00:00तो चलिए सीधे मुद्दे पर आते हैं
00:01आज के इस विशलेशन में हम एक ऐसे विशे की गहराई में जाने वाले हैं
00:05जो सीधे तोर पर भारत की राष्ट्रिय सुरक्षा और रक्षा नीती के दिल से जुड़ा है
00:09देखी भारत अपनी रक्षा नीती में एक बहुत बड़ा और सच कहूं तो बेहत समवेदनशील बदलाव कर रहा है
00:15ये कोई छोटा मोटा फैसला नहीं है बलकि एक ऐसा एतिहासिक कदम है जो भारत की परमाणु प्रतिरोधक शमता
00:21यानि हमारे न्यूक्लियर डिटरेंट के निर्माण के पूरे तरीके को जड़ से बदल कर रख देगा
00:26दशकों से जो एक बेहत सक्त और बंद विवस्ता चली आ रही थी वो अब एक बिलकुल नए यूग में
00:31कदम रख रही है
00:32तो यहाँ सबसे एहम बात ये है कि इस एतिहासिक बदलाव के पीछे कोई राजनीतिक विचारधारा या किसी खास एजेंडे
00:40का हाथ नहीं है
00:41बिलकुल नहीं
00:41मुख्य तरक ये है कि ये बदलाव महज एक मजबूरी है एक बड़ी जरूरत है
00:47उत्पादन शम्ता की जो सीमाएं है न वो सरकार को ये एतिहासिक कदम उठाने के लिए मजबूर कर रही है
00:52सीधी सी बात है सेना के मांग इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि पुराने धाचे के भरोसियों से पूरा करना
00:58अब व्यवाहरिक रूप से लगबग असंबव होता जा रहा है
01:01अब इस पूरे विशे की गंभीरता को अच्छे से समझने के लिए हम अपनी आज की इस चर्चा को पांच
01:06मुख्य हिस्सों में बाटेंगे
01:08पहला भारत का एतिहासिक रक्षा एक अधिकार
01:11दूसरा उत्पादंग शमता की वो सीमाएं जिनकी हमने भी बात की
01:15तीसरा आखिर निजी करण का फैसला ही क्यों लिया गया
01:18चौथा इससे जुड़े तीन सबसे बड़े और गंभीर सुरक्षा जोखिम
01:23और अंत में उन रन्नीतिक सुरक्षा उपायों पर बात करेंगे
01:26जो इस बड़लाव को सुरक्षित बनाने के लिए बेहत जरूरी है
01:29सबसे पहले बात करते हैं हमारे पहले पहलू की
01:33और थोड़ा इतिहास में जाकर देखते हैं
01:35कि भारत में रन्नीतिक मिसाईल निर्मान की शुरुवात
01:38और उसका अब तक का सफर कैसा रहा है
01:40अगर हम पिछले करीब 40 सालों के इतिहास को देखें
01:44तो ये साफ हो जाता है कि चीजें आज कितनी तेजी से बदल रही है
01:47इतने लंबे समय तक भारत का रन्नीतिक मिसाईल कारेक्रम
01:51पूरी तरह से एक बहुत ही बंद और पुरानी विवस्था की तहत काम करता रहा
01:55इसका सीधा समतलब ये था कि DRDO की प्रयोक्षालाओं और भारत डैनामिक्स लिमिटेड
02:00यानि BDL का इस पूरे कारेक्रम पर पूर्ण और एक मात्र नियंद्रन था
02:04कोई और इसमें दखल नहीं दे सकता था
02:07लेकिन अब अब ये मजबूत दर्वाजे तेजी से खुल रहे हैं
02:10पहली बार इतनी समवेदन शील प्रणालियों के लिए
02:13निजी कमपनियों को विकास और उत्पादन में भागिदार की रूप में बुलाया जा रहा है
02:17सच में ये एक ऐसा बदलाव है जिसकी कुछ साल पहले तक तो कोई कलपना भी नहीं कर सकता था
02:22अगर हम इस पूरे सफर पर नजर डालें तो ये बदलाव बहुत सपष्ट रूप से समझ आता है
02:271986 के दशक से लेकर अब तक ये पूरी तरह से एक सख्त सरकारी कंट्रोल में था
02:33अब इसे फास्ट फॉवर्ड करके 2026 के आसपास लाइए
02:36हम देख रहे हैं कि स्वदेशी AMCA फाइटर जेट कारिकरम में प्राइविट सेक्टर को शामिल करने की टेस्टिंग चल रही
02:42है
02:42और भविश्य, भविश्य का लक्ष तो इससे भी कही ज्यादा बड़ा है
02:46सीधे अगनी मिसाइल जैसी रणनीतिक और परमानुक्षमता वाली प्रणालियों के निर्माण में प्राइविट कम्पनियों को साथ लाना
02:53लेकिर यहाँ एक बड़ा सवाल उठता है कि आखिर अचानक ये बदलाव क्यों
02:58आईए अपने दूसरे पहलू की तरफ बढ़ते हैं और उन विशिष्ट रुकावटों को समझते हैं जो इतने बड़े धाचागत बदलाव
03:04को मजबूर कर रही है
03:05असल में BDL जैसी सरकारी इकाईयों पर दबाव अब अभूत पूर्वस्तर पर पहुँच गया है
03:11मतलब पानी सिर से उपर जा चुका है
03:13एक तरफ तो एक्सपोर्ट के ओर्डर्स हैं जैसे की अस्त्र मिसाइल को लेकर इंडोनेशिया की गहरी दिल्चस्पी
03:19दूसरी तरफ भारत की तीनों सेनाओं की शौट, मीडियम और लॉंग रेंज मिसाइलों की भारी घरेलू जरूरतें खड़ी है
03:26और इन सब के ऊपर DRDO के पास नए डिजाइनों की एक बहुत लंबी कतार है
03:32तो ये बिल्कुल स्पष्ट हो चुका है कि मुठी भर सरकारी कारखाने चाहे वो कितनी भी कोशिश कर लें, इतने
03:38बड़े प्यमाने पर उत्पादन नहीं कर सकते
03:40और देखिए, इस रुकावट को बड़ी तस्वीर से जोड़ कर देखना बहुत जरूरी है
03:45उत्पादन की गती को न बढ़ा पाना कोई आम फैक्टरी या उद्योगिक समस्या नहीं है
03:50ये सीधे तोर पर हमारी राष्ट्रिय सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खत्रा है
03:54अगर सेना को सही समय पर और सही मात्रा में उन्नत हत्यार नहीं मिलते हैं
03:59तो आप खुद सोचिए ये रणनीतिक मोर्चे पर देश के लिए कितनी गंभीर कमजोरी बन सकती है
04:04और ठीक इसी समस्या के एक बड़े समाधान के रूप में एंट्री होती है निजी करण की
04:09चलिए तीसरे हिस्से में उन तरकों को देखते हैं जो प्राइवेट सेक्टर की भागिदारी का पुरजोर समर्थन करते हैं
04:16अब यहां ये जानना बहुत दिल्चस्प है कि जिन प्राइवेट कमपनियों को इसमें शामिल किया जा रहा है न
04:21वे कोई नौसिखिय नहीं हैं बिलकुल नहीं टाटा एडवांस सिस्टेम्स और सोलर इंडस्ट्री जैसी बड़ी कमपनियां पहले से ही घरेलू
04:28और निर्यात दोनों बाजारों के लिए बेहत जटल सबसिस्टम रॉकेट फ्यूल और एरो स्ट्रक्चर बना रही हैं
04:35कहने का मतलब ये है कि तक्नीकी विशेशक्यता और बुन्यादी शमता उन्ने पास पहले से ही भरपूर मातरा में मौजूद
04:41है
04:41अब यहां ध्यान देने वाली सबसे दिल्चस्प बात ये है कि इसके फाइदे केवाल काम की गती बढ़ने तक सीमित
04:47नहीं है
04:48हां ये सच है कि अगनी सिक्स जैसी एहम परियोजनाओं में अब कम समय लगेगा
04:53और BDL अपने अन्य जरूरी प्रोजेक्स के लिए आजाद हो जाएगा
04:56लेकिन इसका एक बहुत ही शांत पर बेहत गहरा रणनीतिक लाब भी है
05:01जरा सोचिए जब उत्पादन किसी एक जगे न होकर अलग-अलग भगौलिक स्थानों और कई कंपनी में बटा होगा
05:07तो किसी भी दुश्मन के लिए सटीक हवाई हमलों से उसे एक जटके में नश्ट करना लगभग असंबभ हो जाएगा
05:13ये वीकेंदरी करन या कहें डी-सेंट्रलाइजेशन अपने आप में एक जबरदस्त रक्षात्मक ढाल है
05:19हाना कि ठहरिए क्या ये पूरी प्रक्रिया जोखिमुक्त है बिल्कुल नहीं
05:24चलिए अपनी चर्चा के चौथे हिस्से की और मुड़ते हैं
05:27इस बदलाव की कमजोरियों और इसके खत्रों का पूरी गंभीरता और निश्पक्षता के साथ मुल्यांकन करना बेहद बेहद आवश्चक है
05:34श्रोट सामगरी ने इस पूरी प्रक्रिया में तीन बहुत बड़े और गंभीर जोखमों की पैचान की है
05:40पहला समवेदनशील जानकारी की सुरक्षा, दूसरा परमाणू कमान की जवाब देही और तीसरा ये सुनिश्चित करना की ये बदलाव केवल
05:48एक नया एक आधिकार या मुनोपुली न बन जाए
05:52किसी भी कॉर्परेट संस्ता के हातों में परमानू से जुड़ी प्रणालियों को सौपना सच में एक बहुत बड़ा दाव है
05:57चलिए पहले जोखिम की बात करते हैं और ये थोड़ा डरावना भी है
06:01सूचना सुरक्षा
06:02जरा सोचिए मिसाइल के बेहद समवेदनशील डिजाइन, फ्यूल फॉर्मिला और री एंट्री तकनीक का सारा डेटा अब प्राइवेट कंपनियों के
06:10आईटी सिस्टम में रहेगा
06:11जिसे डिया डियो सीधे तोर पर नियंत्रित नहीं करता
06:26डेटा की एक छोटी सी भी लीक सुच में विनाशकारी साबित हो सकती है
06:31दूसरा बड़ा जोखिम कमान की जवाब देही से जुड़ा है
06:34देखे, एक मिसाइल या डिलिवरी सिस्टम को असेंबल करना एक बात है
06:39और वास्तविक परमाणों हत्यारों का नियंत्रण बिल्कुल अलग बाद
06:42सामरिक बल कमान्ड यानि स्ट्रटीजिक फोर्सिस कमान्ड को ही हमेशा अंतिम प्राधिकारी होना चाहिए
06:48जैसे जैसे प्राइविट सेक्टर इन डिलिवरी सिस्टम को बनाएगा
06:51हमें एक बेहत स्पष्ट पारदर्शी और मजबूत फाइरवाल की आवशक्ता होगी
06:56ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि उनका काम सिर्फ निर्मान तक ही सीमित रहे
07:00और रणनीटिक नियंत्रण सौ प्रतिसत सेना के हाथों में सुरक्षित रहे
07:04तीसरा जोखिम है विविधीकरन यानि डाइवर्सिफिकेशन का भ्रम
07:08अगर हम एक सरकारी एक आधिकार को हटा कर उसकी जगा केवल दो या तीन बड़ी प्राइविट कंपनियों का दबदबा
07:15बना देते हैं
07:15जिसे अर्थशास्त्र में औली ग्योपॉली खहते हैं तो क्या फाइदा इससे नवाचार या इनोवेशन का जो असली लक्ष है वो
07:23कभी पूरा नहीं होगा
07:24वास्तविक विविधी करन तब आएगा जब छोटी और मजहूली कंपनियों यानि MSMEs को भी इस पूरे एको सिस्टम में एक
07:31सार्थक और बड़ी भूमे का निभाने का मौका मिलेगा
07:34तो इन भारी जोखिमों को देखते हुए सुरक्षा के उपाय क्या होने चाहिए
07:39अपनी चर्चा के इस अंतिम भाग में हम इसी बात पर ध्यान के इंद्रत करेंगे कि अंतराश्ट्रिय उधारणों से सीख
07:46लेकर हम इस नई नीती को सुरक्षित रूप से कैसे लागू कर सकते हैं
07:50आईए अब देखते हैं कि ये सब आगे कैसे जुड़ता है भारत इस मॉडल को शुनने से शुरू नहीं कर
07:55रहा है अमेरिका का ही उधारन लीजिए वो दर्शकों से लोखीट मार्टिन जैसी प्राइवेट कंपनियों पर निर्भर रहे हैं
08:02लेकिन अमेरिका का ये मॉडल केवल इसलिए सफल है क्योंकि वहां इन कंपनियों पर सरकार की बेहद बेहद कड़ी निगरानी
08:08होती है
08:08भारत का ये नया धाचा अभी अपनी शुरुवाती अवस्था में है
08:12अमेरिकी अनुभव ये साफ साबित करता है कि प्राइवेट ठेकेदारी बहुत अच्छे से काम कर सकती है
08:16लेकिन इसके लिए एक विशाल और मजबूत संस्थागट धाचे की आवशकता होती है
08:21अब सवाल ये है कि ये संस्थागट धाचा आखिर कैसा होना चाहिए
08:25इसके लिए कुछ चीजें एकदम अनिवारे हैं
08:28बहुत ही सक्त जाच या वेटिंग प्रणाली होनी चाहिए
08:31प्राइवेट कंपनियों के कारखानों के लिए टॉप सीक्रेट लेवल के सुरक्षा मानक होने चाहिए
08:36और एक ऐसी समर्पित निगरानी अथॉरिटी होनी चाहिए
08:39जो आम रक्षा खरीद विभागों से बिलकुल अलग हो
08:42और सबसे जरूरी बात ये तमाम सुरक्षा उपाए
08:45इस नीती के लागू होने से पहले स्तापित किये जाने चाहिए
08:48ना कि बाद में जुगाड के तौर पर
08:50इस पूरे विशलेशन का मूल निशकर्ष बस यही है
08:54ध्यान रहे हम यहां किसी आम हत्यार की बात नहीं कर रहे हैं
08:58एक रंड नीतिक और परमाणो मिसाइल कारिक्रम कोई ऐसी जगह नहीं है
09:02जहां पहले गलती करें और बाद में अपनी कमियों से सीखें
09:05बिलकुल नहीं
09:06इस बदलाव के प्रबंदन में हुई एक छोटी सी भी चूक
09:09सीधे तोर पर देश के परमाणो डिटरेंट को हमारी सुरक्षा को खत्रे में डाल सकती है
09:14तो चलिए अपने इस चर्चा को एक बहुत बड़े सवाल के साथ आखिरकार विराम देते हैं
09:19ये पूरा घटना करम वाकई एक बहुत बड़ा दाव है
09:22अगर इसे सही तरीके से कड़ी निगरानी और कड़े सुरक्षा मानकों के साथ लागू किया गया
09:27तो यकीनन ये भारत की रक्षाक शमता को एक बिलकुल नए स्तर पर ले जाएगा
09:31लेकिन क्या ये एतिहासिक और द्योगिक कदम वास्तों में हमारी सुरक्षा को मजबूत बनाएगा
09:36या फिर वैवस्था में ऐसी नई और अंजानी कमजूरियां पैदा कर देगा
09:40जिनका अंदाजा हम आज लगा भी नहीं पा रहे हैं
09:43दाव बहुत उचे हैं और आने वाले कुछ वर्षी ये तै करेंगे
09:46कि ये अगनी रणनीती भारत के लिए कितनी सफल साबित होती है
09:50आप इस बारे में जरूर सुचिएगा
09:51हमारे इस विशलेशन में साथ जुड़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद