00:00मैं इस वक्त दुनिया के दूसरे सबसे ठंडे रहाशी इलाके द्रास में खड़ा हूँ
00:04इस वक्त यहां पर तापमान मैनस 18 डिग्री है जिसका अंदाज़ा आपको इस दर्या के बहाव से लग सकता है
00:13तेज बहाव है इसलिए थोड़ा पानी इसमें दिखता है लेकिन इस दर्या में गर्मियों के दौरान इतना तेज बहाव होता है कि इस दर्या की और कोई आने की हम्मत भी नहीं जुटा सकता
00:24लेकिन अब किनारों पर पूरी तरह से ये तेज बहावाली नदी भी जम चुकी है
00:31लद्दाक में सर्दियों के दोरान ऐसे तेज बहावाली दर्याओं पर चादर ट्रैकिंग होती है
00:38याने दर्या जम जाने के बाद उन पर जो मोटी बरफ की परफ जम जाती है दिन रात उस पर चला भी जा सकता है और उस पर ट्रैकिंग भी की जाती है
00:51काफी लोकप्रिय है इस पूरे छेतर में चाहे जन्सकार हो करगिल हो या फिर द्रास
00:57यहां पर यह चादर ट्रेकिंग आम लोगों खासतों से अडवेंचर टूरिजम की रुची रखने वालों में काफी लोकप्रिय होता है
01:05यहां पर पूरा जन्वरी का महीना जो है दिन रात तापमान शूनिस से नीचे रहता है
01:12रात का तापमान कल रात को माइनस पचीस डिगरी तक लुड़का है लेकिन आने वाले दिनों में यह तापमान और भी नीचे जा सकता है
01:21लेकिन अगर यहां पर बात की जाए तो पूरी तरह से जन जीवन जो है वो ठप पड़ा है
01:26यहां के वहन हो यहां की गारिया हो सब बंद पड़ी है क्यूंकि वो भी जम चुकी है
01:32और उन्हें अब जाके मार्च के महीने में ही यातायात के लिए दुबारा काम पे लाया जाएगा
01:39लेकिन फिलहाल अगर हम बात करें तो यह ठंड जो है बहुत है लेकिन बरफबारी उतनी ज्यादा अभी पहाड़ों पर भी नहीं हुई है
01:47पिछले कुछ सालों के दौरान मौसम में काफी बदलावा रहे हैं ठंड में कोई रिलीफ तो नहीं है लेकिन बरफबारी कम हो रही है और मौसम के मिजज भी बदल रहे है जब दसंबर के महीने में ज्यादा कराके की ठंड होनी चाहिए थी वो अब जनवरी में होके आती ह
02:17हैं बनते हैं और गर्मियों के दोरान वही फिर पानी का सादन उपलब्द कराते हैं नदियों और नालों में मुज़फर रहमत के साथ अश्रफवानी द्रास आज ज़िए