00:00वो दिसंबर की एक नहायत सर्द रात थी।
00:03रावल पिंडी की पुरानी आबादी की एक तंग सी गिली में वाके दो कमरों का खस्ता हाल मकान बाहर से
00:08चाहे जितना ठंडा दिखाई देता हो अंदर एक और तूफान बरपा था।
00:13बाई तर्फ के छोटे कमरे में तीन कमजोर सी लड़कियां सुरया साइमा और ननी मर्यम चुप चाप बैठी थी। आखों
00:21में खाब भी थे और डर भी। दिल की गहराईयों से बस एक ही दुआ निकाल रही थी।
00:26ए अल्ला, इस बार भाई हो। अगर फिर बहन हुई तो अबू बहुत नाराज होंगे। फिर वही सब होगा जो
00:35हमेशा होता आया है।
00:37खामोशी ऐसी थी जैसे सांस लेना भी गुना हो मगर फिर अचानक खामोशी तूट गई। पास वाले कमरे से एक
00:44नौजाइडा की कमजोर सी रोने की आवाज गुंजी।
00:46तीनों बहने चौन के नजरें दर्वाजे की तरफ उठ गए। कुछ ही लम्हे बाद दर्वाजा आहिस्तिगी से खुला।
00:54दाई अम्मा की जुरियों भरा चेहरा अंदर ज्हांका और होंटों पर एक कमजोर सी मुस्कराहत थी।
01:00सकीना बीबी मुबारक हो। बेटी हुई है। सकीना जो बिस्तर पर निधाल लेटी थी अपने आंसु जब्त ना कर सकी।
01:09ठकी हुई आंखें दाई अम्मा की तरफ उठीं जबान कपकपा। कैसी मुबारक बाद दाई अम्म।
01:16रशीद को अगर पत्ता चला के फिर बेटी हुई है। वो तो कियामत था देगा। इसने जाते वक्त कहा था
01:23इस बार बेटा ना हुआ। तो सब को घर से निकाल दूँगा। दाई अम्मा ने प्यार से नौजाइदा को कंबल
01:31में लपेट कर सकीना की गोद में रखा और धी
01:34बेटा हो या बेटी ये तो रब की अता है। रशीद को समझाओ खुदा का खौफ करे। जिहें बेटिया नहीं
01:42मिलतें वो तडबते हैं। ये रहमत है बोज नहीं। मगर सकीना का जहन अब कुछ भी समझने सुनने के काबिल
01:50ना था। वो गोद में लेटी ननी सी बच्च
02:02आएं। आखों में मासूम सा शौक लिये बोले। उम्मी, क्या हमारा भाई हुआ है। सकीना खामोश रही सिर्फ देखती रही
02:13अपनी बच्चियों को। फिर आंसु साफ करते हुए जबरदस्ती मुस्कुराई। नहीं मेरी जान। इस बार भी तुम्हारी बहन हुई है।
02:22नन्दी मर्यम जो अभी सिर्फ चार बरस की थी, खुशी से नई बहन के चहरे पर जग गई, बार बार
02:28चुमती रही। उम्मी बेबी का नाम किया है। सकीना ने धीरे से जवाब दिया। रिदा। रिदा नाम है तुम्हारी बहन
02:38का। मगर दिल में एक तूफान था, रशी
02:52आने वाले वक्त को देख रही हो। और रिदा, छोटे से कंबल में लिप्टी वो नन्नी जान, अभी से अपने
03:00वजूद की कीमत चुकाने के लिए दुनिया में आई थी। अगले दिन दोपहर को रशीद घर आया। तीनों बच्चियां रिदा
03:07के साथ खेल रही थी और सकी
03:09सकीना किचन में मसरूफ थी। दर्वाजा जोर से बंद हुआ, धरान। सब सहम गई रशीद घुसे से लाल चहरा लिए
03:17खड़ा था। सकीना बाहर आई कुछ बोलने लगी ही थी के रशीद धरा। बक्वास बंद कर। कहा था बेटा चाहिए
03:26मगर तो तो हर बार नहुसत ल
03:39अरे बस में नहीं ये सब अल्ला के फैसले हैं। रशीद चीखा, बस कर मौलानी, तो मनहूस है बेटा कभी
03:47नहीं दे सकती। और फिर दर्वाजा जोर से बंद करके चला गया। वक्त गुजरा रशीद का रवया बत्तर होता गया।
03:56बात बात पर मारपीच चीजें तोड़
03:59पर जल्म आम हो गया। तंग अकर सकीना ने कपड़े सीने शुरू किये और उन्हीं पैसों से बच्चियों को सरकारी
04:06स्कूल में दाखिल करवा दिया। फिर एक दिन अल्ला ने करम किया। सकीना के हाँ जड़वा बेटे पैदा हुए। रशीद
04:15की खुशी दीदनी थी जै
04:30अहिस्ता आहिस्ता सलीम और करीम भी बाप जैसे हो गए। बाप की नफरत बेटों की फितरत बन गई। चारों बहने
04:38अपने छोटे भाईयों से बड़ी थी मगर सलीम और करीम ना उन्हें बहन मानते ना उनसे इज़द से बात करते।
04:44सकीना कुछ कहती तो रशीद ही इस प
04:59वो बिफर गया मगर फिर इस शर्त पर मान गया कि सलीम और करीम घर में इसके साथ रहेंगे। यूं
05:05सकीना और बेटियां रवाना होने लगें। इतवार की सुबह दर्वाजे पर खड़ी सकीना ने जाते जाते कहा। रशीद बच्चों का
05:13ख्याल रखिएगा। हाँ हाँ म
05:28की तरह खामोशी ही मिली। बस रवाना हुई। सकीना की गोद में रिदा सो रही थी। बाकी बच्चियां हंस्ती मुस्कराती
05:36सफर की तैयारियों में मगन थी। मगर किस्मत को कुछ और मन्जूर था। ड्राइवर को उंधा गई। बस बे काबू
05:44होकर लड़कर आई और च
05:58बाकी तीनों बेकियां इसकी बगल में बेजान पड़ी थी। फिर सकीना की आँखें भी हमेशा के लिए बंद हो गई।
06:05रशीद होटल में खाना खा रहा था जब इसे इत्तिला मिली। तीन बेकियों और बीवी की मयतें घर आ चुकी
06:12थी। रिदा जो जिन्दा बच गई �
06:14ही रोती रही। सलीम और करीम भी कुछ देर रुए। फिर चुप हो गए। तीन दिन बाद घर खाली हो
06:22गया था। रशीद सलीम और करीम को साथ ले जाता रिदा को अकिला छोड़ कर। इसका वाहिद सहारा था किताबें।
06:31वक्त गुजरता गया। सलीम और करीम बिजनस मे
06:35लग गये रशीद बुड़ा हो गया। और रिदा नर्सिंग ने अखरी साल की तालबा बन गई सकालरशिप पर। अब रशीद
06:44को फिक्र थी। अपने उलाद की खुशिया देखने की रशीद ने दिल में सोचा अब वक्त आ गया है बेटों
06:50की शादी का। बेटा अब तु
07:05और आपको शादी करानी ही है तो उसकी कराई जो किचन में बैठी है। इसकी उमर की लड़किया तो दो
07:11बच्चे संभाल रही है और एक ये है जिसकी पढ़ाई खत्म होने का नाम नहीं लेती। करीम ने भी हा
07:18में हा मलाई ये पढ़ी लिखी बेगम साहिबा करेगी किया।
07:22आखिर में यही जाड़ों पोंचा ही तो करेगी। बहतर है जल्दी से रुखसत कर दें। किचन में खड़ी रिदा उनकी
07:30बातें सुनकर खामोशी से आंसु बहा रही थी। वो सब बरदाश्ट कर चुकी थी लेकिन आज कुछ ज्यादा ही तूट
07:36गई थी। रशीद ने ब
07:52बढ़ाओं। सलीम हंसा, कौन? वो जो बचपन में बोल नहीं पाता था। हम तो इसे गुंगा कहते थी। करीम ने
08:01कह कहा लगाया तो ये मैडम कौन सी बोलती है। परफेक्ट जोड़ी है। रशीद भी साथ हंसने लगा जैसे बेटी
08:09का दुख इसे चुही नहीं रहा हो।
08:11किचन में रिदा ने आंसु पोंचते हुए दिल में कहा, मैं क्यों रू रही हूँ? ये सब तो रोज होता
08:18है। अगली सुबह रशीद ने रिदा से कहा, आज कालिज मत जाना तुम्हारे रिष्टे वाले आ रहे हैं। रिदा ने
08:25खामोशी से सर हिलाया। जैसे अपने खा�
08:38जानती थी, कोई सुनेगा भी नहीं। जाहिद अश्वाक का बड़ा बेटा था जिससे रिदा की शादी ते हुई। अश्वाक और
08:46उसके बेटे अपनी शराफत और सच्चाई की वज़े से जाने जाते थे। दर्मियाने तबके का खानदान था लेकिन दिल के
08:53बहुत अमी
08:55अश्वाक ने रिष्टा कुबूल किया और जहेज अकिसी मतालबे से इंकार कर दिया। अपने हमें इतनी प्यारी बेटी दी है
09:02हमें और कुछ नहीं चाहिए। नाइला और उसकी मा के साथ जाकर रिदा ने चंद जुड़े और जरूरी सामान खरीदा।
09:09जुमे के दिन सा�
09:22है का ना सवाल था ना उमीद। लेकिन रिदा के नसीब में अल्ला ने कुछ और ही लिख रखा था।
09:29एक हफ़ता बाद रिदा को यकीन हो चला था कि वाकी सब मर्द एक जैसे नहीं होते। जाहिद महबत करने
09:36वाला ख्याल रखने वाला शोहर था। अश्वाक इसे बेटि
09:52मुझे लगा आप और अबू मना करेंगे। जाहिद मुस्कुराया। अबू ने तो पहले ही कह दिया है कि अगर तुम्हें
09:59रोकने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। इसकी आंखें नम हो गएं। इसे ये सब किसी खाब
10:07जैसा लग रहा था। अल्ला ने �
10:21अब वो दोबारा चाय के कप के साथ अपने बेटों की तरफ मतवज्य हुआ। बेटा अब दिल चाहता है तुम
10:27दोनों को भी अपने घरों का करलू। अपनी जिंदगी में तुम्हें आबाद देखना चाहता हूँ। एक शाम चाय के कप
10:33के साथ रशीद ने बेटों से कह�
10:39. . . . .
11:10रशीद ने अपनी जमा पूंजी लगा कर नया घर भी खरीद लिया
11:14बस एक काम नहीं किया, रिदा को ना बुलाया ना इत्तिला दी
11:18रिदा कमरे में बैठी थी जब जाहिब इस चुपके से आया और आहिस्ता से कहा
11:23तुम्हें पत्ता है, तुम्हारे भायों की शादियां हो चुकी है
11:27वो लोग महला भी छोड़ गये है
11:31रिदा का दिल जैसे एक लमहे को थम गया
11:34क्या, मुझे तो किसी ने कुछ नहीं बताया
11:37फिर बस एक अधूरा अच्छात कहा और खामोश हो गई
11:42आखों में बे आवास सा सवाल तीर रहा था
11:45उधर रशीद नए घर में बेटों और बहूं के साथ मुन्तकिल हो चुका था
11:50अब्तिदा में सब ठीक रहा लेकिन एक रात जब रशीद मसलसल खासता रहा
11:54तो दर्वाजे के पीछे से बहु की आवास गुंजी
11:57ये हर वक्त खांसते रहते हैं मुझे अब ये सब बरदाश्ट नहीं
12:01आ उन्हें कहीं और ले जाओ या मैं यहां नहीं रहूंगी
12:05रशीद वहीं दर्वाजे के करीब खड़ा सब सुन रहा था
12:09हर लफस इसके दिल पर चाकू बनके लगा
12:12कुछ दिन बाद असलम और करीम ने दुबई मुन्तकिल होने का फैसला किया
12:16और अपनी बीवियों से कहा
12:18हम अबू को साथ ले जाना चाहते हैं
12:21दोनों की बीवियों ने दो टोक कहा
12:23अगर उन्हें साथ ले गए तो हम साथ नहीं जाएंगी
12:27रशीद जिसने अपने बेटों के लिए सब कुछ किया
12:30दोनों बेटे इसे ओल्ड एज हम में छोड़ कर जा रहे थे
12:34रशीद ने बेटों से कहा
12:35बेटा मैं तुम दोनों के बगएर नहीं रह सकता
12:37मगर बेटों ने बाप की बात को नजर अंदास कर दिया
12:40रशीद समझ गया कि अब बेटे इसे मजीद बरदाश्ट नहीं कर सकते
12:44वो इसके बाद कुछ ना बोला
12:47ओल्ड एज हम की दिवारों के पीछे रशीद अकिला रह गया
12:51खिल्की के पास बैठा रहता शायद किसी चहरे किसी आवाज का इंतिजार करता
12:56ना किसी से बात करता ना खाने को हाथ लगाता
13:00बस दिल ही दिल में एक पच्टावा दोहराता
13:03मैंने रिदा के साथ जियादती की इसका दिल तोड़ा
13:07इसी लिए मुझे ये सजा मिली दूसरी तरफ रिदा अब नर्स बन चुकी थी
13:11कुछ ही हफतों बाद रिदा की ड्यूटी ओल्ड हाउस में लगी
13:15जब वो अंदर दाखिल हुई
13:16तो इसने एक कोने में बैठे बूड़े शखस को देखा
13:18जिसका चहरा उदासी से जुका हुआ था
13:21कुछ लम्हे को वो ठिटक गई
13:23ये चहरा
13:25नहीं
13:26क्या ये वाकी
13:27वो धड़कते दिल के साथ
13:29इसके करीब गई जुकते हुए नर्म आवाज में बोली
13:32अबू जान
13:34मेरी तर्फ देखें
13:36रशीद ने सर आहिस्ता से उपर किया वही चहरा
13:39वही आंखें
13:41और सामने खड़ी थी
13:43रिदा
14:02रिदा अपने बाप को ओल्ड हाउस से घर ले आई
14:11जैसे कोई खजाना वापस मिल गया हो
14:13इसने रशीद की खिदमत की हर लमहा इसका ख्याल रखा और रशीद
14:17अब हर लमहा अपनी बेटी के चहरे को देखता रहता
14:20उन्खों में सुकून और दिल में एक गहरी नदामत के साथ
14:24इसे अब खूब समच आ चुकी थी के बेटीयां जहमत नहीं
14:29अब आपको पसंद आई हो तो बराह करम इसे लाइक करें
14:34अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और अपनी कीमती राय कमेंट्स में जरूर दें
14:38क्योंकि आपकी महबत और होसला अफजाई ही हमारी असल ताकत है
14:43शुक्रिया