00:00मिशन भगवद गीता श्लोक दिवस 36, अध्याएं 1, श्लोक 35, एतान हन्तु मिच्छामीक घनतोपी मधुसूदन, अपी त्रेलो के राज्यस्य हितो की नूम मही करते, भावार्थ, हे मधुसूदन, ये मुझे मारने को क्यों न तैयार हो, फिर भी मैं इन्हें मारना नहीं च
00:30हे मधुसूदन, ये सामने खड़े मेरे बंधु है, भले ही ये मुझे मारने को तैयार क्यों न हो, फिर भी मैं इन्हें मारना नहीं चाहता, अगर इस युद्ध के बदले मुझे तीनों लोकों का सामराज्य भी मिले, तो भी मैं इसे नहीं चाहता, तो केवल धर्ती के रा
01:00समय भावनाओं से नहीं, धर्म से निर्ने लो, क्या आपने कभी ऐसा द्वंद्व महसूस किया है, कमेंट में लिखें, जै श्री कृष्णा