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क्या भारत की सबसे घातक और परमाणु क्षमता से लैस 'अग्नि' (Agni) मिसाइलों को अब निजी क्षेत्र (Private Sector) की कंपनियाँ बनाएँगी?

पिछले चार दशकों से भारत का रणनीतिक मिसाइल बेड़ा केवल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) जैसे सार्वजनिक उपक्रमों तक सीमित था। लेकिन अब DRDO ने निजी कंपनियों (Tata Advanced Systems, Solar Industries) को विकास-सह-उत्पादन भागीदार (Development-Cum-Production Partners) के रूप में आमंत्रित करने का ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला लिया है।

भारतीय वायुसेना के पूर्व लड़ाकू पायलट और प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी (रि.) के इस विशेष विश्लेषण में जानिए इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे की पूरी सच्चाई:

क्यों DRDO को खोलने पड़े निजी कंपनियों के लिए दरवाजे? (BDL पर ऑर्डर्स का दबाव और AMCA मॉडल)
'Agni-VI' जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स और सप्लाई चेन सिक्योरिटी पर इसका क्या असर होगा?
सबसे बड़ी चिंताएँ: परमाणु मिसाइलों के क्लासिफाइड डिज़ाइन, प्रोपेलेंट फॉर्मूले और डेटा लीक्स का खतरा?
प्राइवेट मोनोपॉली (Private Oligopoly) का खतरा: क्या चुनिंदा उद्योग घरानों का ही दबदबा रहेगा?
अमेरिका का लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) मॉडल और भारत के लिए कड़े सुरक्षा सबक।

क्या निजी कंपनियों की एंट्री भारत को सुपरपावर बनाएगी या रक्षा सुरक्षा के लिए नया जोखिम पैदा करेगी? अपनी राय कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें!

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#AgniMissile, #DRDO, #IndianDefence, #PrivateSectorDefence, #StrategicNews

~HT.178~ED.110~GR.510~VG.HM~

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Transcript
00:00तो चलिए सीधे मुद्दे पर आते हैं
00:01आज के इस विशलेशन में हम एक ऐसे विशे की गहराई में जाने वाले हैं
00:05जो सीधे तोर पर भारत की राष्ट्रिय सुरक्षा और रक्षा नीती के दिल से जुड़ा है
00:09देखी भारत अपनी रक्षा नीती में एक बहुत बड़ा और सच कहूं तो बेहत समवेदनशील बदलाव कर रहा है
00:15ये कोई छोटा मोटा फैसला नहीं है बलकि एक ऐसा एतिहासिक कदम है जो भारत की परमाणु प्रतिरोधक शमता
00:21यानि हमारे न्यूक्लियर डिटरेंट के निर्माण के पूरे तरीके को जड़ से बदल कर रख देगा
00:26दशकों से जो एक बेहत सक्त और बंद विवस्ता चली आ रही थी वो अब एक बिलकुल नए यूग में
00:31कदम रख रही है
00:32तो यहाँ सबसे एहम बात ये है कि इस एतिहासिक बदलाव के पीछे कोई राजनीतिक विचारधारा या किसी खास एजेंडे
00:40का हाथ नहीं है
00:41बिलकुल नहीं
00:41मुख्य तरक ये है कि ये बदलाव महज एक मजबूरी है एक बड़ी जरूरत है
00:47उत्पादन शम्ता की जो सीमाएं है न वो सरकार को ये एतिहासिक कदम उठाने के लिए मजबूर कर रही है
00:52सीधी सी बात है सेना के मांग इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि पुराने धाचे के भरोसियों से पूरा करना
00:58अब व्यवाहरिक रूप से लगबग असंबव होता जा रहा है
01:01अब इस पूरे विशे की गंभीरता को अच्छे से समझने के लिए हम अपनी आज की इस चर्चा को पांच
01:06मुख्य हिस्सों में बाटेंगे
01:08पहला भारत का एतिहासिक रक्षा एक अधिकार
01:11दूसरा उत्पादंग शमता की वो सीमाएं जिनकी हमने भी बात की
01:15तीसरा आखिर निजी करण का फैसला ही क्यों लिया गया
01:18चौथा इससे जुड़े तीन सबसे बड़े और गंभीर सुरक्षा जोखिम
01:23और अंत में उन रन्नीतिक सुरक्षा उपायों पर बात करेंगे
01:26जो इस बड़लाव को सुरक्षित बनाने के लिए बेहत जरूरी है
01:29सबसे पहले बात करते हैं हमारे पहले पहलू की
01:33और थोड़ा इतिहास में जाकर देखते हैं
01:35कि भारत में रन्नीतिक मिसाईल निर्मान की शुरुवात
01:38और उसका अब तक का सफर कैसा रहा है
01:40अगर हम पिछले करीब 40 सालों के इतिहास को देखें
01:44तो ये साफ हो जाता है कि चीजें आज कितनी तेजी से बदल रही है
01:47इतने लंबे समय तक भारत का रन्नीतिक मिसाईल कारेक्रम
01:51पूरी तरह से एक बहुत ही बंद और पुरानी विवस्था की तहत काम करता रहा
01:55इसका सीधा समतलब ये था कि DRDO की प्रयोक्षालाओं और भारत डैनामिक्स लिमिटेड
02:00यानि BDL का इस पूरे कारेक्रम पर पूर्ण और एक मात्र नियंद्रन था
02:04कोई और इसमें दखल नहीं दे सकता था
02:07लेकिन अब अब ये मजबूत दर्वाजे तेजी से खुल रहे हैं
02:10पहली बार इतनी समवेदन शील प्रणालियों के लिए
02:13निजी कमपनियों को विकास और उत्पादन में भागिदार की रूप में बुलाया जा रहा है
02:17सच में ये एक ऐसा बदलाव है जिसकी कुछ साल पहले तक तो कोई कलपना भी नहीं कर सकता था
02:22अगर हम इस पूरे सफर पर नजर डालें तो ये बदलाव बहुत सपष्ट रूप से समझ आता है
02:271986 के दशक से लेकर अब तक ये पूरी तरह से एक सख्त सरकारी कंट्रोल में था
02:33अब इसे फास्ट फॉवर्ड करके 2026 के आसपास लाइए
02:36हम देख रहे हैं कि स्वदेशी AMCA फाइटर जेट कारिकरम में प्राइविट सेक्टर को शामिल करने की टेस्टिंग चल रही
02:42है
02:42और भविश्य, भविश्य का लक्ष तो इससे भी कही ज्यादा बड़ा है
02:46सीधे अगनी मिसाइल जैसी रणनीतिक और परमानुक्षमता वाली प्रणालियों के निर्माण में प्राइविट कम्पनियों को साथ लाना
02:53लेकिर यहाँ एक बड़ा सवाल उठता है कि आखिर अचानक ये बदलाव क्यों
02:58आईए अपने दूसरे पहलू की तरफ बढ़ते हैं और उन विशिष्ट रुकावटों को समझते हैं जो इतने बड़े धाचागत बदलाव
03:04को मजबूर कर रही है
03:05असल में BDL जैसी सरकारी इकाईयों पर दबाव अब अभूत पूर्वस्तर पर पहुँच गया है
03:11मतलब पानी सिर से उपर जा चुका है
03:13एक तरफ तो एक्सपोर्ट के ओर्डर्स हैं जैसे की अस्त्र मिसाइल को लेकर इंडोनेशिया की गहरी दिल्चस्पी
03:19दूसरी तरफ भारत की तीनों सेनाओं की शौट, मीडियम और लॉंग रेंज मिसाइलों की भारी घरेलू जरूरतें खड़ी है
03:26और इन सब के ऊपर DRDO के पास नए डिजाइनों की एक बहुत लंबी कतार है
03:32तो ये बिल्कुल स्पष्ट हो चुका है कि मुठी भर सरकारी कारखाने चाहे वो कितनी भी कोशिश कर लें, इतने
03:38बड़े प्यमाने पर उत्पादन नहीं कर सकते
03:40और देखिए, इस रुकावट को बड़ी तस्वीर से जोड़ कर देखना बहुत जरूरी है
03:45उत्पादन की गती को न बढ़ा पाना कोई आम फैक्टरी या उद्योगिक समस्या नहीं है
03:50ये सीधे तोर पर हमारी राष्ट्रिय सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खत्रा है
03:54अगर सेना को सही समय पर और सही मात्रा में उन्नत हत्यार नहीं मिलते हैं
03:59तो आप खुद सोचिए ये रणनीतिक मोर्चे पर देश के लिए कितनी गंभीर कमजोरी बन सकती है
04:04और ठीक इसी समस्या के एक बड़े समाधान के रूप में एंट्री होती है निजी करण की
04:09चलिए तीसरे हिस्से में उन तरकों को देखते हैं जो प्राइवेट सेक्टर की भागिदारी का पुरजोर समर्थन करते हैं
04:16अब यहां ये जानना बहुत दिल्चस्प है कि जिन प्राइवेट कमपनियों को इसमें शामिल किया जा रहा है न
04:21वे कोई नौसिखिय नहीं हैं बिलकुल नहीं टाटा एडवांस सिस्टेम्स और सोलर इंडस्ट्री जैसी बड़ी कमपनियां पहले से ही घरेलू
04:28और निर्यात दोनों बाजारों के लिए बेहत जटल सबसिस्टम रॉकेट फ्यूल और एरो स्ट्रक्चर बना रही हैं
04:35कहने का मतलब ये है कि तक्नीकी विशेशक्यता और बुन्यादी शमता उन्ने पास पहले से ही भरपूर मातरा में मौजूद
04:41है
04:41अब यहां ध्यान देने वाली सबसे दिल्चस्प बात ये है कि इसके फाइदे केवाल काम की गती बढ़ने तक सीमित
04:47नहीं है
04:48हां ये सच है कि अगनी सिक्स जैसी एहम परियोजनाओं में अब कम समय लगेगा
04:53और BDL अपने अन्य जरूरी प्रोजेक्स के लिए आजाद हो जाएगा
04:56लेकिन इसका एक बहुत ही शांत पर बेहत गहरा रणनीतिक लाब भी है
05:01जरा सोचिए जब उत्पादन किसी एक जगे न होकर अलग-अलग भगौलिक स्थानों और कई कंपनी में बटा होगा
05:07तो किसी भी दुश्मन के लिए सटीक हवाई हमलों से उसे एक जटके में नश्ट करना लगभग असंबभ हो जाएगा
05:13ये वीकेंदरी करन या कहें डी-सेंट्रलाइजेशन अपने आप में एक जबरदस्त रक्षात्मक ढाल है
05:19हाना कि ठहरिए क्या ये पूरी प्रक्रिया जोखिमुक्त है बिल्कुल नहीं
05:24चलिए अपनी चर्चा के चौथे हिस्से की और मुड़ते हैं
05:27इस बदलाव की कमजोरियों और इसके खत्रों का पूरी गंभीरता और निश्पक्षता के साथ मुल्यांकन करना बेहद बेहद आवश्चक है
05:34श्रोट सामगरी ने इस पूरी प्रक्रिया में तीन बहुत बड़े और गंभीर जोखमों की पैचान की है
05:40पहला समवेदनशील जानकारी की सुरक्षा, दूसरा परमाणू कमान की जवाब देही और तीसरा ये सुनिश्चित करना की ये बदलाव केवल
05:48एक नया एक आधिकार या मुनोपुली न बन जाए
05:52किसी भी कॉर्परेट संस्ता के हातों में परमानू से जुड़ी प्रणालियों को सौपना सच में एक बहुत बड़ा दाव है
05:57चलिए पहले जोखिम की बात करते हैं और ये थोड़ा डरावना भी है
06:01सूचना सुरक्षा
06:02जरा सोचिए मिसाइल के बेहद समवेदनशील डिजाइन, फ्यूल फॉर्मिला और री एंट्री तकनीक का सारा डेटा अब प्राइवेट कंपनियों के
06:10आईटी सिस्टम में रहेगा
06:11जिसे डिया डियो सीधे तोर पर नियंत्रित नहीं करता
06:26डेटा की एक छोटी सी भी लीक सुच में विनाशकारी साबित हो सकती है
06:31दूसरा बड़ा जोखिम कमान की जवाब देही से जुड़ा है
06:34देखे, एक मिसाइल या डिलिवरी सिस्टम को असेंबल करना एक बात है
06:39और वास्तविक परमाणों हत्यारों का नियंत्रण बिल्कुल अलग बाद
06:42सामरिक बल कमान्ड यानि स्ट्रटीजिक फोर्सिस कमान्ड को ही हमेशा अंतिम प्राधिकारी होना चाहिए
06:48जैसे जैसे प्राइविट सेक्टर इन डिलिवरी सिस्टम को बनाएगा
06:51हमें एक बेहत स्पष्ट पारदर्शी और मजबूत फाइरवाल की आवशक्ता होगी
06:56ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि उनका काम सिर्फ निर्मान तक ही सीमित रहे
07:00और रणनीटिक नियंत्रण सौ प्रतिसत सेना के हाथों में सुरक्षित रहे
07:04तीसरा जोखिम है विविधीकरन यानि डाइवर्सिफिकेशन का भ्रम
07:08अगर हम एक सरकारी एक आधिकार को हटा कर उसकी जगा केवल दो या तीन बड़ी प्राइविट कंपनियों का दबदबा
07:15बना देते हैं
07:15जिसे अर्थशास्त्र में औली ग्योपॉली खहते हैं तो क्या फाइदा इससे नवाचार या इनोवेशन का जो असली लक्ष है वो
07:23कभी पूरा नहीं होगा
07:24वास्तविक विविधी करन तब आएगा जब छोटी और मजहूली कंपनियों यानि MSMEs को भी इस पूरे एको सिस्टम में एक
07:31सार्थक और बड़ी भूमे का निभाने का मौका मिलेगा
07:34तो इन भारी जोखिमों को देखते हुए सुरक्षा के उपाय क्या होने चाहिए
07:39अपनी चर्चा के इस अंतिम भाग में हम इसी बात पर ध्यान के इंद्रत करेंगे कि अंतराश्ट्रिय उधारणों से सीख
07:46लेकर हम इस नई नीती को सुरक्षित रूप से कैसे लागू कर सकते हैं
07:50आईए अब देखते हैं कि ये सब आगे कैसे जुड़ता है भारत इस मॉडल को शुनने से शुरू नहीं कर
07:55रहा है अमेरिका का ही उधारन लीजिए वो दर्शकों से लोखीट मार्टिन जैसी प्राइवेट कंपनियों पर निर्भर रहे हैं
08:02लेकिन अमेरिका का ये मॉडल केवल इसलिए सफल है क्योंकि वहां इन कंपनियों पर सरकार की बेहद बेहद कड़ी निगरानी
08:08होती है
08:08भारत का ये नया धाचा अभी अपनी शुरुवाती अवस्था में है
08:12अमेरिकी अनुभव ये साफ साबित करता है कि प्राइवेट ठेकेदारी बहुत अच्छे से काम कर सकती है
08:16लेकिन इसके लिए एक विशाल और मजबूत संस्थागट धाचे की आवशकता होती है
08:21अब सवाल ये है कि ये संस्थागट धाचा आखिर कैसा होना चाहिए
08:25इसके लिए कुछ चीजें एकदम अनिवारे हैं
08:28बहुत ही सक्त जाच या वेटिंग प्रणाली होनी चाहिए
08:31प्राइवेट कंपनियों के कारखानों के लिए टॉप सीक्रेट लेवल के सुरक्षा मानक होने चाहिए
08:36और एक ऐसी समर्पित निगरानी अथॉरिटी होनी चाहिए
08:39जो आम रक्षा खरीद विभागों से बिलकुल अलग हो
08:42और सबसे जरूरी बात ये तमाम सुरक्षा उपाए
08:45इस नीती के लागू होने से पहले स्तापित किये जाने चाहिए
08:48ना कि बाद में जुगाड के तौर पर
08:50इस पूरे विशलेशन का मूल निशकर्ष बस यही है
08:54ध्यान रहे हम यहां किसी आम हत्यार की बात नहीं कर रहे हैं
08:58एक रंड नीतिक और परमाणो मिसाइल कारिक्रम कोई ऐसी जगह नहीं है
09:02जहां पहले गलती करें और बाद में अपनी कमियों से सीखें
09:05बिलकुल नहीं
09:06इस बदलाव के प्रबंदन में हुई एक छोटी सी भी चूक
09:09सीधे तोर पर देश के परमाणो डिटरेंट को हमारी सुरक्षा को खत्रे में डाल सकती है
09:14तो चलिए अपने इस चर्चा को एक बहुत बड़े सवाल के साथ आखिरकार विराम देते हैं
09:19ये पूरा घटना करम वाकई एक बहुत बड़ा दाव है
09:22अगर इसे सही तरीके से कड़ी निगरानी और कड़े सुरक्षा मानकों के साथ लागू किया गया
09:27तो यकीनन ये भारत की रक्षाक शमता को एक बिलकुल नए स्तर पर ले जाएगा
09:31लेकिन क्या ये एतिहासिक और द्योगिक कदम वास्तों में हमारी सुरक्षा को मजबूत बनाएगा
09:36या फिर वैवस्था में ऐसी नई और अंजानी कमजूरियां पैदा कर देगा
09:40जिनका अंदाजा हम आज लगा भी नहीं पा रहे हैं
09:43दाव बहुत उचे हैं और आने वाले कुछ वर्षी ये तै करेंगे
09:46कि ये अगनी रणनीती भारत के लिए कितनी सफल साबित होती है
09:50आप इस बारे में जरूर सुचिएगा
09:51हमारे इस विशलेशन में साथ जुड़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

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