00:00सर जी प्रशने में रहे हैं कि सर में प्रशने ही ने कर पाता हम सर आग बढ़ी हिमत से क्या प्रशने है प्रशने क्या करना है सर बजपन से समझने दें कि प्रशने करना कैसे नहीं है प्रशने तो मत करिये जब आप बात कर दें तो समझ में आ रहा है तो यह जो आपको आपक
00:30जो भीतर चीज है, वो अनपर्खी रह जाती है, जब आप उसके बारे में कुछ बोलते हो, किसी दूसरे को बताते हो, तो लिए दूसरे को मत बताईए, आप आइने को ही बता लीचे, और जब आप बोलना बताना शुरू करते हो, तब पता चलता है कि कितना समझ में आया, न
01:00बोलना चाहिए, परिक्षा भी इसी लिए होती है, जब तब आप लोग फूसरे को एक्सप्रेस नहीं करता है, तब तब यह समझ में लिया कि समझा इकना समा, और कैसे पता चलेगा, जो भीतर आपको लग रहा है, कि समझ में आ चुका है, उसको जब आप आप बाहर रखो
01:30हमेशा है, यह समझ में बहा गया है
01:39और उससे पता भी होता है, कि समझ में दाद आजा नहीं है, उसलिचा कि बाहर जाओ, भोलो, बात करो, तो छुपता है, नशीक पनी आकर बोलेगा, नशीक किसी से बातचीत करेगा, क्योंकि हो यह सब कुछ कर देगा,
01:56कुछ कर देगा तो उसकी पोल खुलने का डर रहेगा ना तो ज्यादा तर लोग अगर सुनेंगे अभी तो बस ऐसे ही सुन लेंगे और सुनने के बाद सुने हुए वो बातने और नहीं निकलेंगे नबात करने निकलेंगे
02:12अगर दभी सी
02:14सबस्क्राइब लोग्त