00:00आप गाड़ी चलाते हैं कोई?
00:02स्कूटर
00:02कई बार हुआ होगा अप थकी होंगी
00:04पर कहीं जाना है तो जा रहे हैं ना?
00:07बस वैसे ही
00:08ठकान का अनुभाव तो है ना?
00:10कई बार हुआ होगा भूग लगी है
00:12खाना छोड़ करके उठी होंगी
00:14अपना स्कूटर लिया कहीं पहुचना है
00:16तो अनुभाव तो हो ही रहा है
00:17पेट तो कह रहा है
00:18पर अनुभाव से आगे कुछ और ज़्यादा जरूरी है
00:22ते बार तो नीद आ रही होती है
00:24रात में दो बजे, चार बजे
00:26आप गाड़ी चला रहे है, नीद आ रही है
00:27आप रुख जाते हैं, आप पानी के छीटे मार लेते हैं
00:30आप कुछ चाय वाई पी लिया, आपने कुछ गाना लगा दिया तेजी से
00:33पर आप ये थोड़ी कहते हैं कि चलो सुई जाते है
00:36क्यों? सुबज है बजे कहीं पहुचना है, कोई काम है भई, नहीं रुख सकते ऐसे
00:42और उब बड़ा तकलीफ का काम होता है, जब नीद आ रही हो
00:45उस वग गाड़ी चला ना, पता नी किसको वह अनुभा हुआ है
00:49पर अनुभाव के, मैं ये नी कह रहा कर ले ना, भिड़वन मत जाना है
00:53आचार जी ने कहा था अनुभाव पर ध्यान दे नहीं नहीं है
00:57और जब भिडने का अनुभाव होगा उस पर कॉम्त
01:02गुर जी एफका नाम सुना है
01:05उन्होंने करा था ये
01:06उन्हें गा था, मैं देखूँ कि मैं केस हद तक अपना साक्षी हो सकता हूँ
01:10तो पूरी स्पीड से लागे नुभाव अपनी कार भिडा दी
01:13और टूट टाट गए
01:15और जो भी उन्हों निशकरश निकाला हो
01:16जानबुज के गार भिड़ा दी अपनी
01:19आप नहीं करेंगे ये
01:20बिलकुल नहीं करेंगे, बोद कार ये
01:23ये
01:27समझ मैं आ रही ये बात
01:29थोड़ा
01:29खुद को जीतना सीखो
01:31अब ये सब कि
01:34बेचैनी होती है, क्या होता?
01:35रहे होती है बेचैनी, क्या करना है?
01:38शरीर पर भी खुजलियां होती हैं भीतर भी खुजलियां होती हैं उसी का नाम बेचैनी हर्जमें खुजलाएंगे थोड़ी
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