00:08इस प्रकार का निर्णे है इसका कारण अब भारत में अंग्रेजों का राज नहीं है और भारत में स्वतंत्र भारत
00:20के संसद ने जो निर्णे लिया वो निर्णे सव्वेधानिक होता है
00:24और स्वतंत्र भारत के जो हमारी परलेमेंट है उसने लिये हुए निर्णे को हम नहीं मानेंगे गुलामी की परंपरा को
00:36कायम रखेंगे
00:37हम हमेशा कहते थे यह मानसिक गुलाम है इन्होंने अपनी मानसिक गुलामी और सव्विधान की खिलाफत यह दोनों चीजे इसके
00:48हमारे सामने प्रस्ता भी बहुता है देखें चात्रों की गुंज है या राहूल गांदी अपनी जमीन तलाश रहे यह तो
00:56मैं नहीं जानता �
00:57लेकिन जो मुझे जानकारी है अगर वो एक ओपन इस प्रकार का इवेंट करते तो शायद यह चात्रों से सववाद
01:09होता अभी पूना और पूना के असपास जितने कॉंग्रेसियों की संस्थाए है शिक्षा संस्थाए उन संस्थाओं की ही लड़कियों को
01:21रेजिस्टर कर
01:22पूना इस प्रकार का आदेज दिया गया है उनका ही रेजिस्टरेशन करके उनको ही वहाँ पर एंट्री मिलने वाली है
01:30तो कुल मिलाकर एक कंट्रोल्ड एंवाइरमेंट में ये कारेकरम होने वाला है और जो आईडियोलोजी को मानते है ऐसे ही
01:41लोग वहाँ आए ऐसा प्र
01:52पाया गया उनके साथ ये मुनोलोग है ऐसा में कहना चाहिए चिन्ना के असली वहांसज या वारिस ये मैं लगातार
01:59कह रहा हूं लेकिन अब तो ये चीज़ें प्रमानित हो गई
02:04क्या है कि बंकिम बावू का गीत बंदे मातरम जो है ये आजादी के आंदूलन का एक ऐसा जून बन
02:16गया जोस बन गया जिसमें की जो सुतनत्ता सेनानी थे जो आजादी के वीरवाकुरे थे वो फासी के फंदे पर
02:25भी बंदे मातरम गाते वे जो है जून जाते थे
02:29तो बंदे मातर में एक बड़ा सेंबल बन गया अंग्रेजों को हटाने के लिए
02:35जब इस आंदोलंग ने जोर पकड़ा
02:39तो 1937 में कई एक जगह ऐसा हुआ कि कॉंग्रेस और मुस्लिम लीग मिलकर सरकार बनाना चाते थे
02:47या कॉंग्रेस को 1937 का जो सम्वित सरकार की एक जगह बनी उस चुनाओं में एक दिखाई दिया कि मुस्लिम
02:55लीग जो है प्रभावी है
02:57और मुस्लिम लीग के साथ या मुसल्मानों के साथ अपना एक समझोता होना ची
03:04जिन्ना ने कहा कि सर तेख है कि ये जो बंदे मातरम है ये गाना बंद करना प्रभाई ये उन्होंने
03:12इसके उपर खुलियाम खिलाफत की और मुस्लिम लीग ने अपना रिजॉलिशन लिया अगत सितंबर 1937 में
03:20इसके बाद नेहरू जी को लगा कि नहीं मुसल्मान का बोट चीए मुसल्मान का बोट चीए और उन्होंने एक कमिटी
03:27फॉर्म कर दी कि बंदे मातरम गाना चाहिए या नहीं गाना चाहिए
03:32सुवाज संद्रबोस उस वक्त बहुत प्रभाबी थे 37, 37, 49 आपको पता है तो पार्टी के अध्याज़ भी बने गान्दी
03:39जी के विरूद के बाद जूद भी बने उन्होंने इसका फुल्याम विरूद कि लेकिन नहरू जी इतने मुसल्मान से अपसेस्ट
03:48थे
03:49कि उन्होंने फाइनली अक्टूबर 1937 की जो कारे समयती है उसमें एक कमीटी बनाकर ये तही कर दिया कि ये
03:56मुसल्मान धर्म के खिलाफ है मुसल्म को ये अच्छा नहीं लगता है और इस कारण से इसका दो इस्टेंजा गाना
04:03है
04:04जैसे ही मुसल्म लिग को लगा कि हमारी बातों से कॉंग्रेस प्रभावित हो रही है ये देश प्रभावित हो रहा
04:10है आपको पता है कि उसके बाद
04:121940 से लेके 1946-1946 तक का जो मुद्दा रहा डिरेक्ट एक्षन भी हुआ आपको पता है कि 14-15
04:21अगस्त उने
04:221946-1946 को जो है डिरेक्ट एक्षन हुआ कलकता में यंदूओं का नरसंदार हुआ और भारत का विवाजन हो आज
04:30कॉंग्रेस कारी समीती जो
04:32अक्टूबर 1937 में जो कॉंग्रेस कारी समीती ने रिजोलिशन पारित किया था सुभास संद्र बोस के खिलाब उसको फिर से
04:42सोनिया गांधी जी खरगे साहब और राहुल गांधी जी का नेत्रिक इन लोगों ने मिलकर फिर से कहा कि कानून
04:50जो कुछ भी हो जाए देस भाण
05:02नहीं खैटम हो जाएका देस का कानून अच्छा है का कराब है देस का कानून सब मानता है आप नागरिक
05:07को देस के संबेदान के खिलाब बढ़काना बाबा साहब अमेदकर के खिलाब बढ़काना और जो सिच्वेशन पै liaison करना कि
05:14देस फिर से भी वाजन के कगार पर पहुं
05:31प्राजनिती कॉंपर्स करें.
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