचारा आपके डर से ही चुप रह गया
06:36निर्जा साब ने सारे मोहले के सामने उसकी कान के नीचे जापड रख दिया लेकिन उसने आपका नाम तक नहीं लिया
06:42जाए दूबाले नहीं रहन दे चाहे रहने दे तरफे तू बतने लेकिया
06:50शोकी भाई आप क्यूं परिशान हो रहे हो सारा इल्जाम तो परिजाद पर आया है आपके सर से तो बलाडल गई
06:59बै जे भी को अच्छा नहीं हुआ गाम अड़ा परिजाद कहा है अबने होगा कहां अपने घर में चुपा बैठ है सारा मुहला उस पर थू थू कर रहा है
07:09चाह नहीं पी रहे हो तो मुझे दे दो
07:15यहला तू पील नहीं है बाई खल रात से इतने चुप क्यों मैं जानती हूं के बाद वो नहीं है जो सब कह रहे हैं
07:31तूम इतनी घटिया हरकत करी नहीं सकते लेकिन सच भी तो नहीं बता रहे हो मुझे
07:37मैं पैदा आपी
07:40जब मेरे अपने सगे भाई मेरे किरदार और सचाय पर एपीन नहीं करते तो
07:45महलेवालों के सामने अपनी बेगगुनाई थाबित करने कर जा पैदा हो
07:50मैं औरों की बात नहीं करें
07:52कम से कम मुझे तो बताओ के सच क्या है
07:57सच यह आपी के
08:01लिखाई मेरी थी
08:04अगर मुझे नहीं पता था कि जो मुझे से ख़ट लिखा रहा है
08:09नहीं क्या सूच दियों के मेरे वाए में को
08:11उसमें थोड़ी अकल होगी ना
08:14तो समझ आएगी कि यह खट तुमने उसके लिए नहीं लिखा
08:16उसमें थोड़ी अकल होगी न, तो समझ आएगी कि ये खत तुमने उसके लिए नहीं लिखा
08:22तुम्हें इसे क्यों लगता है?
08:26क्योंकि अगर उन्होंने तुम्हें वो खत देना होता तो उनके पास और बहुत से मौके थे
08:30उन्हें इस तरह से छथ टापने की जरूरत नहीं थी, जरूर बात कुछ और है
08:36अगर कुछ और है तो अब आको वो खत क्यों मिला जो चोर हमारी छथ पर छोड़ गया
08:42यही बात तो मुझे समझ नहीं आ रही
08:47अप शी अब चाके उसे कहोगी कि ये मेरी अरकत नहीं है
09:00इस चौकी नहीं लिखुआ है तो उसे
09:03फिलहाल तो बहुत मश्किल है
09:08उसके घरवाले बहुत खुछ से में है
09:11लेकिन मैं मौका देखकर तुम्हारा पेगाम भिजवाने की कोशिश करूगी
09:17बाजी तुमने उस शक्स को देखा था मतलब उसका हो लिया
09:23नहीं अंधेरा था मेरी चीख सुनते ही वो भाग गया मैंने नहीं देखा
09:27यह तो और भी अर्जीब बात है
09:30एक अकीली नड़की को छट पर देखकर वो भाग गया
09:34उससे तो तुम्हें चुपकर आने के लिए तुम पर लपक न चाहिया था
09:38यह क्या बात करी हो तुम
09:39मुझे क्या पता कि वो मुझे पर लपका क्यों नहीं और भाग क्यों गया
09:43तुम क्या चाहती हो कि वो मुझे पर लपक पढ़ता
09:45मुझे को नुकसान पहुचा की जाता वहां से
09:48है अल्ला बाजी, खुदाना खास्ता, मेरा ये कहने का हर्गेस
09:52यह मक्सर था तुम्हारा भे?
09:53मेरा दिमाग खाई जारू है कब से तुम्हे समझ नहीं आ रहा कि मैं बहुत परिशान हूँ?
09:57जाओ!
09:58बाजी मैं तो बाइ...
09:59जाओ!
10:08तुमने सब के सामने उस मन्हूस शौकी का नाम क्यू नहीं लिया?
10:11उन मेरा यकीन करता
10:13जब मेरी लिखाई वाला ख़त मिर्जा साब के हाथ में था
10:18कोई भी नामानता
10:20सच पाद तुम्हे है कि मैं
10:25सौकी का नाम लेकर
10:27नाहीं की बतनामी नहीं किना जाता था
10:31बतनी बात कहां से कान इतल जाती
10:43अब बरीजाद आयंता किसी हसीना की छट आपनी हो ना
10:59तो हमसे मशवरा कर लीजो
11:01बड़ा तरबा है अपना इन कामों में
11:04अब ये तो वो हीरो है
11:06जो पिचर शुरू होने से पहले ही अपने अरूईन के बाप से पिढ गया
11:13खाला क्या बताए किकि कितने शर्मिंदा हैं
11:23पूरे जमाने में कहीं मुँ दिखाने के काबिल नहीं छुड़ा
11:25इतना रुस्वा किया है कि क्या बताओ
11:27हमसे रहा ने गया खाला
11:30सालों का साथ है हमारा
11:32और बरसों के हमसायदारी
11:34इसलिए हमने सोचा
11:35हम खुछ चल के आप से माफी माने
11:37ये तो आपका और मिर्जा साब का जर्फ है
11:40कि उन्होंने हमें माफ कर दिया
11:42जो होना था हो चुका अब उससे दोहराने से क्या फाइदा
11:47इनसान के अंदर क्या चल रहा है
11:50अगर पहले से पता चल जाए
11:52तो इनसान एक दूसरे को पहचान ही ना ले
11:56मुझे बिल्कुल भी परिजात से ये उम्मीद नहीं थी
12:02मैं तो उससे बड़ा समझदार सुल्चा वा लड़का समझती थी
12:07बस खाला
12:08कहते हैं ना जैसी सूरत वैसे कुर्टूत
12:13दोनों भाईयों ने ऐसी पिटाई लगाई है ना उसकी
12:16कि महीनों भर तो नील के निशान नहीं जाते उसके जिसन से
12:20अरे अकबर तो उसे घर में रखने को राजी नहीं थे
12:23वो तो घर से बाहर निकालना चाहते थी
12:25बस बेहन की मिन्नत समाज़त की वज़ा से रख लिया
12:28वरना तो दोनों भाईयों से धके मार मार के उस राद बाहर निकाल रहे थी
12:32पता नहीं इन दोनों बेहन भाईयों से कब जान चूटेगी हमारी
12:37बंदा नेकी भी करे और रिस्वाई के इल्जाम भी भरे
12:40खाला आप सच बताएना आपने हमें माफ कर दी आएना
12:46भी इसमें तुम लोगों का क्या कुसूर
12:50लेकिन बरीजात को जरा समझा देना
12:54कि बाहर महले वालों के सामने नाहीद का नाम भी जबान पर न लाए
12:59लोगों को तो कहानी चाहिए होती है
13:02मसालेदार चटपटी
13:04दूसरों के चाहे इज़त दो कोडी की ही क्यों न रह जाए
13:08अरे नहीं नहीं खाला आप इस बात की बिलकुल फिकर ना करें
13:13खाल नहीं कीज देंगे भाई उसकी अगर ऐसा ख्याल भी आया उसके दिल में तो
13:18आप बेफिकर हो जए खाला ऐसा कुछ नहीं हो
13:25अलाहाफिस खाला अलाहाफिस खालाह दाफिस
13:29क्यों थी तुम्हें अंदर ये बाते करने की कब बहन भाई से जान चुटेगी पागल हो क्या चुप रहा करो सरा
13:41क्या केरी थी परिजाद भाई की भावियां कुछ नहीं बस माजरत करने आई थी
13:51अम्मी मैं से एक बात कहूं ये परिजाद भाई कितने मुख्तिलिफ है न अपने घरवानों से
13:58ठीक कहरे लो मुझे भी इन लोगों से मिलकर हमेशा यही लगता है ये नाहीत की धर्याज घर का काम नहीं करेगी
14:06अम्मी भाजी अपने कमरे में है कमरे में मैं देख झी उँ से परिजाद की भावियां थी तोनों माफी मांगने आई थी हैं पता नहीं मुझे ऐसा क्यूं लग रहे है उन्हे देखके कि वो अपने देवर देवर की बेजदी पर अंदर यांदर खुश हो रही है परिजा�
14:36उसकी आँखों में तो मैंने हया देखी तुमसे नजर उठा कर बात भी नहीं करता था फिर इतनी जुरत
14:50डरती हूँ मैं अल्ला करे हम अनजाने में कोई भूल ना कर रहे हूं दो बेटियों की माँ हूं किसी की आह या बद्दूआ ना लग जाये हमें
15:06शाम को खत्म करवाया है मैंने आके जरा मेरा हाथ बटा दो
15:36असलाम लेकूम खाला कैसी है वालेकूम असलाम बै ठीकूम ये के लाई हो अमी ने अर्ज दरूद शरीफ का खत्म करवाया था उसी की नाज है अच्छा
15:53बैटो बैटो बैटो शे देख रही हो सुग्रा ये होते बड़े दिल वाले और बड़े जर्फ वाले लोग इतना कुछ हो गया लेकिन खाला जो है ना वो नियास देना नही भूली है अबई अल्ला बस इने खुश रखे अच्छा बैटो मैं खाली कर लापी हूं
16:17अबड़े असलाम लेकम सहीदा बाजी वालेकम असलाम कवल कैसी हो बैठो बिलकुल ठीक आप कैसी है पढ़ाई कैसी जा रही आपके है हां सब ठीक है सुनो मुझे तुमसे एक ज़रूरी बात कर लेए जी बाजे तेखो परीजात बेकसूर हो उसे वो खत नाहीत को नहीं �
16:47जबकि वो हर रोज आता है तुम्हारे गर नाहीग को पढ़ाने
16:51और मैं ये सब इसलिए नहीं कह रही कि वो मेरा भाई है
16:55क्योंकि ये सच है परिजात ने तो आज तक महले की किसी लड़की को हाँ खुठा कर नहीं देखा
17:01इसी बात की उलजन अम्मी को भी है बाजी
17:03अगर वो खत तो हमारी चट से ही मिला था
17:06और राइटिंग भी परिजात भाई की थी
17:09उन्होंने इस बात को सारे महले के सामने तस्रीम किया
17:12हाँ तो ये भी उसकी सच्चाई का एक सबूत है
17:15सच ये है कि वो खत इसी महले के एक लोफ़ शोकी ने जबरतस्ती लिखवाया था
17:22बेना किसी नाम के
17:23परी कोई तो देहमो कुमान में भी नहीं था
17:26कि वो ये खत नाहीद के लिखवा रहा है
17:28इसका मतलब ये है
17:31कि उस रात तुम्हारी चट पर परी जात नहीं
17:34बलकि वो शोकी कुदा था
17:36वो सारा अलसाम मेरे भाई पर आगया
17:40ये लोब अच्छे अपने बरतन
17:44और अपनी अम्मी का हमाईते उसे बहुत दो शुक्रिया दा करना
17:48खुदा आफिस
17:51खुदा आफिस
17:52वैसे ना इस तहन की सफाई करकर कि ना मैं ठख गई
18:06हालात अच्छे होते नहीं है कि बंदा एक कामवल ही रख ले
18:10असलाम लेकुम
18:13वालेकुम अस्तुनार
18:15पता है महले में क्या ख़ब पहल रही है
18:19यह बादिया
18:20मिर्जा साब ने
18:23उन्होंने नाहीत की पढ़ाई चुडवा दिया
18:25और अब कोई लड़का देख के उसका रिष्टा भी तेख दे
18:28जाहर है इतनी बदनामी के बाद
18:32अब पढ़ाई का तक भाना ही है
18:34बसे एक बात को मभावी
18:36बात करने में बात करने में
18:40भला अब उस मासूम रट्की से रिष्टा करेगा कॉन
18:43बही मुझे तो बहुत आसा है उस बिचारी का
18:47इतनी बदनामी कराकर
18:48कुद मूठ चुपा के बैठी है
18:50कौन? मैं माजिद
19:01जी माजिद भाई
19:09सहीदा अजगर भाई है गर पे
19:13भाई तो घर पे नहीं है
19:15अच्छा
19:18चलो मैं फिर किसी दिन आजओंगो
19:20अच्छा मुझे बताओ वो परिजात कैसा है
19:23दो चार दिनों के नज़र नहीं आया
19:25जी वो भी ठीक है
19:27अच्छा उसे कहना है मुझसे आके मिले
19:30माजिद भाई
19:33वो हरकत परिजात में नहीं की थी
19:37आप जानते हैं उसे वो ऐसा नहीं कर सकता उसे फसाया गया है
19:44साइधा ये बात मैं तो जानता हूं मगर अब ये बात महले वालों को समझाना बहुत मुश्किल हो गई है
19:51मगर तुम फिकर ना करो अब अला ताला सब बेतर करते हैं
19:56आचले
19:58आला
20:11के आचते अज देखना क्या करता हूं
20:12देख रहेंगे चाहिए
20:14लोगा है
20:16रहें
20:18अब है लूम कर दिया पहली बारी में लहीं
20:20अ भाई ये फाउल कर ते हो तेंए
20:22अवाज रेनाब किसी ये मैने कार देनादरी
20:26खी प्यूंज ऐ जिरोआ मेरा क्या हो गया जब से उस नाकाम वार्दाद सो लोके हमारे वह बढ़ा करें हो
20:34आखर माजरा क्या हो गया।
20:35अब पचिणिया भे, तरने एक काम बोला था मैंने, एक काम, तरे से वो भी नहीं होानी कम में।
20:40शोकी भाई, मैंने मौले के बच्चे को भेजा था परीजाद के घर, अब उसके भाई ने उसे घर से बगा दिया तो मैं क्या करूँ।
20:46और आपको पता है, वो सुबा कॉलिज जाता है और रात को टुशन पढ़ा आगे वापस घर आता है, जब सारा महला सोच चुका होता है।
20:54अब बताओ इसमें मेरा क्या कसूर है।
20:58मैं तो वही करता हूँ जो आप कहते हो।
21:00मिर्जा साब, उन्होंने नाहीत की पढ़ाई छुडवा दिया।
21:12और अब कोई लड़का देखके उसका रिष्टा भी तैकर।
21:15कि मैं दोट।
21:17मैं शरते हुआ आप का उस्मेट
21:19दोट।
21:21कर दो कर दो
21:51कर दो
21:53कर दो
21:57कर दो
22:13मौटान
22:16कर दो
22:21वो अधर नियू भाई विए अच्छा गया है अज़ गया है बड़े दिनों से डून रहो भाई तुझे ए नहीं क्यों शौकी भाई एक और खत लिख भाना है क्या एक अर खत लिखाए क्या टॉर एक कास्म ले ले मेरा मकसद तुझे बदराम करनार किसी नहीं तो
22:48यार वो बॉकलाड में गिरिगा था यार मुझसे कथछट को
22:53कास मुझे पहले बता देदे किसके लिए ले खाना एकत
22:56ये हरकत कभी ना करने देता शोकी भाई
22:59यार बड़ी जाती होगी यार मुझसें जाने में परेसा
23:03यह तुन्हा ना सोकी कर नाम ना लेके
23:07मार डाल है यार मजंदर से
23:09इसे ना गिरा हुआ तो मने कभी खुद को महसूस नहीं किया है
23:13देख अब भी कुछ नहीं बिगड़ा
23:16मेरे साथ चल
23:17मैं पूरे मुल्ले बालों को जमा करके इस बात के अलान करूँगा
23:21खत मैंने लिख वाय है
23:22चत भई मैं कुदा था तू नहीं था
23:24जो गुआ सो गुआ शोकी भाई तो भूल जाओ इस सब को
23:30मैं नहीं चाहता नाहीत के और बदनामी हो
23:33पर मौजज घराने की शरीच लड़की है
23:36अधनी साधनी है प्यारे
23:38उसर आज जब मैं नहीं ती चत से बगादाना तू से पहले ही मेरा नगाब कुल लियागा
23:44तो उसर ने मेरी शकल देख ली तू उसकी बतनामी किरे सब कुरे मल्ले वालों के सामने चुप रहा
23:50अधनी स्वाल ही है प्यारे के को दूसर ने अपने बाब को जबात क्यों नहीं बताई कि छह तो पर मैं कुदा था तू नहीं ता
23:56क्या कह रहा हूं यार नई देन मुझे परचान लिया तो फिर भी उस अपके सामने चुप क्यों रहे है
24:09सायद वही वजाओ जो मेरे चुप रहने की थी
24:13मजीद अपनी बर्दामी नहीं चाहती हो जी हो
24:15तो उसके लिए उसने तुमारी उमर बर की नेक अनम भी दाओ पे लगा दियो
24:19नहीं नहीं तरहे बाद सर्फ इतनी नहीं है
24:22पिर क्या बात है
24:26मजे शक है
24:27उसराज जब मैने इतनी चट पे पूर्दा दाना हूं
24:31तो उसके साथ वहां कोई और रही था
24:35या
24:42यह नहीं शकी भाई आप खामखा एक मासूम लड़की पे लजाम लगा रहे हो
24:46खुदा के वस्ता ऐसा मत करो
24:47सचे कह रहा हूं यार
24:49चल यह बार ठीक है को उसने मुझे ठीक सणी देखा
24:52यह परे मुझे ऐसा लगा तो नहीं चल पे केली नी ना
24:57सोखी के आंके दोकानी दे में भाई था
25:18बारे गई बारे गई बारे
25:22अरी मैंने कहा सलाम अर्जे
25:29सुखरा कुबरा
25:31वालेकुमसलाम हजजन बॉआ आओ बैठो
25:34आए हाए
25:36उफ
25:38बड़ी गर्मी है भई
25:40आए हाए
25:42आए
25:44आए
25:46आए
25:48आए
25:50अरे भाई
25:55सबसे पहले तो थंडी शिकंजवी पिऊंगी
25:58गर्मी से जान निकल रही है
26:00और फिर लाल शर्बत
26:02उसके बाद चाय भी पिऊंगी
26:04अच्छा अच्छा अच्छा सब पिलाती।
26:06फिकर मत पिलाती।
26:07हाँ हाँ बुआ
26:08सब पिला दूँगी जरा इतनी नान तो रखो
26:10पहले मगर ये बताओ
26:12कि काम हुआ के नहीं
26:14आज तक तो ऐसा हुआ नहीं
26:16तो ऐसा हुआ नहीं
26:17कि बुआ ने किसी काम का जिम्मा लिया हो
26:19और वो काम ही ना हो
26:21डेर सौ से ज्यादा रिष्टे कर आ चुकी हूँ
26:24अरे इसलिए तो तुम्हे काय हजन गुआ
26:26चलो जाओ शर्बत लेकर आओ
26:28हाँ अभी लेकर आई
26:30अरे मैं सोच नहीं
26:31कि अप्रे आही गई हूँ
26:34तो दोपहर का खाना भी खाकर जाओ
26:36ठालो
26:38अच्छा चलो चुआ रहे तो ठाए
26:41लो भाई ये जाहित के निकाहे हैं
26:44वरिष्टा भी तो मैंने कराया था
26:47आँ प्रूआ को प्रूआ
26:49प्रूआ को प्रूआ
26:51अज़नी साथा नहीं यह भ्यारे
26:58मुझे शाक्या
27:01यह नई चल्चवाय केली नी
27:04उसके साथ अगाँ और वी खाना
27:06उसराज जब मैं नई पीछत से बागा दाना
27:11उससे पहले मेरा नगाब दूए अगाब दूए
27:15नई दरन मुझे पचान दिया था
27:19तो फिर भी उससे के सामने चुक क्यों रही है
27:49कि अपने परिजात के लिए क्या और फॉल के रहे हैं महले वाले बस अजन गुआ उसने तो भाईयों की लुटिया इडबो दी कहीं मुद इखाने के ना काबल नहीं छोड़ा ऐसा बच्चा तो नहीं था वो मेरे तो हाथों का लावा है
28:16हुआ इंसान की हकीकत अंदर से बाहर आते देर नहीं लगती बाहराल यह जो कुछ भी हुआ अच्छा भी हुआ क्योंके तुम तो जान दियो ना कि जब रिष्टे वाले लड़की के घर आते हैं उसके खांदान की सारी मालूमात करकर आते और जब उन्हें पता चले कि भाई
28:46अपने वो सादात मोहले में लड़के का खांदान रहता है लड़के की अपनी कर्याले की दुकान है पस उमर में थोड़ा सा साईदा से बड़ा है मगर अकेला लड़का है कोई नान जठानी का चक्कर ही नहीं है वो लड़के वाले साईदा को देखने आना चाह रहे है तो
29:16अरे भई जल्दी कर ले ना, ऐसे रिष्टे इंतिजार नहीं करते, और वैसे भी आजकल तुक रिष्टों का काल पढ़ा है।
29:23अरे नहीं नहीं भुआ, तुम ऐसे करो कि उन्हें जुमेका टाइम दे दो, बाकी मैं सभाल लोगी।
29:28देख लो, बन्नो, कहीं तुम्हारा अकबर कोई हंगामा न कर दे, वैसे भी मुझे उसके खुस्से से बहुत ही डर लगता है।
29:36उन दोनों की तुम फिकर ना करो, उन्हें हम संभाल लेंगे।
29:40हाँ, अगर यह रिष्टा पक्का हो जाता है, तो मेरी तरफ से एक कानदार जोड़ा तुम्हारे लिए पक्का और मेरी तरफ से न, सिलाई मशीन पकी।
29:49साच?
30:10अगर की तरफ से वाँ पक्काम का और मेरी माला जिए तरफ से न, सिलाई मंशनम पक्काम का वाँ
30:17करें
30:47कर्षा है
31:17कर दो कर दो कर दो कर दो
31:47कर दो कर दो कर दो
31:54Visano
32:10परिजाद परिजाद तुम यहां वह मैं नहीद को बताने आया था कि उनकी छट पे मैंने ख़त नहीं हाँ हाँ हमें मालूम है हमें
32:37वह मैं बिल्कुल मालूम है तुम जाका रहे हो आओ बैटो लिए मेरी बात तो सुनो आओ आओ आओ आराम से बैटकर बात करते हैं
32:50कि मोजा माफ कर दे है जानते हो मेरी वजहा आपके साथ बहुत बड़ी जयात्ती हुए है
32:54हाँ परिजात मैं और नाही दोनों ही तुमसे बहुत श्रमिंदा है तो उस दिन छट पे आप थे माजिद भाई
33:05मतलब शोकी सच कह रहा था हाँ उस रात को मैं ही चातर था मगर शोकी नहीं मेरा चेरा तो नहीं देखा दर असल माजिद बहुत जल्द हमारे घर अपनी हमी को भेजनी लगे थे ऐसे में उनका रिष्टा आने से पहले अगर ये बात लेक लाती और बदनामी माजिद सर ले ल
33:35अर्शोकी का नाम जबान पर लिए मैं ने ये फैसला किया था कि फाइनल पेपर होते ही मैं अपने वालिदान को भेज़ूगा नहीद के हां रिष्टे के लिए मगर मुझे लगता है अब मुझे और देर नहीं करनी चाहिए पहले ही हमारी वज़ा से तुम्हें बहुत जल
34:05अँस मेरा दिल अगर मैं शौकी का नाम ले भी लेती तो बदनामी मेरा ये मुकदर बंदी क्योंके लोग ये भी तो सोच सकते थे कि मेरा इस मामले में मुलीज हूँ
34:15लेकिन आपका नाम आते ही
34:20मेरे घर वाले तो क्या पूरे मुहले को मेरी बेगुनाये का सबूत मिल गया
34:25सब को समझ आगे के मेरा इस मामले के साथ कोई तालुक नहीं है
34:30लोग तो ऐसा सोच भी नहीं सकते के मेरा और आपका
34:45नहीं मैं और आप तो परहब मेरी द्वाब दुनों के साथ है
35:10सदा खुछ नहीं हां तो
35:11क्या इश्क वो निभाएंगे
35:17क्या हुस्न को सराहेंगे
35:23तारीक जिनके चहरे है
35:29मुकतरों पे जाने है
35:35तुछ मनों से क्या शिकवाद
35:43क्या गिरार अधीमों से
35:46हे सांफ आस तीनों में
35:49हमने खुद ही पाले है
35:52माजड बहुत जल्द हमारे घर अपने हमी को भेजनी लगे तो
35:55उनका रिष्टा आने से पहले अगर ये बात लेक लाती और
35:59बदनामि माजड सर् ले ले ते तो
36:02हमारे अरिष्टा नहों पाता है
36:07अगर में शौकी का नाम ले भी लेती तो बदनामी मेरा है कि मुकदर बंदी
36:11लेकिन
36:11आपका नाम आते ही
36:14मेरे घर वाले तो क्या
36:16पूरे महाले को मेरी बे गुराए का सभ़ गगे है
36:21सब को समझ आगे कि मेरा इस मामले के साथ कोई तालुप नहीं है
36:25दोग तो हैसा सोच भी नहीं सकते कि मेरा और आपका
36:51कि पनी सा दो से ये हिजर कैसे जेला है
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