00:00में अंग सब खेलो इंडिया का नया इनिशेटिव पंदन पोट्स पॉर पीस और डेवलोपमेंट इसके जबूरत क्यों पड़ी और इसका
00:06लार्जर विजिन क्या है देखिए सबसे पहले तो यह लगा भारत सरकार को की सभी जगह पे खेलों का कोई
00:13एक इस्टिटूशनल सप
00:16सपोर्ट नहीं है तो खेलो इंडिया सेंटर हिएलो इंडिया स्टेट सेंटर आव एक्सलेंस की योजना उन्होंने इसमें डाली खेलो इंडिया
00:25संटर human he capon
00:28तो खेलों का इस्टिटूशन सपोर्ट नहीं है तो हर डिस्टिक्ट में एक खेलो इंडिया सेंटर होगा कम से कम एक
00:35खेलो इंडिया सेंटर होगा तो भारत के करीब 750-780 डिस्टिक्ट है अब सारे जगहों पे खेलो इंडिया सेंटर है
00:43खेलाडी के पास एक जगह है जहां हो
00:58कोच की समस्य है पुरे देश में तो कोच कैसे आएंगे इतने सेंटर होंगे तो तो जो पुराने खिलाडी है
01:05वो उनको हम पास्ट चैंपियन एथलीट बोले उनको हम ऑन बोर्ड करें एज़कोच और उनको उनका पैसा भारत सरकार देगी
01:14तो हर जगा इस्टिटूशनल सपो
01:32सब्सक्राइब को सारी चीजों का पैसा भारत सरकार देगी हर राजी को बोला गया कि आप एक इस्टिटूशनल सपोर्ट का
01:43सिस्टम उन्होंने खड़ा किया अब यहां सा जो खेल रहे हैं उनको एक ऐसा प्लैटफॉर्म चाहिए जहां वो अपनी प्रतिभा
01:55को निखार सक
01:56तो खेलों इंडिया गेम्स का वो शुरू हुआ हम पहले खेलों इंडिया पैरा यूनिवर्सिटी यूथ और विंटर गेमी चार गेम
02:06कराते थे हमारे खेल मंत्री डॉक्टर मंसुक मांडविया जी की प्रेणा से अब हम 11 तरह के खेल कराते हैं
02:13डॉक्टर मंसुक मांडविया की यह उजना थी कि खेलों को हम सिर्फ खेल तो हम करा रहे हैं लेकिन वहां
02:20से निकाल करके हम ऐसी मार्जिनलाइज कम्यूनिटी को हम समुदायों की और ले जाएं जिनको अब तक ऐसे उसर नहीं
02:27प्राप्त होते हैं
02:28हम ऐसे भवगोलिक शेत्रों में ले जाये जहाँ पहसे था क हैं घेल नहीं पहूंच पाा रहा था Кंप नहीं
02:34पहुच पा रहा था का मतले लेका और ब्ली ढंग से एक
02:37इंटरनेशनल लेवल का जो एक खेल आयोजन है वैसा नहीं पहुंच पा रहा था तो हमने इंस्टिटूशनल सपोर्ट दिया उनको
02:45कॉंपटिशन सपोर्ट दिया यहां पर खेलाड़ी खेलते हैं उनकी प्रतिभान करती है
02:49competitive skill बढ़ती है अब यह होता है कि इन में से कुछ ऐसे खेलाड़ी होंगे जो आगे जा सकते
02:55हैं तो खेलों इंडिया
03:21वहां के लिए उसको competition support, nutrition support, उसके लिए पैसा उस institution को देती थी, इसी sense में उनको
03:30ये भी लगा कि हम सारा हम लोग तो करनी पाएंगे, जो private sector के लोग हैं को भी support
03:35करना चाहिए, तो खेलो इंडिया accredited academy शुरू की गई,
03:38तीन सो के करीब खेलो इंडिया accredited academies है, private academy, गोपी चन जैसे लोगों की, अन्जू बबी जॉर्ज, पी
03:44टी उसा जैसे लोगों की, तो इन लोगों की academies को अगर यहां पे खेलो इंडिया अध्लिया प्रैक्टिस करते हैं
03:51तो उनको support देंगे, अब ये खिलाडी जो बन गए है
03:54तो वो elite level पे आगे जाएंगे, तो tops जैसे scheme थी भारत सरकार के पास, जो एक तरह से
04:01जो भी मांगेगा खिराडी वो मिल जाता है, नीरत चोपडा, मनुभाकर जैसे लोगे सब इसमें tops जैसे scheme का भी
04:08मदद लिए, तो ये 360 degree support आपने देखा कि starting from a grassroot level उनको पूरा elite level तक
04:15पहु
04:24नियमित रूप से और ये बहुत ही संतुलित रूप से और ये बहुत ही संगठित रूप से नहीं पहुचा है,
04:32तो स्पन्नन का एक उसमें scheme में थी, इसको हम कह सकते हैं कि एक vertical था, inclusivity का, तो
04:42inclusivity में border areas को chain किया गया, हम लोग जानते हैं कि border areas में बहुत सारी चीजें नहीं
04:48प
04:52सक्षेत्र हैं, ये एक विशेष scheme थी, कि हम वहां के लिए हम competition support दे सकते हैं, तो हम
04:58उसकी funding करते हैं, CAPF जो हैं Central Armed Police Force, वो लोग इसके लिए ready भी हैं और उन
05:04लोगों ने बहुत सारे खेलों का आयोजन भी किया, हम उनके बहुत ताभारी हैं, और साथी साथ, अभी भारत सरका
05:10कार के एक scheme है, जिसको हम लोग vibrant village कहते हैं, तो वही सीमानत भारत के जो international border
05:17है, वहां से जो पिछले गाओं का chain करके उनको vibrant villages बनाया गया है, वहां पर हम खेल का
05:22आयोजन कर रहे हैं, तो जनता न सिर्फ खेल करके उन constructive गतिवधियों में लिप्त हो रही है, बलकि वहां
05:28से प्र
05:40समस्या हैं, थोड़ा आतंकवाद की समस्या है, तो अगर माहवादी आतंकवाद से जूज रहे हैं, शेत्र हैं, वहां पर भी
05:48हम ऐसे आयोजन कर सकते हैं, और जनता को एक मौका दे सकते हैं, कि वह tension वाले महौल से
05:55निकरके थोड़े रोमांच वाले महौल में आए.
06:10क्याओं चरह बाचंट निकर से जायोजन कर से आतंक की समस्या हैं, वहां अगर थाम रभ एन ये वहां प्रोंका
06:10से लोग़े.