00:00फिल्म ये गुलिस्तान हमारा साल 930 में रिलीज हुई एक भारतिय हिंदी फिल्म है। इसे अतमराम ने निर्देशित किया था। फिल्म में देव आनंद, शर्मिला टैगोर, प्रान, सुजीत कुमार और जॉनी वॉकर जैसे बड़े कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभा�
00:30फिल्म की कहानी देशभक्ती, प्यार और इंसानियत के मेल से बनी है। इसमें दिखाया गया है कि भारत के पूर्वतर इलाके के कुछ हिस्से देश के बाकी हिस्सों से कटे हुए हैं। वहां के लोग बहुत भोले और सादे हैं। लेकिन गरीबी, अशिक्षा और पिछरे
01:00विजय को भेजती है। विजय को वहां एक पुल बनवाने का काम दिया जाता है जिससे लोगों का संपर्क बाकी भारत से हो सके। ये पुल सिर्फ पत्थर और लोहे का नहीं बलकि भारत के दिलों को जोडने का प्रतीक होता है। विजय बहुत इमांदार, साहसी और देश
01:30देशाएंग दोरानी के हाथ में हैं। देशाएंग दोरानी वहां के आदिवासियों पर हकूमत चलाता है। उसके पास तीन खास आदमी है। हाकु, तेजु और सूरेनी। ये सब मिलकर अपने लोगों को डराकर रखते हैं ताकि कोई भी सरकार की बात न माने। देशाए
02:00वहां गांव के लोगों से बहुत प्यार और सम्मान से पेश आता है। वहां उन्हें समझाता है कि ये पुल उनके लिए है जिससे उनके बच्चों को स्कूल जाने में आसानी होगी, व्यापार बढ़ेगा और जीवन सुधरेगा। लेकिन देंग दोरानी उन्हें भड़
02:30भी होती है। सूरेनी बहुत बहादूर और जिद्धी लड़की है। वहां अपने सरदार की वफादार होती है और सोचती है कि सरकार के लोग दुश्मन है। वहां और उसके साथ ही रात में पुल तोड़ने की कोशिश करते हैं लेकिन विजया और उसकी टीम उन्हें पक�
03:00नहीं खाना देता है, कपड़े देता है, और समझाता है कि वा दुश्मन नहीं है, बलकि उनका भला चाहता है।
03:05धीरे धीरे सूरेणी और उसके साथ ही विज्चे की सच्चाई को समझने लगते हैं।
03:10उन्हें महसूस होता है कि विज्चे जुटभां नहीं है।
03:14वह सच में उनके लिए पुल बनवारा है ताकि उनकी जिंदगी आसान हो सके
03:18विजय का सुभाव बहुत शान्त और सच्चा होता है
03:22वह किसी से नफरत नहीं करता यहां तक कि उनसे भी नहीं जो उसे नुकसान पहुँचाना चाहते हैं
03:27इसी दौरान डेंग दोरानी को पता चलता है कि उसके योध्धा विजय के प्रती चुकने लगे हैं
03:35वह बहुत गुसा होता है और अपने बाकी सैनिकों को आदेश देता है कि उन सब को खत्म कर दो
03:40विजय को भी और उन साथियों को भी जो अब सरकार के साथ है
03:43डेंग दोरानी के लोग हमला करते हैं लेकिन विजय और उसके साथ ही पूरी ताकत से उनका मुकाबला करते हैं
03:50इस लड़ाई में सूरेनी और उसके साथ ही विजय की तरफ से लड़ते हैं
03:56वे अपने ही लोगों के खिलाब जाकर सच्चाई का साथ देते हैं
03:59ये देखकर विजय को बहुत खुशी होती है
04:02क्योंकि उसे पता चलता है कि अब सच्चाई और इंसानियत की जीत होगी
04:06धीरे धीरे विजय और सूरेनी के बीच एक अनकहा रिष्टा बनने लगता है
04:12सूरेनी को विजय की इमानदारी और दिल की सफाई से प्यार हो जाता है
04:17वह देखती है कि कैसे एक बाहरी आदमी बिना किसी स्वार्थ के उनके इलाके में आकर काम कर रहा है
04:22विजय भी सूरेनी की बहादुरी और सच्चाई से प्रभावित होता है
04:26दोनों के बीच प्यार पनपता है
04:29लेकिन उनका ये रिष्टा आसान नहीं होता
04:31क्योंकि समाज और पडिस्थितियां उनके खिलाफ होती है
04:34दूसरी और डेंग दोरानी की नफरत पड़ती जाती है
04:37उसे लगता है कि अब उसका अंतकरीब है
04:39वहां आखिरी कुश करता है पुल को उड़ाने की
04:41वो अपने लोगों को उकसाता है कि अपुल उनके खिलाफ है
04:44और अगर इसे बनने दिया गया तो उनकी पहचान खत्म हो जाएगी
04:48लेकिन अब कई आदिवासी सच्चाई समझ चुके होते हैं
04:50विडेंग दोरानी का विरोध करते
04:52फिल्म के आखिरी हिस्से में एक बडाटा कराव होता है
04:55डेंग दोरानी और उसके लोग पुल पर हमला करते
04:59जबकि विजे और उसकी टीम उसे बचाने में जुड जाती है
05:02सूरेनी भी विजे के साथ लड़ती है
05:04गोलियों की आवाज आग और अफरात अफरी के बीच
05:08इंसानियत और बरबरता की जंग चलती है
05:10आखिरकर विजे और सूरेनी की कोशिश से पुल बच जाता है
05:14और डेंग दोरानी को हरा दिया जाता है
05:17जब धूल छंटती है तो पुल मजबूती से खड़ा होता है
05:34सूरेनी और विजे की आँखों में गर्व और खुशी जलकती है
05:38फिल्म का संदेश बहुत सुन्दर है
05:40अगर प्यार और समझदारी हो तो कोई भी दूरी मिटाई जा सकती है
05:45विजे ने ये साबित कर दिया कि बंदूक और हिंसा से नहीं है
05:49बलकि इनसानियत और सचाई से दिल जीते जाते है
05:52देवानंद ने विजे के किरदार को बहुत ही भावनात्मक और इमानदार तरीके से निभाया है
05:57शर्मिला टैगोर ने सूरेनी के रूप में एक आदिवासी लड़की का किरदार बहु भी निभाया है
06:04जो शुरुआत में दुश्मन होती है लेकिन बाद में प्यार और सचाई की ताकत से बदल जाती है
06:09प्राण ने डैंग दो रानी के रूप में डर और सत्ता का रूप दिखाया है
06:13फिल्म में S.D. बर्मन का संगीत कहानी की आत्मा को और गहराई देता है
06:19खास्तोर पर मेरा नाम आओ गीत ने उस समय बहुत चर्चा बटोरी थी
06:23हलांकि ये गीत नगालैंड की एक जन्जाती के लिए विवाद का कारण बना
06:28लेकिन फिल्म का मकसद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं
06:32बलकि एकता और इंसानियत का संदेश देना था
06:35फिल्म ये गुलिस्तान हमारा अपने नाम की तरह ही एकता
06:38प्यार और देश भक्ती का गुलिस्तान है
06:40ये सिखाती है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता और एकता में है
06:46जब अलग-अलग संस्कृती, भाशा और परंपड़ा के लोग एक दूसरे को समझते हैं
06:51तभी देश सचे मायनों में मजबूत बनता है
06:53ये कहानी ये भी दिखाती है कि बदलाव लाने के लिए हतियार नहीं
06:57बलकि दिल की सच्चाई चाहिए
06:58विजय की मेहनत और सूरेनी का परिवर्तन ये साबित करता है
07:03कि नफरत से बड़ी कोई ताकत नहीं
07:06बलकि प्यार ही असली जीत दिलाता है
07:08अंत में फिल्म ये संदेश देती है कि अगर इनसान चाहे तो
07:11हर दिवार को पुल में बदल सकता है
07:13हर दूरी को मिटा सकता है
07:15और हर दिल को जोड सकता है
07:17यही असली देश भकती है
07:19यही ये गुलिस्तान हमारा का सच्चा अर्थ है