00:00समाजिक चाल चलन में काफी लोगों को मैंने सुनते देखा है ग्यानी रावण, रावण एक ग्यानी था
00:05रावण को ग्यानी बोलना, मोटे तोर पर, काम चलाओ तोर पर तो ठीक है
00:12अपने आपको कुछ मान रहे हो, मैं लंकेश हूँ
00:17ज्यान होता तो अपने आपको कोई लंकेश थोड़ी बोलेगा, अपने आपको कोई पुरुष थोड़ी बोलेगा
00:21स्थिरी का पहरण थोड़ी ही करेगा
00:24ज्यान तो कहता है तो मैं इन में से कुछ भी नहीं हो
00:26ग्यान होता रावन को, तो अपने आपको और कुछ क्यों मान रहा होता?
00:30मैं असरों का समराठ हूँ, मैं सौन नगरी लंका का अधिपती हूँ,
00:36मैं एक कुरुश हूँ, और रानिया हैं, और मैं ला रहा हूँ,
00:40मैं सीता को भी ले आऊँगा और रानी बनाऊँगा,
00:42वो तो अपने आपको बहुत कुछ मान रहा था, जो अपने आपको इतना कुछ मान रहा है, वो ग्यानी कहा है, ग्यान इस्तिमाल सिर्फ हो किसलिए कर रहा है, ताकि जो मेरे उद्देश है, मेरी कामनाई है, मेरा हट है, वो सब और मस्बूत हो जाए, उसे ग्यानी नहीं बो
01:12झाल झाल